जागरण संवाददाता, नारनौल : सरकारी स्कूलों में डीडीओ पावर वाले शिक्षक व
मुख्याध्यापक अधीनस्थ शिक्षकों का वेतन स्कूल में बनाने की बजाय मार्केट
से बनवा रहे हैं। इस पर आने वाला खर्च शिक्षकों से वसूल किया जा रहा है। यह
राशि हालांकि बेहद कम होती है। इसके लिए शिक्षकों से सौ-सौ या 50-50 रुपये
एकत्रित किए जाते हैं। शिक्षक संगठनों ने इसका विरोध किया है।
शिक्षकों ने बताया कि सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में कंप्यूटर पर काम करने वाले अधिकतर 'स्कूल इनफार्मेशन मैनेजर' शिक्षकों का वेतन बनाने का काम नहीं जानते हैं जबकि यह उनके रुटीन कार्य का हिस्सा है। कंप्यूटर पर थोड़े समय में हो जाने वाले इस कार्य के लिए भी वे बाजार में कंप्यूटर सेंटर्स पर जाकर वेतन बनवाते हैं और इसके लिए राशि का भुगतान करते हैं। इसके बाद इस राशि को शिक्षकों से एकत्रित किया जाता है।
उन्होंने बताया कि विभाग ने चार-चार स्कूलों का एक क्लस्टर बनाया हुआ है। इनमें माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल शामिल हैं। इनका इंचार्ज सीनियर सेकेंडरी स्कूल के डीडीओ पावर वाले शिक्षक को बनाया जाता है। शिक्षकों ने बताया कि यह डीडीओ पावर वाले शिक्षक की ड्यूटी बनती है कि वह तय समय पर सभी शिक्षकों का वेतन बनवाकर भिजवाना सुनिश्चित करे। इसके लिए बाजार में जाकर कार्य करवाना सही नहीं है। यदि बाहर से भी करवाते हैं तो इस कार्य में लगने वाली राशि शिक्षकों से वसूलना कतई सही नहीं है। वैसे तो यह कार्य क्लर्कों का है, यदि फिर भी बाहर से करवाया जाए तो कं¨टजेंसी (आकस्मिक) फंड से खर्च किया जाना चाहिए।
कुछ शिक्षक संगठन इस तरह की वसूली के विरोध में आ गए हैं। हरियाणा मास्टर्स वर्ग एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष वीर विक्रम ¨सह ने कहा कि शिक्षकों से इस तरह राशि वसूल करना गलत है और इसे सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पहले भी इस तरह की वसूली हुई थी, जिस पर विभाग ने जींद जिला के दो शिक्षकों को चार्जशीट किया था। शिक्षा अधिकारियों को इस तरफ कड़ा संज्ञान लेना चाहिए।
---------
पक्ष -
शिक्षकों से इस तरह की वसूली कतई ठीक नहीं है। यदि कहीं इस तरह राशि ली जा रही है तो शिक्षक मेरे कार्यालय में रिपोर्ट करें। कं¨टजेंसी फंड अभी हमारे पास ही नहीं आया है। पहुंचने पर सभी स्कूलों को दे दिया जाएगा।
- मुकेश लावणिया, जिला शिक्षा अधिकारी, महेंद्रगढ़।
शिक्षकों ने बताया कि सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में कंप्यूटर पर काम करने वाले अधिकतर 'स्कूल इनफार्मेशन मैनेजर' शिक्षकों का वेतन बनाने का काम नहीं जानते हैं जबकि यह उनके रुटीन कार्य का हिस्सा है। कंप्यूटर पर थोड़े समय में हो जाने वाले इस कार्य के लिए भी वे बाजार में कंप्यूटर सेंटर्स पर जाकर वेतन बनवाते हैं और इसके लिए राशि का भुगतान करते हैं। इसके बाद इस राशि को शिक्षकों से एकत्रित किया जाता है।
उन्होंने बताया कि विभाग ने चार-चार स्कूलों का एक क्लस्टर बनाया हुआ है। इनमें माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल शामिल हैं। इनका इंचार्ज सीनियर सेकेंडरी स्कूल के डीडीओ पावर वाले शिक्षक को बनाया जाता है। शिक्षकों ने बताया कि यह डीडीओ पावर वाले शिक्षक की ड्यूटी बनती है कि वह तय समय पर सभी शिक्षकों का वेतन बनवाकर भिजवाना सुनिश्चित करे। इसके लिए बाजार में जाकर कार्य करवाना सही नहीं है। यदि बाहर से भी करवाते हैं तो इस कार्य में लगने वाली राशि शिक्षकों से वसूलना कतई सही नहीं है। वैसे तो यह कार्य क्लर्कों का है, यदि फिर भी बाहर से करवाया जाए तो कं¨टजेंसी (आकस्मिक) फंड से खर्च किया जाना चाहिए।
कुछ शिक्षक संगठन इस तरह की वसूली के विरोध में आ गए हैं। हरियाणा मास्टर्स वर्ग एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष वीर विक्रम ¨सह ने कहा कि शिक्षकों से इस तरह राशि वसूल करना गलत है और इसे सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पहले भी इस तरह की वसूली हुई थी, जिस पर विभाग ने जींद जिला के दो शिक्षकों को चार्जशीट किया था। शिक्षा अधिकारियों को इस तरफ कड़ा संज्ञान लेना चाहिए।
---------
पक्ष -
शिक्षकों से इस तरह की वसूली कतई ठीक नहीं है। यदि कहीं इस तरह राशि ली जा रही है तो शिक्षक मेरे कार्यालय में रिपोर्ट करें। कं¨टजेंसी फंड अभी हमारे पास ही नहीं आया है। पहुंचने पर सभी स्कूलों को दे दिया जाएगा।
- मुकेश लावणिया, जिला शिक्षा अधिकारी, महेंद्रगढ़।