गुरुग्राम। जिले में शिक्षा व्यवस्था इन दिनों भगवान भरोसे चल रही है।बच्चों के वेलफेयर के नाम से हर महीने आने वाला फंड पूरे सत्र में नहीं आया। प्रति छात्र 36 रुपये के हिसाब से महीने में आने वाला ये फंड सरकारी स्कूलों की जरूरतों को पूरा करता था।
36 रुपये प्रति छात्र के हिसाब से मिलता है फंड
शिक्षा विभाग की ओर से 36 रुपए प्रति छात्र के हिसाब से स्कूलों को फंड दिया जाता है। इस फंड से स्कूलों में छात्रों के लिए खेल, भवनों की मरम्मत के अलावा अन्य कार्य कराए जाते हैं।
2005 में हरियाणा में शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों से दाखिला फीस लेनी बंद की गई थी।
शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने से बाद पहली से आठवीं कक्षा तक विद्यार्थियों से 36 रुपए लिया जाता था, उस समय सरकार ने स्कूलों को प्रति छात्र 36 रुपए देने भी शुरू किये गए थे।
नाकाफी हैं 36 रुपए प्रति छात्र राशि: ठाकरान
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष दुष्यंत ठाकरान का कहना है कि बीते सत्र का फंड अभी तक जारी नहीं होना इस बात को दर्शाता है कि शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली किस तरह से चल रही है।
उनका कहना है कि विभाग द्वारा योजनाएं तो बनाई जाती हैं, लेकिन लापरवाही के चलते कार्य अधर में लटके रहते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रति बच्चे के हिसाब से 36 रुपए की राशि नाकाफी है। क्योंकि ये फंड भी तीन कार्यों में खर्च करना होता है। इस राशि को कई गुणा बढ़ाने की जरुरत है, ताकि स्कूलों में अच्छे से कार्य कराए जा सकें।
क्या कहते हैं अधिकारी?
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी रविन्द्र कुमार ने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले ही गुरुग्राम में ज्वॉइन किया है। उन्हें जानकारी नहीं है कि स्कूलों को ये फंड मिला है या नहीं। उन्होंने कहा कि अगर गुरुग्राम के स्कूलों में फंड नहीं पहुंचा है तो इस बारे में विभाग को अवगत कराया जाएगा।