अम्बाला.शिक्षा का नया सत्र शुरू हुए करीब 22 दिन बीत चुके हैं। इतना समय बीत जाने के बाद जहां शिक्षा विभाग की ओर से बड़ी क्लास की किताबें छह दिन पूर्व ही स्कूलों में पहुंचीं। वहीं प्राइमरी स्कूलों में अभी तक किताबें न पहुंचने की वजह से बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुअा है।
हालांकि बड़ी कक्षाओं की किताबें स्कूल में पहुंची हैं, बच्चों में वितरित नहीं की गईं।
इससे उन बच्चों का सिलेबस भी पीछे छूट गया है। उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बच्चे स्कूल तो जाते हैं, लेकिन बिना किताबों के पढ़ाई नहीं कर पाते। हालात यह है कि एक तो सरकारी स्कूलों में टीचर्स की कमी, दूसरा यदि विभाग की ओर से किताबें स्कूल में आ भी जाए तो वह समय पर बच्चों को नहीं दी जाती है। जिस वजह से बच्चों को सिलेबस पीछे रह जाता है। यही वजह से है कि सरकारी स्कूलों का परीक्षा परिणाम खराब आता है। ऐसे हालत में बच्चों को मोह सरकारी स्कूलों से टूट जाता है।
तीन साल में बदल दिया स्तर, सब कुछ प्राइवेट जैसा, रिजल्ट 100 फीसदी
सिटी के प्रेमनगर का राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल। आज यहां करीब 1 हजार बच्चे पढ़ रहे हैं। शायद जिले की किसी भी सरकारी स्कूल से ज्यादा। ऐसी स्थिति में जब सरकारी विद्यालयों को नकारात्मक दृष्टि से देखा जा रहा हो। यहां पिछले तीन साल से जहां साइंस व कोर्स का रिजल्ट 100 फीसदी आ रहा है। वहीं 10वीं व 12वीं में करीब 40 बच्चे हर साल मेरिट की लिस्ट में हैं। स्कूल स्टाफ समेत 257 कर्मचारियों, अधिकारियों के बच्चे यहां पढ़ते हैं। उक्त सालों में स्कूल में प्रवेश के लिए यहां मारामारी है। यहां की खास चीजें पढ़ने मेें जितनी अच्छी है, उन्हें तैयार करने में उतना ही संघर्ष लगा है स्कूल के प्रिंसिपल अनिल शर्मा व टीचर्स का। वे गांव माजरी के राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल से प्रिंसिपल पद पर ट्रांसफर होकर नवंबर 2012 में प्रेमनगर स्कूल के सीनियर सेकेंडरी स्कूल में तैनात हुए। यहां 600 बच्चे थे, लेकिन आधे से ज्यादा बच्चे गायब रहते थे। अव्यवस्था का आलम था। स्कूल में शिक्षकों व छात्रों की दोनों टाइम अटेंडेंस अनिवार्य कर दी गई। मोटीवेशन के लिए शिक्षकों के साथ रोज मीटिंग शुरू की गई। बच्चों को पढ़ाने में शिक्षकों की रुचि बढ़ी और बच्चों के रजिस्ट्रेशन में भी बढ़ोतरी हुई और अब ये आलम है कि यहां दाखिले के लिए सिफारिश की जाती है, लेकिन दाखिला नहीं मिलता।
इनके नहीं टीचर्स
सरकारी स्कूलों में ज्यादातर मैथ, हिंदी, साइंस के टीचर्स की कमी है। यहां तक की पहले अन्य सब्जेक्ट के टीचर्स की भी कमी थी, लेकिन जेबीटी टीचर्स आने पर अन्य सब्जेक्ट में बच्चों को ज्यादा परेशानी नहीं होती है। जिले में सबसे ज्यादा मैथ व साइंस मास्टर सहित हिंदी के मास्टर की भी कमी है।
यहां नहीं प्रिंसिपल
राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल दुखेड़ी, जीएसएस जनसुई, जीएसएस माजरी, जीएसएस पुलिस लाइन कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, जीएसएस शाहपुर और जीएसएस नूरपुर। इस वर्ष जो मार्च माह में रिटायर्ड हुए हैं, उनका अभी विभाग ने आंकलन नहीं किया।
250 स्कूलों की आई ग्रांट
वर्ष 2015-16 में प्राइमरी, मिडिल, हाई, सीनियर सेकेंडरी स्कूल की कंडम बिल्डिंग की मरम्मत के लिए करीब 2 करोड़ 99 लाख 86 हजार रुपए की ग्रांट आई। जिले में करीब 20 स्कूलों की बिल्डिंग कंडम हो चुकी हैै। यह राशि शौचालय, पानी की व्यवस्था, सफाई अादि के लिए खर्च हो रही है।
सरकारी नौकरी - Army /Bank /CPSU /Defence /Faculty /Non-teaching /Police /PSC /Special recruitment drive /SSC /Stenographer /Teaching Jobs /Trainee / UPSC
हालांकि बड़ी कक्षाओं की किताबें स्कूल में पहुंची हैं, बच्चों में वितरित नहीं की गईं।
इससे उन बच्चों का सिलेबस भी पीछे छूट गया है। उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बच्चे स्कूल तो जाते हैं, लेकिन बिना किताबों के पढ़ाई नहीं कर पाते। हालात यह है कि एक तो सरकारी स्कूलों में टीचर्स की कमी, दूसरा यदि विभाग की ओर से किताबें स्कूल में आ भी जाए तो वह समय पर बच्चों को नहीं दी जाती है। जिस वजह से बच्चों को सिलेबस पीछे रह जाता है। यही वजह से है कि सरकारी स्कूलों का परीक्षा परिणाम खराब आता है। ऐसे हालत में बच्चों को मोह सरकारी स्कूलों से टूट जाता है।
तीन साल में बदल दिया स्तर, सब कुछ प्राइवेट जैसा, रिजल्ट 100 फीसदी
सिटी के प्रेमनगर का राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल। आज यहां करीब 1 हजार बच्चे पढ़ रहे हैं। शायद जिले की किसी भी सरकारी स्कूल से ज्यादा। ऐसी स्थिति में जब सरकारी विद्यालयों को नकारात्मक दृष्टि से देखा जा रहा हो। यहां पिछले तीन साल से जहां साइंस व कोर्स का रिजल्ट 100 फीसदी आ रहा है। वहीं 10वीं व 12वीं में करीब 40 बच्चे हर साल मेरिट की लिस्ट में हैं। स्कूल स्टाफ समेत 257 कर्मचारियों, अधिकारियों के बच्चे यहां पढ़ते हैं। उक्त सालों में स्कूल में प्रवेश के लिए यहां मारामारी है। यहां की खास चीजें पढ़ने मेें जितनी अच्छी है, उन्हें तैयार करने में उतना ही संघर्ष लगा है स्कूल के प्रिंसिपल अनिल शर्मा व टीचर्स का। वे गांव माजरी के राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल से प्रिंसिपल पद पर ट्रांसफर होकर नवंबर 2012 में प्रेमनगर स्कूल के सीनियर सेकेंडरी स्कूल में तैनात हुए। यहां 600 बच्चे थे, लेकिन आधे से ज्यादा बच्चे गायब रहते थे। अव्यवस्था का आलम था। स्कूल में शिक्षकों व छात्रों की दोनों टाइम अटेंडेंस अनिवार्य कर दी गई। मोटीवेशन के लिए शिक्षकों के साथ रोज मीटिंग शुरू की गई। बच्चों को पढ़ाने में शिक्षकों की रुचि बढ़ी और बच्चों के रजिस्ट्रेशन में भी बढ़ोतरी हुई और अब ये आलम है कि यहां दाखिले के लिए सिफारिश की जाती है, लेकिन दाखिला नहीं मिलता।
इनके नहीं टीचर्स
सरकारी स्कूलों में ज्यादातर मैथ, हिंदी, साइंस के टीचर्स की कमी है। यहां तक की पहले अन्य सब्जेक्ट के टीचर्स की भी कमी थी, लेकिन जेबीटी टीचर्स आने पर अन्य सब्जेक्ट में बच्चों को ज्यादा परेशानी नहीं होती है। जिले में सबसे ज्यादा मैथ व साइंस मास्टर सहित हिंदी के मास्टर की भी कमी है।
यहां नहीं प्रिंसिपल
राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल दुखेड़ी, जीएसएस जनसुई, जीएसएस माजरी, जीएसएस पुलिस लाइन कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, जीएसएस शाहपुर और जीएसएस नूरपुर। इस वर्ष जो मार्च माह में रिटायर्ड हुए हैं, उनका अभी विभाग ने आंकलन नहीं किया।
250 स्कूलों की आई ग्रांट
वर्ष 2015-16 में प्राइमरी, मिडिल, हाई, सीनियर सेकेंडरी स्कूल की कंडम बिल्डिंग की मरम्मत के लिए करीब 2 करोड़ 99 लाख 86 हजार रुपए की ग्रांट आई। जिले में करीब 20 स्कूलों की बिल्डिंग कंडम हो चुकी हैै। यह राशि शौचालय, पानी की व्यवस्था, सफाई अादि के लिए खर्च हो रही है।
सरकारी नौकरी - Army /Bank /CPSU /Defence /Faculty /Non-teaching /Police /PSC /Special recruitment drive /SSC /Stenographer /Teaching Jobs /Trainee / UPSC