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हेड टीचर प्रिंसिपलों को सख्त निर्देश, अब नहीं चलेगी खानापूर्ति

शिक्षानिदेशालय के आदेश पर जिला खंड शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्कूल में एक दिन बिताए। इस दौरान शैक्षणिक स्तर की जांच की गई। दिसंबर में हुए मासिक परीक्षा में पूछे गए सवाल के जवाब भी छात्रों से लिए गए। इसका मकसद क्रास चेक करना था कि शिक्षकों ने छात्रों को पाठ पढ़ाया था की नहीं।
अधिकारियों ने हेड टीचरों प्रिंसिपलों को सख्त निर्देश दिया कि खानापूर्ति नहीं चलेगी। लर्निंग लेवल ऊंचा उठाने के लिए ठोस प्रयास करना होगा।

अधिकारियोंने 5 स्कूलों का किया भ्रमण : अधिकारियोंने जिले के 5 स्कूलों का भ्रमण किया। इसमें ददसिया, धौज, अटली आदि के गवर्नमेंट स्कूल हैं। खंड शिक्षा अधिकारी और उप जिला शिक्षा अधिकारी की टीमों ने स्कूलों का दौरा किया। इस दौरान स्कूल की एक दिन की गतििवधियों से अधिकारी अवगत हुए। शिक्षा निदेशालय की ओर से भी अधिकारियों की ड्यूटी विभिन्न जिलों में लगाई गई थी। इसका मकसद स्कूलों में लर्निंग लेवल काे बढ़ावा देना था। यह ड्राइव नियमित अंतराल पर चलाई जाएगी। स्कूलों में मंथली टेस्ट का भी आंकलन किया जाता है।

^अटाली मिडिल स्कूल का दौरा किया था। दिनभर की गतिविधियों से रूबरू हुई। लर्निंग लेवल को किस तरह से शिक्षक बढ़ा सकते हैं। इसके लिए उन्हें प्रोत्साहित भी किया। शैक्षणिक गतिविधियों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अनीताशर्मा, बीईओ, बल्लभगढ़।

रिपोर्ट भेजी जाएगी शिक्षा निदेशालय

िजनस्कूलों में अधिकारियों ने भ्रमण किया। उसकी पूरी गतिविधियों की रिपोर्ट बनाई जाएगी। इसके बाद इसे शिक्षा निदेशालाय भेजा जाएगा। इसके माध्यम से शिक्षकों के प्रदर्शन का भी आंकलन किया जा रहा है। ऐसे में लापरवाही बरतने वालों पर विभागीय गाज भी गिर सकती है। अधिकारियों ने प्रिंसिपलों हेड टीचरों को निर्देश दिया है कि शैक्षणिक के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाए।

{शैक्षणिक गतिविधि {मिड डे मील { शिक्षकों के पढ़ाने का तरीका {सिलेबस आधारित शिक्षा की पड़ताल

{पढ़ाने की समय सारिणी { साफ-सफाई की व्यवस्था { मंथली टेस्ट में कक्षा वाइज स्थिति

बोर्ड परीक्षा परिणाम सुधार भी है लक्ष्य

प्रदेशके सरकारी स्कूलों का बोर्ड परीक्षा परिणाम दो साल से संतोषजनक नहीं है। इसके बाद हर माह सभी कक्षाओं में टेस्ट का आयोजन किया रहा है। दो साल से फरीदाबाद जिले का परीक्षा परिणाम बेहद खराब रहा है। परीक्षा के ठीक पहले इस तरह की ड्राइव चलाने से शैक्षणिक स्तर में सुधार की उम्मीद की जा रही है। अभी से शिक्षा अधिकारी भी गंभीर होने लगे हैं। यह ड्राइव नियमित अंतराल पर चलने से स्कूल भी सतर्क होंगे। इससे परीक्षा परिणाम सुधरेगा। 

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