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तीन दिन पहले दी थी चेतावनी, प्रशासन ने नहीं लिया सबक

जागरण संवाददाता, जींद : चयनित जेबीटी शिक्षक रविवार को जींद में हुई हरियाणा गौरव रैली में चयनित जेबीटी संघर्ष समिति के बैनर सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों को धता बताते हुए रैली में पहुंच गए और जैसे ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह मंच पर बोलने के लिए पहुंचे तो इन्होंने कुर्सियों पर खड़े होकर काले झंडे लहरा दिए।
यह देखकर सुरक्षा में तैनात एजेंसियों के हाथ-पांव फूल गए और पुलिस व सुरक्षाकर्मी नवचयनित जेबीटी टीचरों को रोकने के लिए दौड़े, लेकिन तब तक पूरा खेल हो चुका था। नवचयनित जेबीटी टीचरों ने अपना काम पूरा करते हुए शाह को काले झंडे दिखाने का काम किया और नारेबाजी की। इस पर महिला पुलिस कर्मचारियों ने महिला जेबीटी टीचरों को नीचे उतारा और उनका मुंह बंद कर बाहर ले गए, लेकिन जेबीटी टीचर रुके नहीं और नौकरी दो के नारे लगाते रहे।
गौरतलब है कि नवचयनित जेबीटी टीचरों ने तीन दिन पहले ही चेता दिया था कि वे गौरव रैली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को काले झंडे दिखाने का काम करेंगे, लेकिन इसे जिला प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया। यहां तक कि रैली के आयोजक भी इस बात को लेकर गंभीर नहीं दिखे। इसे सुरक्षा में चूक ही कहेंगे कि सुरक्षा एजेंसियां भी नवचयनित जेबीटी टीचरों को पहचान नहीं सकी और शिक्षक रैली के अंदर तक पहुंच गए। रैली के दौरान चयनित शिक्षक मुख्यमंत्री के संबोधन तक आराम से बैठे रहे, लेकिन जैसे ही शाह मंच पर बोलने के लिए आए तो ये टीचर कुर्सियों पर खड़े हो गए और काले झंडे दिखाने लगे।
महिला नवचयनित जेबीटी टीचर खुद कुर्सियों पर खड़ी हो गई और झंडे दिखाते हुए नियुक्ति की मांग की। इस पर महिला पुलिस कर्मचारी दौड़कर मौके पर पहुंच गए और उन्हें नीचे उतारकर पहले काले कपड़े छीने और उसके बाद एक-एक कर सभी महिला जेबीटी शिक्षकों को रैली स्थल से बाहर ले गए। इसके बाद पुलिस इन सभी को हिरासत में लेकर अपने साथ ले गई।
2012 में लिखित परीक्षा दी थी

नवचयनित जेबीटी टीचरों ने 2010 या 2011 में जेबीटी की पढ़ाई की। 2011 में पात्रता परीक्षा पास की और फिर 2012 में नौकरी लगने के लिए लिखित परीक्षा दी। ये लोग अब भी इसी उलझन में हैं कि सरकारी नौकरी कर पाएंगे या नहीं। 14 अगस्त 2014 को दो साल पहले फाइनल रिजल्ट घोषित हुआ और 9455 युवाओं को बता दिया गया कि आप अब हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ाएंगे। इसके बाद शुरू हुआ दस्तावेजों की जांच और अदालतों के चक्कर का दौर। यानी 5 साल होने को आए, लेकिन भर्ती पूरी नहीं हुई।
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