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पी.यू. के 60 पार शिक्षकों को हाईकोर्ट का झटका, तत्काल प्रभाव से सेवानिवृत्त करने के आदेश

चंडीगढ़ (विवेक): पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब यूनिवर्सिटी के शिक्षकों को बड़ा झटका देते हुए कहा कि उन्हें 65 वर्ष की रिटायरमैंट उम्र का लाभ नहीं दिया जा सकता। हाईकोर्ट ने 68 याचिकाओं को खारिज करते हुए इन शिक्षकों की रिटायरमैंट पर लगी रोक हटाते हुए उन्हें तत्काल सेवानिवृत्त करने के आदेश दिए हैं।
अपने आदेशों में पी.यू. को हाईकोर्ट ने छूट दी है कि यदि यूनिवर्सिटी चाहे तो वह इन शिक्षकों से सैलरी रिकवर कर सकती है।
 
मामले में याचिका दाखिल करते हुए शिक्षकों की ओर से कहा गया था कि पी.यू. की सीनेट और सिंडीकेट ने 2010 और 2015 में यू.जी.सी. की गाइड लाइन के अनुसार 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने का निर्णय लेकर इसे मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा था। बावजूद इसके केंद्र सरकार द्वारा इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। मामले में हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और केंद्र सरकार से जवाब तलब किया था। एम.एच.आर.डी. ने कहा की पी.यू. पंजाब री-ऑगेनार्जेशन एक्ट-1966 के तहत इंटर स्टेट बॉडी कॉपरेट है। इसके साथ ही पंजाब सरकार ने पी.यू. शिक्षकों की रिटायरमैंट एज को बढ़ाने का विरोध किया था। हाईकोर्ट ने मामले में पंजाब सरकार और केंद्र सरकार का पक्ष सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को अपना फैसला सुनाते हुए शिक्षकों की उम्मीदों को झटका दिया। 
 
कैंपस के 45 और कालेजों के 23 प्रोफैसरों की छुट्टी 

याचिका खारिज होने के साथ ही कैंपस के 45 और मान्यता प्राप्त कालेजों के 23 प्रोफैसरों की रिटायरमैंट पर लगी रोक भी हट गई है। इन आदेशों के चलते अब यह 68 शिक्षक तत्काल प्रभाव से सेवानिवृत्त हो जाएंगे। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता शिक्षकों को झटके पर झटका देते हुए उन्हें कुछ और समय तक सेवा में बने रहने का लाभ देने से इंकार करने के साथ ही पी.यू. को यह छूट दी कि यदि वे चाहे तो अंतरिम आदेशों का लाभ पाकर 60 वर्ष की आयु के बाद भी शिक्षण करने वाले शिक्षकों से वसूली कर सकते हैं। साथ ही छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो इसके लिए 3 माह के भीतर शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने के भी आदेश दिए हैं।
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