जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : शिक्षा विभाग में कार्यरत 844 शिक्षकों की
भर्ती रद करने के फैसले पर सोमवार को केंद्रीय प्रशासनिक प्राधिकरण(कैट) ने
सितंबर तक रोक लगा दी है। इस केस में सोमवार को सुनवाई करते हुए कैट ने
अगली तारीख 18 सितंबर तय की।
दूसरी तरफ सुबह शिक्षा विभाग ने सभी टीचर्स को
निकालने के फैसले का कारण बताते हुए कैट में 25 पेजों का रिप्लाई फाइल
किया। रिप्लाई में विभाग ने जेबीटी-टीजीटी की भर्ती में हुई धांधली को लेकर
पुलिस की इन्वेस्टिगेशन को आधार बनाकर ही रिपोर्ट तैयार की है।
विभाग ने कोर्ट को बताया कि अगर इन शिक्षकों को मौका दिया जाता है, तो
इसका बुरा प्रभाव बच्चों के भविष्य पर पड़ेगा। जो शिक्षक खुद नकल व गलत
तरीके से परीक्षा में सफल हुए हैं, वो बच्चों के भविष्य को कैसे अच्छा बना
सकेंगे। विभाग ने कैट में रिप्लाई करते हुए कहा कि पुलिस इन्वेस्टिगेशन अभी
भी जारी है। भर्ती में बड़े स्तर पर घोटाला हुआ है। विभाग का कहना है कि
अभी और भी शिक्षक दोषी पाए जा सकते हैं। इस पर कैट ने कहा कि अगर पुलिस
इन्वेस्टिगेशन अभी भी जारी है तो 18 सितंबर तक एक भी ऐसा मामला सामने लेकर
आएं, जिसमें किसी और शिक्षक को भी दोषी पाया गया है। उसके दोषी पाए जाने की
फाइल भी अगली सुनवाई तक रिप्लाई फाइल में शामिल करें। सूत्रों के अनुसार
शिक्षा विभाग ने कैट में जो रिप्लाई फाइल किया है, उसमें विभाग ने ऐसा कोई
भी तथ्य शामिल नहीं किया जिस पर कैट भी इस भर्ती पर रोक लगा सके। विभाग ने
मांगी थी मोहलत
भर्ती रद करने के फैसले पर कैट की तरफ से स्टे लगाने के बाद यूटी
प्रशासन ने 6 जुलाई को जवाब दाखिल करना था। पर प्रशासन के वकील ने जवाब
दाखिल नहीं किया और चंद दिनों की मोहलत मांगी। उसके बाद 30 जुलाई तक
रिप्लाई फाइल करने को कहा था। तीस मई को एकदम से निकाल दिया था सभी टीचर्स
को
यूटी प्रशासन ने 30 मई को आर्डर जारी कर वर्ष 2015 में जेबीटी-टीजीटी
भर्ती में चयन हुए 844 टीचरों की नियुक्तियों को रद करने के आदेश जारी किए
थे। प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ शिक्षकों ने कैट में 25 केस दायर किए। इस
पर सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने 24 घटे से पहले ही प्रशासन के आदेश पर
रोक लगा दी थी और उनको जवाब दाखिल करने को कहा था।