जागरण संवाददाता, पानीपत : जिला नगर योजनाकार विभाग से फर्जी एनओसी (नो
ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) बनवाकर स्कूल चलाने के आरोप में पुलिस ने मतलौडा के
कवि रोड स्थित सरस्वती स्पोर्ट्स स्कूल के चेयरमैन जोगेंद्र को गिरफ्तार
कर लिया। उसे अदालत में पेश किया, जहां से दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज
दिया गया।
पुलिस फर्जी एनओसी बनवाने में अहम भूमिका निभाने वाले जिला नगर योजनाकार विभाग के एक कर्मचारी की भी तलाश में है।
सीआइए-1 स्टाफ प्रभारी अजय मोर ने बताया कि भल्लाराम ट्रस्ट के नाम से 2006 में मतलौडा के कवि रोड पर सरस्वती एजुकेशन कॉलेज खोला गया। 2007 में पहला बैच शुरू हुआ। इसी कैंपस में मतलौडा निवासी कॉलेज के चेयरमैन जोगेंद्र ने 23 जून 2014 को डीटीपी से और 10 नवंबर 2014 को विद्यालय शिक्षा निदेशालय से मिडिल स्कूल चलाने की अनुमति ले ली। इसके बाद स्कूल चालू कर दिया। फर्जी एनओसी बनवाने में डीटीपी के एक कर्मचारी ने जोगेंद्र का पूरा सहयोग किया था। डीटीपी ने फर्जी एनओसी व अवैध निर्माण करने की शिकायत डीसी व एसपी को भेजी। इसके बाद थाना मतलौडा में सरस्वती स्पोर्ट्स स्कूल के चेयरमैन जोगेंद्र, उनके पिता व प्रबंधक दुलीचंद, छोटे भाई व वाइस चेयरमैन बिजेंद्र, बहन व सचिव भाऊपुर निवासी ऊषा पत्नी सुरेश, दुलीचंद के ममेरे भाई व ट्रस्टी सोनीपत के चिड़ाना के शीशपाल के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया। इसके अलावा एक मामला अवैध निर्माण का भी दर्ज किया गया। 4 अक्टूबर 2016 को मामले की जांच थाना मतलौडा से सीआइए-1 के पास आई।
इंस्पेक्टर अजय मोर ने बताया कि फर्जी एनओसी मामले की जांच की जा रही है। अगर इसमें मैनेजमेंट के और पदाधिकारियों की मिलीभगत मिली तो कार्रवाई की जाएगी। वहीं इस बारे में जिला शिक्षा अधिकारी उदय प्रताप सिंह का कहना है कि यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। जानकारी होने के बाद ही कुछ कह सकते हैं।
शिक्षा विभाग ने दे दी थी क्लीन चिट
मतलौडा के महावीर रेडा ने पहले शिक्षा विभाग को शिकायत दी थी कि सरस्वती स्पोर्ट्स स्कूल फर्जी एनओसी से चल रहा है। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने जांच मतलौडा ब्लाक शिक्षा अधिकारी को करवाने के निर्देश दिए। बीईओ ने कवि स्कूल के सतबीर और रणबीर की कमेटी गठित की। कमेटी की रिपोर्ट में स्कूल को क्लीन चिट दे दी गई। महावीर की शिकायत को निराधार बताया था।
आरटीआइ से हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
महावीर ने 29 जुलाई 2016 को जिला नगर योजनाकार से आरटीआइ मांगी कि सरस्वती स्पोर्ट्स स्कूल की सीएलयू, एनओसी कब दी गई। क्या यह सही है। इसी से पता चला कि एनओसी फर्जी है। इसके बाद डीटीपी ने जांच कराई तो एनओसी फर्जी मिली और उन्होंने मतलौडा थाने में मामला दर्ज कराया।
लपेटे में आएंगे शिक्षा विभाग के कर्मचारी
जांच में स्कूल की एनओसी को सही बताने वाली शिक्षा विभाग के कमेटी के सदस्य व अधिकारी भी लपेटे में आ सकते हैं। पुलिस इनसे भी पूछताछ करेगी कि उन्होंने किस आधार पर एनओसी को सही करार दिया था। इसके पीछे उनके मंशा क्या थी।
जमीन की दी जानी थी सीएलयू
महावीर रेडा का दावा है कि जिस सरस्वती स्पोर्ट्स स्कूल जिस जमीन पर बना है, वह 2010 से कंट्रोल एरिया में है। इसकी सीएलयू दी जानी चाहिए थी लेकिन फर्जी कागजात से एनओसी दे दी गई। इस फर्जीवाड़े की जांच न होने पर उसने अप्रैल, जून और जुलाई 2016 में सीएम विंडो में शिकायत दी। इसके बाद ही कार्रवाई हुई। महावीर ने डीसी से मांग की है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य खराब न हो इसलिए प्रशासन ध्यान दे। स्कूल व कालेज में इस तरह के फर्जीवाड़े को रोका जाए।
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पुलिस फर्जी एनओसी बनवाने में अहम भूमिका निभाने वाले जिला नगर योजनाकार विभाग के एक कर्मचारी की भी तलाश में है।
सीआइए-1 स्टाफ प्रभारी अजय मोर ने बताया कि भल्लाराम ट्रस्ट के नाम से 2006 में मतलौडा के कवि रोड पर सरस्वती एजुकेशन कॉलेज खोला गया। 2007 में पहला बैच शुरू हुआ। इसी कैंपस में मतलौडा निवासी कॉलेज के चेयरमैन जोगेंद्र ने 23 जून 2014 को डीटीपी से और 10 नवंबर 2014 को विद्यालय शिक्षा निदेशालय से मिडिल स्कूल चलाने की अनुमति ले ली। इसके बाद स्कूल चालू कर दिया। फर्जी एनओसी बनवाने में डीटीपी के एक कर्मचारी ने जोगेंद्र का पूरा सहयोग किया था। डीटीपी ने फर्जी एनओसी व अवैध निर्माण करने की शिकायत डीसी व एसपी को भेजी। इसके बाद थाना मतलौडा में सरस्वती स्पोर्ट्स स्कूल के चेयरमैन जोगेंद्र, उनके पिता व प्रबंधक दुलीचंद, छोटे भाई व वाइस चेयरमैन बिजेंद्र, बहन व सचिव भाऊपुर निवासी ऊषा पत्नी सुरेश, दुलीचंद के ममेरे भाई व ट्रस्टी सोनीपत के चिड़ाना के शीशपाल के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया। इसके अलावा एक मामला अवैध निर्माण का भी दर्ज किया गया। 4 अक्टूबर 2016 को मामले की जांच थाना मतलौडा से सीआइए-1 के पास आई।
इंस्पेक्टर अजय मोर ने बताया कि फर्जी एनओसी मामले की जांच की जा रही है। अगर इसमें मैनेजमेंट के और पदाधिकारियों की मिलीभगत मिली तो कार्रवाई की जाएगी। वहीं इस बारे में जिला शिक्षा अधिकारी उदय प्रताप सिंह का कहना है कि यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। जानकारी होने के बाद ही कुछ कह सकते हैं।
शिक्षा विभाग ने दे दी थी क्लीन चिट
मतलौडा के महावीर रेडा ने पहले शिक्षा विभाग को शिकायत दी थी कि सरस्वती स्पोर्ट्स स्कूल फर्जी एनओसी से चल रहा है। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने जांच मतलौडा ब्लाक शिक्षा अधिकारी को करवाने के निर्देश दिए। बीईओ ने कवि स्कूल के सतबीर और रणबीर की कमेटी गठित की। कमेटी की रिपोर्ट में स्कूल को क्लीन चिट दे दी गई। महावीर की शिकायत को निराधार बताया था।
आरटीआइ से हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
महावीर ने 29 जुलाई 2016 को जिला नगर योजनाकार से आरटीआइ मांगी कि सरस्वती स्पोर्ट्स स्कूल की सीएलयू, एनओसी कब दी गई। क्या यह सही है। इसी से पता चला कि एनओसी फर्जी है। इसके बाद डीटीपी ने जांच कराई तो एनओसी फर्जी मिली और उन्होंने मतलौडा थाने में मामला दर्ज कराया।
लपेटे में आएंगे शिक्षा विभाग के कर्मचारी
जांच में स्कूल की एनओसी को सही बताने वाली शिक्षा विभाग के कमेटी के सदस्य व अधिकारी भी लपेटे में आ सकते हैं। पुलिस इनसे भी पूछताछ करेगी कि उन्होंने किस आधार पर एनओसी को सही करार दिया था। इसके पीछे उनके मंशा क्या थी।
जमीन की दी जानी थी सीएलयू
महावीर रेडा का दावा है कि जिस सरस्वती स्पोर्ट्स स्कूल जिस जमीन पर बना है, वह 2010 से कंट्रोल एरिया में है। इसकी सीएलयू दी जानी चाहिए थी लेकिन फर्जी कागजात से एनओसी दे दी गई। इस फर्जीवाड़े की जांच न होने पर उसने अप्रैल, जून और जुलाई 2016 में सीएम विंडो में शिकायत दी। इसके बाद ही कार्रवाई हुई। महावीर ने डीसी से मांग की है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य खराब न हो इसलिए प्रशासन ध्यान दे। स्कूल व कालेज में इस तरह के फर्जीवाड़े को रोका जाए।
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