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गेस्ट टीचरों के समायोजन पर प्रदेश सरकार से जवाब तलब

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद हटाए गए गेस्ट टीचरों को समायोजित करने का आरोप
चंडीगढ़ : हरियाणा शिक्षा विभाग की ओर से हटाए गए गेस्ट टीचरों को दोबारा स्कूलों में समायोजित करने और इस संदर्भ में तत्कालीन हुड्डा सरकार के समय की समायोजन नीति पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। हटाए गए गेस्ट टीचरों के मामले में उन्हें बार-बार रिक्त पदों पर कानूनी प्रक्रिया अपनाए बगैर समायोजित करने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। मामले की अगली सुनवाई अगले साल जनवरी महीने में होगी।
सिरसा जिले के अहमदपुर निवासी नानक चन्द ने याचिका दायर कर चुनौती दी है। याचिका में कहा है कि एक मामले में हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए फैसलों के बावजूद गेस्ट टीचरों का समायोजन कानूनी तौर पर सही नहीं है। इस दलील के साथ समायोजन नीति को रद्द करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता के वकील जगबीर मलिक ने हाईकोर्ट को बताया कि खुद समायोजन पॉलिसी में ही यह स्पष्ट है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के मद्देनजर किसी भी गेस्ट टीचर को समायोजित करने को सरकार बाध्य नहीं है। 
सुुप्रीम कोर्ट ने 30 मार्च 2012 को अपने फैसले में स्पष्ट कहा था कि किसी भी सेवामुक्त गेस्ट टीचर को दोबारा नियुक्ति नहीं दी जा सकती। एडवोकेट मलिक ने हाईकोर्ट की ओर से इस तरह के कई मामलों में जारी आदेशों का भी हवाला दिया, जिनमें हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद गेस्ट टीचरों को समायोजित करने का आदेश पारित करने से मना कर दिया गया था। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि सरकार नियमित शिक्षकों की सीधी भर्ती में देरी कर रही है।
हाईकोर्ट के समक्ष यह भी तथ्य रखा गया कि टीजीटी एवं पीजीटी के प्रमोशन कोटे के खाली पदों को भरने के लिए पिछले तीन वर्षों से कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। आरोप लगाया है कि जब भी किसी गेस्ट टीचर को कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में हटाया जाता है तो विभाग उसको समायोजित कर दोबारा नियुक्ति दे देता है। यह सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के 30 मार्च 2012 के आदेश की अवमानना है। 

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