हरियाणा राजकीय अध्यापक संघ संबंधित हरियाणा कर्मचारी महासंघ के सदस्यों ने परीक्षा ड्यूटी के बदले दिए जाने वाले मानदेय को बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि डेढ़ दशक से बोर्ड ने अपनी फीस हर साल बढ़ाई लेकिन शिक्षकों का मानदेय नहीं बढ़ाया। जबकि शिक्षकों की ड्यूटियां 25 किलोमीटर दूर तक लगा रखी है।
संघ के राज्य प्रधान प्रदीप सरीन ने कहा कि आज भी दिन भर की ड्यूटी के बदले शिक्षक को 40 रुपए डेली 45 रुपए ड्यूटी के दिए जाते हैं। उनका कहना है कि जिस शिक्षक की ड्यूटी से आठ किलोमीटर दूर लगती है उसे नियमानुसार 210 रुपए डीए मिलना चाहिए। लेकिन परीक्षा ड्यूटी पर लगे शिक्षकों को केवल 85 रुपए दिए जाते हैं। उनका कहना है कि अधिकतर परीक्षा केंद्र दो सत्र में वर्किंग करते हैं। ऐसे में सुपरवाइजर पूरा दिन व्यस्त रहता है। स्टेट प्रवक्ता रविंद्र राणा ने कहा कि बोर्ड ने अपनी फीस तो कई गुणा बढ़ा दी है। इस बार भी हर परीक्षार्थी से सात सौ रुपए तक लिए गए। लेकिन शिक्षकों को देने के लिए बोर्ड के पास कुछ नहीं है।
पिछले साल का भुगतान नहीं मिला : शिक्षकों ने बताया कि जिन शिक्षकों ने पिछले साल मार्च सितंबर में परीक्षा ड्यूटी दी थी कि उनका मानदेय अभी तक भी नहीं आया। शिक्षकों ने मांग की है कि भुगतान नकद किया जाए। जिला प्रधान गुरमीत सिंह ने बताया कि हर परीक्षा केंद्र के लिए पांच से दस हजार रुपए दिए जाते है। जबकि वहां सुपरवाइजर्स 10 से 15 होते हैं। ऐसे में आधे सुपरवाइजर को भुगतान नहीं मिल पाता। उनका कहना है कि कुछ शिक्षकों का तो दो साल पुराना पैसा रुका पड़ा है। जिला महासचिव हरपाल सिंह बैंस ने मांग की है कि ड्यूटी मानदेय का भुगतान नकद मौके पर ही किया जाए।
सरकारी नौकरी - Army /Bank /CPSU /Defence /Faculty /Non-teaching /Police /PSC /Special recruitment drive /SSC /Stenographer /Teaching Jobs /Trainee / UPSC
संघ के राज्य प्रधान प्रदीप सरीन ने कहा कि आज भी दिन भर की ड्यूटी के बदले शिक्षक को 40 रुपए डेली 45 रुपए ड्यूटी के दिए जाते हैं। उनका कहना है कि जिस शिक्षक की ड्यूटी से आठ किलोमीटर दूर लगती है उसे नियमानुसार 210 रुपए डीए मिलना चाहिए। लेकिन परीक्षा ड्यूटी पर लगे शिक्षकों को केवल 85 रुपए दिए जाते हैं। उनका कहना है कि अधिकतर परीक्षा केंद्र दो सत्र में वर्किंग करते हैं। ऐसे में सुपरवाइजर पूरा दिन व्यस्त रहता है। स्टेट प्रवक्ता रविंद्र राणा ने कहा कि बोर्ड ने अपनी फीस तो कई गुणा बढ़ा दी है। इस बार भी हर परीक्षार्थी से सात सौ रुपए तक लिए गए। लेकिन शिक्षकों को देने के लिए बोर्ड के पास कुछ नहीं है।
पिछले साल का भुगतान नहीं मिला : शिक्षकों ने बताया कि जिन शिक्षकों ने पिछले साल मार्च सितंबर में परीक्षा ड्यूटी दी थी कि उनका मानदेय अभी तक भी नहीं आया। शिक्षकों ने मांग की है कि भुगतान नकद किया जाए। जिला प्रधान गुरमीत सिंह ने बताया कि हर परीक्षा केंद्र के लिए पांच से दस हजार रुपए दिए जाते है। जबकि वहां सुपरवाइजर्स 10 से 15 होते हैं। ऐसे में आधे सुपरवाइजर को भुगतान नहीं मिल पाता। उनका कहना है कि कुछ शिक्षकों का तो दो साल पुराना पैसा रुका पड़ा है। जिला महासचिव हरपाल सिंह बैंस ने मांग की है कि ड्यूटी मानदेय का भुगतान नकद मौके पर ही किया जाए।
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