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सरकारी अध्यापक जाति, लिंग व गरीब बच्चों से करते भेदभाव

जींद : हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय सेमिनार में मौलिक शिक्षा निदेशक ने अध्यापकों से संवाद स्थापित किया। उन्होंने अध्यापकों पर जाति, लिंग व गरीब बच्चों से भेदभाव करने की बात कही तो मोटी सेलरी लेने के बाद भी सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नहीं होने पर सवाल भी उठाए।
उन्होंने कहा कि जिलास्तर पर अधिकारियों व अध्यापकों के बीच संवाद के कार्यक्रम का आयोजन होगा। सवालों के समाधान के लिए समय पाबंद किए जाएंगे।
मौलिक शिक्षा निदेशक आरएस खरब ने कहा कि सरकारी स्कूल के अध्यापक निजी स्कूलों के अध्यापकों से अधिक पढ़े-लिखे व अधिक सेलरी पाते हैं। इसके बावजूद सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नहीं है। उन्होंने अध्यापकों पर जाति, लिंग व गरीब बच्चों से भेदभाव करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि इससे बच्चे में हीनभावना आ जाती है। उन्होंने अपील की कि बच्चों को पढ़ने-सीखने के लिए तैयार करें। हालांकि उन्होंने सरकारी स्कूलों में आने वाले बच्चों के अभिभावकों को अनपढ़ बताकर इसका बचाव भी किया। अनपढ़ होने के कारण अभिभावक बच्चों को पढ़ाई का माहौल नहीं दे पाते हैं। वे सुबह ही मजदूरी पर चले जाते हैं और देर शाम वापस लौटते हैं। स्कूल में आकर कभी भी बच्चे की प्रगति रिपोर्ट के बारे में नहीं पूछते। वहीं निजी स्कूलों में शिक्षित परिवार जाता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आधे से ज्यादा आबादी अनपढ़ है। प्रदेश में 48 फीसद बच्चे सरकारी व 52 फीसद निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि प्रदेश में अध्यापकों की कमी है।
चुनाव में अध्यापकों को लगाना गलत
निदेशक खरब ने कहा कि चुनावों में अध्यापकों की ड्यूटी नहीं लगाई जानी चाहिए। इस कारण सिलेबस पूरा नहीं हो पाता और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। वहीं विभाग द्वारा दूसरे डिपार्टमेंट में कर्मचारियों को भेजने पर सख्त लहजे में कहा कि अधिकारी जरूरत पड़ने पर ही दूसरे विभाग में कर्मचारियों को भेजें।
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