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अपने पैसों से इंटरनेट रिचार्ज कर हाजिरी लगा रहे शिक्षक

जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : शिक्षा विभाग की ओर से भले ही स्कूलों में शिक्षकों की हाजिरी के लिए बायोमीट्रिक मशीन तो लगा दी, लेकिन न तो विभाग की ओर से इसकी मॉनिट¨रग की जा रही है और न ही शिक्षकों के वेतन और छुट्टियां इसके अनुसार लगाई जाती हैं।
बायोमीट्रिक मशीन में हाजिरी लगाने के बाद शिक्षकों को दोबारा रजिस्टर में भी हाजिरी लगानी होती है। अलबत्ता अधिकारी स्तर पर बायोमीट्रिक मशीन में हाजिरी देखने वाला कोई नहीं है। खास बात ये है कि विभाग की ओर से इन मशीनों का इंटरनेट डाटा भी रिचार्ज नहीं कराया जाता। स्कूल शिक्षक अपने मोबाइल से इंटरनेट चलाते हैं और हाजिरी लगा देते हैं।
प्रदेश सरकार ने लगभग एक वर्ष पूर्व सभी विद्यालयों में बायोमीट्रिक मशीन में हाजिरी लगाने के आदेश जारी किए थे और लगभग हर स्कूल में मशीन को शुरू भी करा दिया गया। बायोमीट्रिक मशीन में भले ही डाटा जिला स्तर पर पहुंच जाता हो, लेकिन उसे देखकर हर माह में वेतन और छुट्टियों को निर्धारित करने वाला कोई नहीं है। इससे न तो शिक्षकों के वेतन पर कोई असर होता है और न ही छुट्टियों पर। कई शिक्षक तो ऐसे भी हैं जो इनमें हाजिरी भी नहीं लगाते हैं। कई स्कूलों में मशीने खराब हो चुकी हैं।
खराब मशीनों को नहीं कोई ठीक कराने वाला
स्कूलों में लगी मशीनों अगर खराब हो जाती हैं तो न तो स्कूल के पास उसे ठीक कराने के लिए कोई फंड और न ही अन्य साधन। ऐसे में अगर किसी स्कूल की मशीन खराब हो चुकी है तो वह बंद है। इसके अलावा सबसे बड़ी बात ये है कि मशीन को चलाने के लिए इंटरनेट की आवश्यकता है। जिसके बिल भरने के लिए स्कूलों को कोई पैसा नहीं दिया गया। शिक्षक अपनी जेब से ही इंटरनेट कनेक्शन लेते हैं और प्रयोग करते हैं।
स्कूल फंड से रिचार्ज और ठीक कराएं मशीन को

उप जिला शिक्षा अधिकारी अरुण आश्री का कहना है कि स्कूल फंड से मशीन का इंटरनेट कनेक्शन रिचार्ज कराया जाना चाहिए। इसके अलावा ठीक कराने का प्रावधान है और खंड स्तर पर कार्यालय में बायोमीट्रिक मशीन को ठीक करने के लिए जमा कराया जाता है। कई बार पूरी मशीन भी बदली जाती रही है। डाटा चंडीगढ़ कार्यालय में होता है।

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