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अमरदीप गुप्ता, यमुनानगर । हरियाणा के सरकारी स्कूलों में बोर्ड की परीक्षा का परिणाम संतोषजनक नहीं रहा। इस बात से चिंतित शिक्षा विभाग ने खराब परीक्षा परिणाम देने वाले स्कूलों को स्थिति सुधारने के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
इन स्कूलों की जिम्मेदारी ब्लाकस्तर के शिक्षा अधिकारियों को दी गई है। वे हर माह स्कूलों में जाकर बच्चों व अध्यापकों से बात कर उसकी रिपोर्ट विभाग की साइट पर अपलोड करेंगे।
10वीं और 12वीं की बोर्ड की परीक्षा में उम्मीद के मुताबिक परिणाम न आने पर तमतमाए शिक्षा अधिकारियों ने स्तर में सुधार लाने के लिए बिना देरी किए तैयारी शुरू कर दी है। विभाग की ओर से प्रदेशभर के ब्लाक स्तर के अधिकारियों को पत्र लिखकर सूचित किया गया है कि वह अपने अंतर्गत आने वाले स्कूलों का हर माह दौरा करेंगे। निरीक्षण के दौरान स्कूल में पढ़ने वाले चार से पांच विद्यार्थियों से सिलेबस से जुड़े सवाल पूछने है। इसके बाद वह अध्यापकों से भी सवाल-जवाब करेंगे। इससे यह पता लगाया जाएगा कि अध्यापकों ने बच्चों को किस प्रकार से बोर्ड की परीक्षा की तैयारी कराई है। तैयारी को लेकर अध्यापक कितने गंभीर हैं। तैयारी सरल तरीके से कराई गई है कि नहीं यह भी निरीक्षण के दौरान देखा जाएगा। स्कूल से ही बीईओ विभाग की तरफ से जारी दोनों प्रोफार्म भरेंगे।
पढ़ाई को रुचिकर बनाने की जिम्मेदारी
अधिकारियों की माने तो पढ़ाई को रुचि कर व सरल बनाने की जिम्मेदारी भी संबंधित अध्यापकों की है। उनका जिम्मा केवल सिलेबस पूरा करना ही नहीं है। अक्सर देखने में आता है कि अध्यापक केवल बच्चों को पुस्तकें पढ़ाकर अपने कार्य की इतिश्री कर लेते हैं। यह जानने का कतई प्रयास नहीं करते हैं कि उनके द्वारा पढ़ाया गया विषय बच्चे को ठीक से समझ भी आया है कि नहीं। निरीक्षण रिपोर्ट में यह कारम भी दिया गया है। इसकी भी निरीक्षण के दौरान जांच की जाएगी।विभाग ने शिक्षा स्तर में सुधार लाने की कवायद छेड़ी है। इसके लिए प्रदेश के सभी ब्लॉक लेवल आफिसर को जिम्मेदारी दी गई है कि वह अपने अधीन आने वाले स्कूलों का दौरा कर बच्चों तथा अध्यापकों से सवाल करेंगे। स्कूल से ही जांच प्रोफार्मा भर कर विभाग की साइट पर अपलोड करेंगे।
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