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शिक्षकों की भर्ती में नियमों के विरूद्ध फैसले के समर्थन में हरियाणा सरकार।

हरियाणा प्रदेश की पीजीटी संस्कृत भर्ती विज्ञापन संख्या 4/2015 कैटेगरी संख्या 16 की भर्ती से बाहर किये जाने को लेकर संस्कृत हितैषी संघ ,हरियाणा के बैनर के नीचे शिक्षाशास्त्री और आचार्य डिग्रीधारक अभ्यर्थियों ने जन्तर मंतर पर हरियाणा सरकार के विरुद्ध धरना प्रदर्शन कर प्रधान मंत्री और मानवसंसाधन मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
गौरतलब है कि ये दोनों डिग्रियां भारत सरकार के राजपत्र (5 से 11 जुलाई 12014 ) में यूजीसी द्वारा डिग्रियों का विनिर्देशन शीर्षक से प्रकाशित अधिसूचना में "संस्कृत साउंडिंग डिग्रियां" शीर्षक से दर्ज है। इसमें आचार्य का स्तर मास्टर्स का माना गया है और शिक्षाशास्त्री का स्तर बैचलर्स (शिक्षास्नातक) माना गया है। साथ ही शिक्षाशास्त्री की डिग्री में केवल नाम का अंतर भर है अन्यथा इसका पाठ्यक्रम बी .एड के प्रारूप के अनुसार ही बनाया जाता है। साल 2014 के बीएड पाठ्यक्रम प्रारूप के अनुसार भी शिक्षाशास्त्री के लिए कोई अलग पाठ्यक्रम प्रारूप नहीं है इसी प्रारूप के अनुसार ही सभी संस्कृत विश्वविद्यालयों के शिक्षाशास्त्री के पाठ्यक्रम का निर्माण हुआ है।
गौरतलब है कि अध्यापक भर्ती के मामले में एनसीटीई का अध्यापक भर्ती नियम 2014 जो (अध्यापक भर्ती की न्यूनतम अर्हताओं का निर्धारण ) विनियम 2014 कहलाता है जो अध्यापक भर्ती के मामले में हर राज्य सरकार को बाध्यकारी है । साथी इन नियमों में ढील देने की शक्ति राज्यसरकार को नहीं केवल एनसीटीई को ही है वो भी एक निश्चित समय और सीमा तक, वह भी तब जब राज्य सरकार इसमें ढील देने के लिए उचित सन्दर्भ उपलब्ध करवाए और एनसीटीई उनसे संतुष्ट हो। चूंकि एनसीटीई के अध्यापक भर्ती नियम के अनुसार पीजीटी यानी उच्च माध्यमिक (पीजीटी) अध्यापक के लिये सम्बन्धित विषय में मास्टर्स या इसके समकक्ष और एनसीटीई से मान्यता प्राप्त संस्था से बीएड होना चाहिए। हरियाणा कर्मचारी आयोग द्वारा एनसीटीई के 2014 के नियमों का उल्लंघन करते हुए 2012 के हरियाणा के अध्यापक भर्ती नियम के अनुसार विज्ञापन निकाला, जबकि एनसीटीई के नियम भारत सरकार के गजट में प्रकाशित होने की तारीख से ही प्रभावी होते हैं।
इसी भर्ती के संदर्भ में श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ के शिक्षा विभाग के शोधछात्र कर्मपाल पूनिया द्वारा एनसीटीई में 19/08/2015 को एनसीटीई के न्यूनतम अर्हताओं के विनियम 2014 के उल्लंघन का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिस पर कार्यवाही करते हुए एनसीटीई द्वारा हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव( स्कूल शिक्षा ) को 7 सितंबर 2015 को एक पत्र जारी किया जिसमें इस मामले को एनसीटीई 2014 के अध्यापक भर्ती के नियमों के प्रकाश में देखते हुए उचित निर्णय लेने को कहा गया लेकिन हरियाणा सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं कि।
इसी बीच पीड़ित अभ्यर्थी कोर्ट चले गए और कोर्ट में हरियाणा सरकार ने उन्हें भर्ती के योग्य माना और कोर्ट में जवाब दाखिल किया कि हमने नियम में परिवर्तन कर दिया है । और शिक्षा शास्त्री और आचार्य के दस्तावेज़ों की जाँच हुई और उन्हें योग्य माना गया। और जब इंटरव्यू लिस्ट आई तो शिक्षाशास्त्री और आचार्य भी उसमें शामिल थे। लेकिन तभी कुछ लो मैरिट बी एड अभ्यर्थियों ने जो लिस्ट में स्थान नहीं बना पाए थे शिक्षाशास्त्री और आचार्य को गलत तरीके से एक- एक साल का डिप्लोमा बताते हुए लिस्ट को वापस लेने और पुराने विज्ञापन के अनुसार लिस्ट निकालने का केस कर दिया । जिसमें सरकारी वकील ने कोई बहस नहीं की और चुप चाप ऑर्डर लेकर आ गए । और फिर आचार्य और शिक्षाशास्त्री को बाहर करके पुनः लिस्ट निकाली गई जिसके चलते वो कोर्ट में चले गए और कोर्ट से प्रोविजनल इंटरव्यू का ऑर्डर ले आये और इंटरव्यू दिया । लेकिन हरियाणा सरकार ने इस भर्ती पर लगभग 70 कोर्ट केस पेंडिंग होने के बावजूद भी अंतिम लिस्ट निकाल दी । इसके विरोध में पीड़ित अभ्यर्थियों ने जन्तर मंतर पर प्रदर्शन कर अपना ज्ञापन सौंपते हुए प्रधानमंत्री और मानव संसाधन विकास मंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप की गुहार लगाते हुए घोषित अंतिम परिणाम को तुरंत प्रभाव से वापस लेने और आचार्य और शिक्षाशास्त्री डिग्रीधारकों को शामिल कर अंतिम लिस्ट जारी करवाये जाने की मांग की ।
ध्यान देने वाली बात है कि भर्ती प्रक्रिया से बाहर हुए सारे के सारे पीड़ित अभ्यर्थी उच्च मैरिट वाले हैं जिनमें काफी तो ऐसे हैं जिनके स्क्रीनिंग टेस्ट में ही वर्तमान मैरिट जो स्क्रीनिंग और इंटरव्यू को मिलाकर बनाई गई है उससे भी ज्यादा नम्बर हैं ।प्रदर्शन में संस्कृत हितैषी संघ हरियाणा के अध्यक्ष सन्दीप तोबड़िया ,कर्मपाल पूनिया ,जोगेंदर ,रमेश बगनवाल ,प्रमोद शास्त्री, मनवीर सिंह ,गजराज ,पूजा देशवाल,और दिल्ली संस्कृत अध्यापक संघ के डॉ. बृजेश गौतम ,और डॉ.दयालु आदि भी उपस्थित रहे।

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