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सीबीएसई के शिक्षक अब दूसरे स्कूलों में बांटेंगे सफलता के अनुभव

बेहतरपरीक्षा परिणाम देने वाले सीबीएसई स्कूलों के शिक्षक अन्य स्कूलों में भी अपने अनुभव बांटेंगे। इसके लिए कार्यशालाएं होंगी और एक-दूसरे स्कूलों में पहुंच शिक्षकों विद्यार्थियों के आपस में ग्रुप डिस्कस भी कराए जाएंगे। किसी भी स्कूल में शानदार परिणाम देने वाले शिक्षकों की पढ़ाई का तरीका वहां के विद्यार्थी भी पसंद करते हैं तो ऐसे शिक्षक को अन्य स्कूलों में भी भेजा जाएगा।
सीबीएसई स्कूलों में शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह सहमति सीबीएसई स्कूलों की बैठक में बनी। इसके साथ-साथ हर 2 महीने बीतने पर सभी स्कूलों की जिला स्तरीय साझा बैठक भी करने का निर्णय लिया गया।

अंसल स्थित मिलेनियम स्कूल में गुरुवार को सीबीएसई स्कूलों की बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता सहोदय स्कूल एसोसिएशन के प्रेसीडेंट विनोद शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि बैठक का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और अध्यापकों के विकास के लिए एकजुट होकर काम करने के लिए योजना बनाना रहा।

शुभारंभ में 2 मिनट का मौन रखकर उड़ी हमले में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि देकर किया गया। बैठक में उपस्थित स्कूल प्रिंसिपल प्रतिनिधियों अपने-अपने अनुभव साझा किए। अगली मीटिंग एसडीवीएम जूनियर विंग में नवंबर महीने में होगी। इस अवसर पर डीपीएस पानीपत सिटी से अर्चना जैन, डीएवी थर्मल से रितु दिलबागी, एसडीवीएम सीनियर विंग से सबिता चौधरी, एसडीवीएम जूनियर से मीनाक्षी श्राफ, बाल विकास माडल टाउन से रितु मरवाहा, बाल विकास प्रोग्रेसिव से मीनू हुड्डा, डीएवी पुलिस समालखा से सपना गोयल, दयाल सिंह पब्लिक स्कूल से विनीता तोमर, चंदन बाल विकास से नील, एमएएसडी से अजय गुप्ता, सेंट मेरी से सिस्टर दीना, आईबीएल पब्लिक स्कूल से गीता राठी, हैरिटेज कान्वेंट स्कूल से सरोज गर्ग आशादीप स्कूल से डॉ. देवेंद्र मौजूद रहे।

^हर वर्ष स्कूलों में 12 से 14 खेल सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं की जाएं। यह जरूरी हो और इनमें सभी स्कूल भाग लें। इसके लिए सीबीएसई सहोदय का साझा लोगो भी तैयार किया जाए। सभी प्रमाण पत्रों पर यह लोगो जारी किया जाए। इन प्रतियोगिताओं के लिए सभी स्कूल अपनी सुविधा के अनुसार अपना नाम जरूर दें। -रजनीशर्मा, प्रिंसिपल, अार्य गर्ल्स सीसे स्कूल।

संपूर्ण विकास पर दिया जाएगा जोर

^शिक्षाको बेहतर बनाने के लिए सबसे पहले विद्यार्थियों और अध्यापकों को संपूर्ण विकास पर ध्यान दिया जाए। इसके लिए कोई विशेष अवसर आने पर समय-समय पर स्कूलों में विभिन्न गतिविधियां की जाए। इनमें विद्यार्थियों के लिए खेल और सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं अध्यापकों के लिए कार्यशालाएं रखी जाएं। इसमें नाने टीचिंग डिपार्टमेंट भी शामिल हो सकता है। स्वास्थ्य से जुड़ी प्रतियोगिता भी विद्यार्थियों अध्यापकों के लिए की जाएं।' -अमिताकोचर, प्रिंसिपल दी मिलेनियम स्कूल

अनुभवों का आदान-प्रदान जरूरी

^अनुभवकहीं से भी मिलें, लिए जाने चाहिए। किसी भी स्कूल में सभी शिक्षकों की सोच उनके पढ़ाने के तरीके एक दूसरे से भिन्न होते हैं। ऐसे में शिक्षकों के अनुभवों से सीखना और सबके विकास के लिए उसका प्रयोग करना ही सभी का उद्देश्य होना चाहिए। ऐसी कार्यशालाएं आयोजित की जाएं, जिनमें अपने विषयों के महारथी अपनी अध्यापन सफलता के मंत्र दूसरों के साथ सांझा कर सकें।' -विनोदशर्मा, डीपीएस थर्मल प्रिंसिपल एवं सीबीएसई प्रधान

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