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स्कूलों ने नहीं भरा फार्म-6, बढ़ा दी फीस, डीईओ ने पांच दिन दिए थे, पत्र लिखकर भूले

जागरण संवाददाता, यमुनानगर : कितने प्राइवेट स्कूलों ने फार्म-6 भरा इसका रिकार्ड डीईओ और डीईईओ कार्यालय में नहीं है। डीईओ आनंद चौधरी ने 26 मार्च को जिला के सभी बीईओ, सीबीएसई, आइसीएसई और हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी से जुड़े स्कूलों को पत्र लिखकर पांच दिन में फार्म-6 की हार्ड कॉपी कार्यालय में जमा कराने के निर्देश दिए। परंतु वे खुद ही भूल गए। क्योंकि फार्म जमा नहीं कराने वाले न तो किसी स्कूल पर कार्रवाई की गई और न उन्हें नोटिस दिया। 31 दिसंबर तक ऑनलाइन भरना था फार्म

शिक्षा विभाग ने सभी बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों को आदेश दिया था कि वे 31 दिसंबर 2018 तक फार्म-6 भरें। जो स्कूल यह फार्म नहीं भरेगा वो शैक्षणिक सत्र 2018-19 में फीस नहीं बढ़ा सकेगा। दैनिक जागरण गत माह से स्कूलों के निजी प्रकाशकों की किताबें बेचे जाने का मामला लगातार उठा रहा है। डीईओ आनंद चौधरी ने 26 मार्च को सभी स्कूलों को पत्र लिखा था कि वे अपने यहां कॉमर्शियल एक्टीविटी नहीं कर सकते। अभिभावकों को किसी एक दुकान से किताबें और वर्दी खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। इसके साथ-साथ उन्होंने स्कूलों को ये भी आदेश दिए कि जिन्होंने 31 दिसंबर तक फार्म-6 ऑनलाइन भर दिया है वो उसकी हार्ड कॉपी पांच दिन के भीतर कार्यालय में जमा कराए। फार्म के ऑडिट बैलेंस शीट भी जमा करानी थी। परंतु स्कूलों ने डीईओ के निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए फार्म जमा नहीं कराया। बिना फार्म भरे बढ़ा दी 20 फीसद फीस

निजी स्कूलों ने बिना फार्म-6 भरे ही बढ़ती महंगाई, पेट्रोल, डीजल के दामों में हुई बढ़ोत्तरी का हवाला देते हुए फीस में 10 से 20 फीसद की बढ़ोतरी कर दी है। जबकि कोई भी स्कूल अपनी मर्जी से फीस में बढ़ोतरी नहीं कर सकता। स्कूलों को यह बताना होता है कि वे फीस क्यों बढ़ा रहे हैं। घाटा होने पर स्कूल बढ़ा सकते हैं फीस
गत वर्ष के मुकाबले घाटा होने की स्थिति में ही फीस बढ़ाई जा सकती है। फार्म-6 में स्कूलों को इनकम, खर्च, स्कूल में दी जा रही सुविधाएं, स्कूल की बैलेंस शीट, वर्तमान सत्र में फीस, नए सत्र में कितनी फीस बढ़ानी है इसकी जानकारी देनी होती है। किसी स्कूल ने फार्म-6 भरा या नहीं इसकी जानकारी डीईओ कार्यालय में नहीं है। खुद चेकिग नहीं करते अधिकारी

शिक्षा विभाग की कार्रवाई मात्र पत्र लिखने तक ही सीमित रह गई है। कितने स्कूल विभाग के आदेशों की पालना कर रहे हैं, उनके पास मान्यता है भी या नहीं ये देखने के लिए अधिकारी कभी फील्ड में नहीं निकलते। डीईओ ने अपने कार्यकाल में कितने स्कूलों में औचक निरीक्षण किया, कितने स्कूलों में खामियां मिली ये जानने के लिए दैनिक जागरण ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आरटीआइ भी लगाई थी। परंतु आज तक इसका जवाब नहीं दिया गया।

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