8साल से सरकार के सौतेले व्यवहार को सहन करते रहे एसएसए/रमसा अध्यापकों के सब्र का बांध टूट गया है। सरकार ने उनके संघर्ष के बावजूद हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट पेश की और ना ही वेतन जारी कर रही है। अब सरकार इन अध्यापकों को नौकरी से निकालने पर गई है।
यह विचार एसएसए/ रमसा अध्यापक यूनियन के नेताओं ने रविवार को नच्छतर भवन में राज्य स्तरीय बैठक में प्रकट किए। इस समय प्रदेशाध्यक्ष दीदार सिंह मुदकी ने कहा कि डायरेक्टर जनरल आफ स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से 61 एसएसए अध्यापकों का कॉन्ट्रेक्ट आरजी 3 महीने के लिए रिन्यू करना सरकार की गलत नीयत को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि नतीजों के लिए केवल अध्यापकों को बली का बकरा बनाना गलत है। इस संबंधी अध्यापक अपना स्पष्टीकरण शिक्षा मंत्री को भी दे चुके हैं। फिर भी इसकी गाज अध्यापकों की नौकरी पर गिरी तो सरकार के खिलाफ संघर्ष किया जाएगा। इसलिए अब 13 जुलाई को जिला स्तरीय धरने दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि एक लाख नौकरियां देने का वादा करने वाली सरकार एसएस अध्यापकों के वेतन 3 महीनों से, रमसा अध्यापकों, हेड अध्यापकों के 7 महीनों का वेतन और रमसा लैब अटेंडेंट का 15 महीने से वेतन नहीं दे रही। फिर नई नौकरियां कहां से देगी।
इसपर बनी सहमति
बैठकमें सहमति बनी कि अध्यापकों, हेड मास्टरों, लैब अटेंडेंट के जो वेतन रुके हुए हैं, 61 अध्यापकों के रुके कॉन्ट्रेक्ट के लिए डीजीएसई को मिला जाएगा। इस के बाद 13 जुलाई को जिला स्तरीय धरने दिए जाएंगे।
बैठकमें यह भी थे उपस्थित: इसबैठक में राजवीर समराला, जजपाल बाजेके, गुरप्रीत सिंह, सपरजन जौन, साहिल डांग फरीदकोट, जगसीर सिंह, संदीप सहगल फिरोजपुर, सतनाम आदि विभिन्न जिलों से शामिल हुए।
सरकार दावे तो करती है पर हकीकत कुछ और: जीदा
सूबाजनरल सेक्रेटरी हरजीत सिंह जीदा ने कहा कि जहां मुख्यमंत्री पंजाब यह दावा करते हैं कि वह हर सोमवार को 1 घंटा आम लोगों से फोन पर बात करेंगे, वहीं उनके पास 12000 अध्यापकों के संगठन के साथ बात करने के लिए समय ही नहीं है। यही नहीं शिक्षा मंत्री पंजाब ने 3 जून, 2015 को ठेके पर रखे अध्यापकों को पक्का करने के लिए कमेटी बनाकर उसे 3 महीनों में रिपोर्ट देने को कहा था। 12 महीने बाद भी उसकी रिपोर्ट नहीं आई। उन्होंने कहा कि जब तक अध्यापकों को पक्का नहीं किया जाता वह चैन से नहीं बैठेंगे।
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यह विचार एसएसए/ रमसा अध्यापक यूनियन के नेताओं ने रविवार को नच्छतर भवन में राज्य स्तरीय बैठक में प्रकट किए। इस समय प्रदेशाध्यक्ष दीदार सिंह मुदकी ने कहा कि डायरेक्टर जनरल आफ स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से 61 एसएसए अध्यापकों का कॉन्ट्रेक्ट आरजी 3 महीने के लिए रिन्यू करना सरकार की गलत नीयत को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि नतीजों के लिए केवल अध्यापकों को बली का बकरा बनाना गलत है। इस संबंधी अध्यापक अपना स्पष्टीकरण शिक्षा मंत्री को भी दे चुके हैं। फिर भी इसकी गाज अध्यापकों की नौकरी पर गिरी तो सरकार के खिलाफ संघर्ष किया जाएगा। इसलिए अब 13 जुलाई को जिला स्तरीय धरने दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि एक लाख नौकरियां देने का वादा करने वाली सरकार एसएस अध्यापकों के वेतन 3 महीनों से, रमसा अध्यापकों, हेड अध्यापकों के 7 महीनों का वेतन और रमसा लैब अटेंडेंट का 15 महीने से वेतन नहीं दे रही। फिर नई नौकरियां कहां से देगी।
इसपर बनी सहमति
बैठकमें सहमति बनी कि अध्यापकों, हेड मास्टरों, लैब अटेंडेंट के जो वेतन रुके हुए हैं, 61 अध्यापकों के रुके कॉन्ट्रेक्ट के लिए डीजीएसई को मिला जाएगा। इस के बाद 13 जुलाई को जिला स्तरीय धरने दिए जाएंगे।
बैठकमें यह भी थे उपस्थित: इसबैठक में राजवीर समराला, जजपाल बाजेके, गुरप्रीत सिंह, सपरजन जौन, साहिल डांग फरीदकोट, जगसीर सिंह, संदीप सहगल फिरोजपुर, सतनाम आदि विभिन्न जिलों से शामिल हुए।
सरकार दावे तो करती है पर हकीकत कुछ और: जीदा
सूबाजनरल सेक्रेटरी हरजीत सिंह जीदा ने कहा कि जहां मुख्यमंत्री पंजाब यह दावा करते हैं कि वह हर सोमवार को 1 घंटा आम लोगों से फोन पर बात करेंगे, वहीं उनके पास 12000 अध्यापकों के संगठन के साथ बात करने के लिए समय ही नहीं है। यही नहीं शिक्षा मंत्री पंजाब ने 3 जून, 2015 को ठेके पर रखे अध्यापकों को पक्का करने के लिए कमेटी बनाकर उसे 3 महीनों में रिपोर्ट देने को कहा था। 12 महीने बाद भी उसकी रिपोर्ट नहीं आई। उन्होंने कहा कि जब तक अध्यापकों को पक्का नहीं किया जाता वह चैन से नहीं बैठेंगे।
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