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सेकेंडरी शिक्षा विभाग के महानिदेशक के आदेश, अनाधिकृत निजी स्कूलों को किया जाए बंद

भिवानी। अब एक बार फिर सेकेंडरी शिक्षा विभाग के महानिदेशालय ने प्रदेश भर में चल रहे गैर मान्यता व अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर अपना रुख कड़ा करते हुए अनाधिकृत निजी स्कूलों को बंद कराए जाने के संबंध में सभी जिला शिक्षा व जिला मौलिक अधिकारियों आदेश जारी किए हैं।
निदेशालय ने जारी आदेशों में अब तक प्रदेशभर में चल रहे अनाधिकृत निजी स्कूलों को बंद कराकर इसकी रिपोर्ट निदेशालय को भेजे जाने के निर्देश दिए हैं, वहीं जिन स्कूलों को अब तक शिक्षा अधिकारी बंद कराकर इसकी रिपोर्ट निदेशालय को उपलब्ध करा चुके हैं, उन विद्यालयों के स्टेटस के संबंध में भी निदेशालय ने अधिकारियों से जवाब तलब किया है। अधिकारियों से यह भी पूछा गया है कि जिन स्कूलों को अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में बंद दर्शाया हुआ है वे स्कूल या अकादमियां धरातल पर बंद हैं या नहीं। अगर बंद कराए जाने के बावजूद भी कोई गैर मान्यता प्राप्त स्कूल व अभिभावकों को धोखा देकर चल रही हैं तो उनके खिलाफ संबंधित पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज कराने के भी आदेश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन की ओर से पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में जनहित याचिका संख्या 23119-2017 के तहत प्रदेशभर में चल रहे गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों व अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को चुनौती दी गई हैं। इसी मामले में न्यायालय के आदेशों के तहत ही शिक्षा विभाग 15 अप्रैल व 19 अप्रैल के बाद 29 मई को जारी किए गए आदेशों का भी हवाला दिया गया है। इन दोनों ही आदेशों में शिक्षा अधिकारियों को अपने अपने जिला के अंतर्गत चल रहे गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को बंद कराने के आदेश दिए जा चुके हैं। इन आदेशों के बावजूद भी जिन शिक्षा अधिकारियों ने अभी तक गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को बंद नहीं कराया हैए जिसके लिए पत्र में उनको खुद जिम्मेवार ठहराया गया है।
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने बताया कि सेकेंडरी शिक्षा महानिदेशालय से तीन बार अनाधिकृत स्कूूलों को बंद कराए जाने के आदेश शिक्षा अधिकारियों को दिए जा चुके हैं, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही। जिनके खिलाफ अब केस दर्ज करवाया जाएगा। ये अधिकारी शिक्षा निदेशालय के आदेशों और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन कर रहे हैं। 

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