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गैस्ट टीचर्स के पदों को रिक्त न मानने पर हरियाणा सरकार से जवाब तलब

चंडीगढ़, (विवेक): गृह जिले के बजाय अन्य जिलों में कार्यरत जे.बी.टी. शिक्षकों की अंतॢजला तबादला नीति में गैस्ट टीचर्स के पदों को खाली न मानने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा शिक्षा विभाग की सचिव और मौलिक शिक्षा निदेशक से जवाब मांगा है।

 याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में आरोप लगाया था कि विभाग ने गैस्ट टीचर्स के दबाव में उनके पदों को रिक्त न मानकर सिर्फ 1588 शिक्षकों की ही तबादला सूची जारी की। रोहतक निवासी राकेश कुमार ने याचिका में गैस्ट टीचर्स के पदों को रिक्त मानकर उनका तबादला करने की मांग की।

वकील जगबीर मलिक ने बैंच को बताया कि याचिकाकत्र्ता से नियुक्ति के समय वर्ष 2011 में पसंद का ऑप्शन पूछा था। उसने रोहतक, सोनीपत व झज्जर का ऑप्शन दिया था, लेकिन विभाग ने गैस्ट टीचर्स को न हटाकर उसे अम्बाला नियुक्ति दी।

2015 में अंतजिर्ला ट्रांसफर पॉलिसी के तहत याचिकाकर्ता ने क्लॉज 3 (6) के तहत रोहतक में तबादले का आवेदन किया। लेकिन यह कहते हुए तबादला नहीं किया गया कि रोहतक में पद खाली नहीं हैं। हालांकि, रोहतक में गैस्ट टीचर्स जे.बी.टी. पदों पर कार्यरत हैं। जस्टिस दीपक सिब्बल की बैंच ने शिक्षा विभाग की सचिव, मौलिक शिक्षा निदेशक सहित अन्य प्रतिवादियों से जवाब तलब किया है।
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