जागरण संवाददाता, गुड़गांव प्राथमिक स्कूलों में मासिक परीक्षाओं की शुरुआत आज से होगी। स्कूलों
में तैयारियां हो रही हैं लेकिन सोमवार को शिक्षक परेशान रहे। शिक्षकों का
कहना है कि नई तबादला नीति के तहत हुए स्थानांतरण से स्कूलों में शिक्षकों
की कमी हो गई है।
अब अधिकतर प्राथमिक स्कूलों को एक एक शिक्षकों के भरोसे चलाया जा रहा है। ऐसे में परीक्षाएं करवाने व परिणाम बनाकर उसे ऑनलाइन करने में शिक्षकों को काफी समस्या आएगी।
जिले के पचास प्रतिशत प्राथमिक स्कूलों में एक-एक शिक्षक है। यह स्थिति हाल ही में हुए तबादले के बाद हुई है। अब स्कूलों में इस प्रकार अवस्था की स्थिति पनप रही है कि शिक्षकों के लिए उसे संभालना मुश्किल हो रहा है। मासिक परीक्षाओं के लिए पेपर उठाना, परीक्षा करवाना व फिर परिणाम बनाकर उसे ऑनलाइन करवाना और साथ साथ कक्षाएं भी लेना। इतनी जिम्मेदारियों को निभाना शिक्षकों के लिए मुश्किल हो रहा है। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला प्रधान तरुण सुहाग के मुताबिक सरकार ने नई तबादला नीति के तहत तो बदलाव किए हैं, उससे हर स्कूल में स्थिति खराब हो गई है। स्कूलों में शिक्षकों को हर कार्य करना पड़ा रहा है और ऐसे में कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारी बल¨वदर धारीवाल के मुताबिक इस तरह से शैक्षिक उन्नयन नहीं हो सकता, क्योंकि मात्र एक अध्यापक पूरे स्कूल को कैसे संभाल सकता है। एक तरफ तो सरकार शिक्षा का स्तर उठाने की नीतियां बनाती है और दूसरी तरफ स्कूलों में शिक्षकों की कमी करके पढ़ाई बाधित करती है।
पिछले दो सत्रों से स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षाओं तक के विद्यार्थियों का मासिक मूल्यांकन किया जाता है। जिसमें हर विषय की परीक्षा होती है। इस परीक्षा को करवाने से लेकर उसकी रिपोर्ट बनाकर ऑनलाइन करने तक की जिम्मेदारी स्कूल की होती है व प्रश्न पत्र एससीईआरटी (राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद) से बनकर आते हैं। पहले विद्यार्थी व अभिभावक इस मूल्यांकन को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहे थे ऐसे में विभाग ने इसके परिणाम तैयार कर उसे ऑनलाइन करने पर सख्ती कर दी।
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अब अधिकतर प्राथमिक स्कूलों को एक एक शिक्षकों के भरोसे चलाया जा रहा है। ऐसे में परीक्षाएं करवाने व परिणाम बनाकर उसे ऑनलाइन करने में शिक्षकों को काफी समस्या आएगी।
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पिछले दो सत्रों से स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षाओं तक के विद्यार्थियों का मासिक मूल्यांकन किया जाता है। जिसमें हर विषय की परीक्षा होती है। इस परीक्षा को करवाने से लेकर उसकी रिपोर्ट बनाकर ऑनलाइन करने तक की जिम्मेदारी स्कूल की होती है व प्रश्न पत्र एससीईआरटी (राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद) से बनकर आते हैं। पहले विद्यार्थी व अभिभावक इस मूल्यांकन को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहे थे ऐसे में विभाग ने इसके परिणाम तैयार कर उसे ऑनलाइन करने पर सख्ती कर दी।
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