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अब 3 साल मिशन चलाकर सुधारेंगे शिक्षा का स्तर, ऐसी होगी रणनीती

हिसार. स्कूलों में शिक्षा का स्तर अब मिशन चलाकर सुधारा जाएगा। अब तीन साल का मिशन बनाकर स्कूलों को शिक्षण स्तर व विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में 60 से 80 प्रतिशत तक का सुधार करना होगा। इस मिशन को पांच साल में वर्ष 2022 तक शत प्रतिशत सिरे चढ़ाने के लिए कार्य किया जाएगा। इसके लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से राजकीय स्कूलों को आदेश जारी हुए हैं। स्कूलों को 10 मार्च तक मिशन स्टेटमेंट रिपोर्ट जिला परियोजना संयोजक को सौंपनी होगी। 60 से 80 प्रतिशत तक का सुधार करना होगा...
एक साल का कैलेंडर नहीं, तीन साल का शेड्यूल...
स्कूलों में एक साल का वार्षिक कैलेंडर के रूप में सालाना गतिविधियों की रूपरेखा तैयार होती थी। अब नए फैसले के तहत इसमें परिवर्तन हुआ है जिसे मिशन का रूप दिया गया है। अब स्कूलों को तीन साल के लिए अपना शैक्षणिक गतिविधियों की रूपरेखा तैयार करनी होगी।
3 साल की निभानी होगी जिम्मेदारी...
स्कूलों में शिक्षक एक साल की जगह तीन साल तक बच्चे की जिम्मेदारी निभाएंगे। इसमें विद्यार्थी की हेल्थ प्रोफाइल को भी प्राथमिकता दी गई है। जिसमें तीन साल तक एक शिक्षक विद्यार्थी की हेल्थ रिपोर्ट पर भी ध्यान देगा ताकि तीन साल में यदि कोई परिवर्तन आता है तो उसकी सही से रिपोर्ट तैयार हो और बच्चे को जरूरत के अनुसार मेडिकल सुविधा दी जा सके।
मिशन की रूपरेखा दीवार पर अंकित करनी होगी...
चित्रण स्कूलों को मिशन की रूपरेखा कागजों में नहीं बल्कि दीवार पर अंकित करानी होगा। इसके लिए उसकी एक निर्धारित लंबाई चौड़ाई भी मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से आदेश दिए गए हैं।
मिशन का उद्देश्य...
शतप्रतिशत साक्षरता को प्राप्त करने के लिए स्कूलों में भयमुक्त वातावरण विकसित कर विद्यार्थियों की उपस्थिति और भागीदारी में नियमितता को बढ़ाने के लिए किया गया है। विद्यार्थियों के कौशलों का विकास करना है।
मिशन में इनकी होगी भागीदारी...
स्कूल में शिक्षकों साथ-साथ विद्यार्थियों के अभिभावक, पंचायत, नगरपालिका अधिकारियों व कर्मचारियों की भागीदारी होगी।
विकास के ये है माध्यम...
साक्षरता टीम, थिएटर समूहों और प्रेरक समूहों के माध्यम से साक्षरता होगी। हर सप्ताह रीडिंग वीक मनाया जाएगा इसके अलावा साथी विद्यार्थियों से सीखने की भावना को बढ़ावा देने के लिए कार्य करना होगा।
प्रवीन बत्रा, प्रधानाचार्य, आरोही मॉडल स्कूल ने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय की एक सराहनीय योजना है। जिससे शैक्षणिक स्तर में सुधार होगा। स्कूलों में बच्चों की नियमितता को बढ़ावा मिलेगा।
देवेंद्र सिंह, जिला परियोजना संयोजक हिसार ने कहा कि पहले सालाना गतिविधियों का एक साल का कैलेंडर बनता था जो अब तीन साल का मिशन बन गया है। इससे विद्यार्थियों को लाभ होगा। उनकी शैक्षणिक गतिविधियां बेहतर होगी और कौशल का विकास होगा।

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