चंडीगढ़ (निर्मल सिंह मानशाहिया) : सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकारी
स्कूलों में पढ़ा रहे अध्यापकों को पांच माह से तनख्वाह नहीं मिली है।
शिक्षकों को कहना है कि कैप्टन सरकार ने उन्हें पक्का करने का वादा भी नहीं
निभाया। परिवारों का गुजारा करना मुश्किल हो गया है। रिश्तेदारों से उधार
मागने में भी शर्म आने लगी है। बार-बार विनती व धरने के बावजूद सरकार के
सिर पर जूं तक नहीं रेंग रही।
एसएसए और रमसा यूनियन के कन्वीनर हरदीप सिंह ने बताया कि पिछले साल
नवंबर में से लेकर अब तक सरकार ने उन्हें तनख्वाह नहीं दी है। शिक्षकों ने
कहा कि उन्होंने अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाई तो उनके खिलाफ पुलिस
कार्रवाई की धमकी दी गई। शिक्षक नेताओं गुरप्रीत अमीवाल, गुरप्रीत रूपरा,
राम भजन चौधरी व सुखदीप साधू ने बताया कि कुछ समय पहले आर्थिक मंदहाली व
तनख्वाह न मिलने के कारण फिरोजपुर के एक अध्यापक ने नहर में छलाग लगाकर
खुदकशी कर ली थी। उन्होंने बताया कि वे कई बार शिक्षा सचिव कृष्ण कुमार से
मिल चुके हैं, लेकिन वह बिल फंसे होने की बात कह कर टाल देते हैं। साढ़े 6
हजार छोड़ चुके हैं नौकरी
सर्व शिक्षा अभियान के तहत 14 हजार शिक्षक भर्ती हुए थे, लेकिन सरकार
की टालमटोल वाली नीतियों के चलते साढ़े 6 हजार के करीब अध्यापक नौकरी छोड़
चुके हैं। इस समय 8 हजार शिक्षक कार्यरत हैं। इनके वेतन का 60 फीसद हिस्सा
केंद्र सरकार देती है।
अगले हफ्ते मिलने की उम्मीद
डायरेक्टर जनरल स्कूल शिक्षा प्रशात कुमार ने माना कि फंड की कमी कारण
सर्व शिक्षा अभियान व रमसा अध्यापकों की पिछले साल नवंबर से तनख्वाह नहीं
मिल पाई है। पिछले साल नवंबर में 50 फीसद अनुदान ही केंद्र से मिला था,
जिसमें से पिछले साल 2016-17 के चार महीनों की तनख्वाह जारी की गई थी,
लेकिन इस बार अनुदान 50 फीसद से भी कम होने के कारण व पंजाब सरकार की तरफ
से अनुदान जारी न होने के कारण वेतन रुका है। बिल बनाकर भेजा गया है,
उम्मीद है कि शिक्षकों को अगले हफ्ते वेतन मिल जाएगा।