सिरसा (माहेश्वरी): नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए 20 दिन बीत गए हैं परंतु अभी तक सरकारी स्कूलों में किताबें नहीं पहुंची हैं। अधिकतर स्कूलों में शिक्षकों की कमी पहले से ही चल रही है। ऐसे में बिना किताबों व शिक्षकों के इस बार भी शिक्षा सत्र की शुरूआत हुई है।
भले ही प्रदेश सरकार ‘स्कूल चलो’ का नारा देकर अधिकाधिक बच्चों को स्कूल आंगन में लाने को प्रयासरत है, पर दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था सुस्त चाल से चल रही है। बच्चों के पास पढऩे को किताबें ही नहीं है। वे बिना बैग के स्कूल जाने पर मजबूर हो गए हैं।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करते हुए सरकार प्रदेशभर से 3581 गैस्ट टीचरों को सरप्लस बताकर नौकरी से निकाल बाहर कर चुकी है। सिरसा जिले के विभिन्न स्कूलों से 300 गैस्ट टीचर हटाए गए।
पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों के लिए यह एक और बड़ा झटका था। इसका दुष्प्रभाव बच्चों की पढ़ाई पर पडऩा लाजमी है। बच्चों को बिना पढ़े ही टैस्ट देना होगा। टैस्ट में बच्चों का प्रदर्शन कैसा रहेगा, इंतजाम देखकर साफ समझा जा सकता है।
सरकारी स्कूलों में व्यवस्था की घोर खामी का खमियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। शिक्षा के गिरते स्तर के चलते अभिभावकों का सरकारी स्कूलों से विश्वास सा उठ गया हैं जिसका फायदा निजी स्कूल वाले बखूबी उठा रहे हैं। बेहतर शिक्षा के नाम पर ये स्कूल अभिभावकों को जमकर लूट रहे हैं। अभिभावक भी अपने बच्चों का उज्ज्वल भविष्य बनाने के लिए न चाहते हुए भी लूटे जाने के लिए मजबूर हैं।
सरकार यह सपना ले रही है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधरेगा और बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनेगा लेकिन बिना संसाधनों के सरकार का यह सपना पूरा होना मुश्किल नजर आता है।
सरकारी नौकरी - Army /Bank /CPSU /Defence /Faculty /Non-teaching /Police /PSC /Special recruitment drive /SSC /Stenographer /Teaching Jobs /Trainee / UPSC
भले ही प्रदेश सरकार ‘स्कूल चलो’ का नारा देकर अधिकाधिक बच्चों को स्कूल आंगन में लाने को प्रयासरत है, पर दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था सुस्त चाल से चल रही है। बच्चों के पास पढऩे को किताबें ही नहीं है। वे बिना बैग के स्कूल जाने पर मजबूर हो गए हैं।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करते हुए सरकार प्रदेशभर से 3581 गैस्ट टीचरों को सरप्लस बताकर नौकरी से निकाल बाहर कर चुकी है। सिरसा जिले के विभिन्न स्कूलों से 300 गैस्ट टीचर हटाए गए।
पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों के लिए यह एक और बड़ा झटका था। इसका दुष्प्रभाव बच्चों की पढ़ाई पर पडऩा लाजमी है। बच्चों को बिना पढ़े ही टैस्ट देना होगा। टैस्ट में बच्चों का प्रदर्शन कैसा रहेगा, इंतजाम देखकर साफ समझा जा सकता है।
सरकारी स्कूलों में व्यवस्था की घोर खामी का खमियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। शिक्षा के गिरते स्तर के चलते अभिभावकों का सरकारी स्कूलों से विश्वास सा उठ गया हैं जिसका फायदा निजी स्कूल वाले बखूबी उठा रहे हैं। बेहतर शिक्षा के नाम पर ये स्कूल अभिभावकों को जमकर लूट रहे हैं। अभिभावक भी अपने बच्चों का उज्ज्वल भविष्य बनाने के लिए न चाहते हुए भी लूटे जाने के लिए मजबूर हैं।
सरकार यह सपना ले रही है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधरेगा और बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनेगा लेकिन बिना संसाधनों के सरकार का यह सपना पूरा होना मुश्किल नजर आता है।
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