अल्पना, सोनीपत स्कूल खुले हुए बीस दिन हो चुके हैं लेकिन राजकीय स्कूलों में अब तक
पुस्तकें नहीं पहुंची हैं। बच्चे बिना पुस्तकों के पढ़ाई कर रहे हैं।
अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्या पढ़ाई हो रही होगी। शिक्षकों को कहना है कि कुछ पुरानी पुस्तकों से पढ़ा रहे हैं और कुछ
सामान्य ज्ञान से संबंधित जानकारी देकर बच्चों का समय पूरा करवा रहे हैं।
जिला शिक्षा विभाग द्वारा एक सप्ताह में पुस्तकें पहुंचाने का दावा किया गया था लेकिन अब तक नहीं पहुंची। पुस्तकें सीधी स्कूलों में ही पहुंचेंगी। पुस्तकें पहुंचने के इंतजार में स्कूल का एक कर्मचारी प्रतिदिन शाम तक स्कूल में ही रहता है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पत्र के माध्यम से यही सूचना मिली थी कि पुस्तकें एक सप्ताह तक स्कूलों में पहुंच जाएंगी। स्कूल के शिक्षकों व बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि जब पुस्तकें ही नहीं हैं तो स्कूलों को क्यों खोला गया है। बच्चे इतनी गर्मी में परेशान भी होते हैं और पढ़ाई भी नहीं हो रही है।
स्कूल ड्रेस को लेकर भी असमंजस
स्कूल ड्रेस को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। शिक्षा विभाग ने अब सभी स्कूलों में बच्चों को स्कूल ड्रेस खरीदने पर पाबंदी लगा दी है। बच्चों की ड्रेस के लिए 400रुपये का बजट मिलता है। जिससे स्कूल मैनेजमेंट कमेटी द्वारा ड्रेस खरीदी जाती थी। इस बार बच्चों की ड्रेस खरीदने पर रोक लगा दी है।
पुस्तकों के लिए एक सप्ताह का समय दिया था। पत्र के माध्यम से एक सप्ताह में सभी स्कूलों में पुस्तकें पहुंचाने की सूचना दी गई है। देरी होने के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
-संध्या मलिक, खंड मौलिक शिक्षा अधिकारी।
सरकारी नौकरी - Army /Bank /CPSU /Defence /Faculty /Non-teaching /Police /PSC /Special recruitment drive /SSC /Stenographer /Teaching Jobs /Trainee / UPSC
जिला शिक्षा विभाग द्वारा एक सप्ताह में पुस्तकें पहुंचाने का दावा किया गया था लेकिन अब तक नहीं पहुंची। पुस्तकें सीधी स्कूलों में ही पहुंचेंगी। पुस्तकें पहुंचने के इंतजार में स्कूल का एक कर्मचारी प्रतिदिन शाम तक स्कूल में ही रहता है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पत्र के माध्यम से यही सूचना मिली थी कि पुस्तकें एक सप्ताह तक स्कूलों में पहुंच जाएंगी। स्कूल के शिक्षकों व बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि जब पुस्तकें ही नहीं हैं तो स्कूलों को क्यों खोला गया है। बच्चे इतनी गर्मी में परेशान भी होते हैं और पढ़ाई भी नहीं हो रही है।
स्कूल ड्रेस को लेकर भी असमंजस
स्कूल ड्रेस को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। शिक्षा विभाग ने अब सभी स्कूलों में बच्चों को स्कूल ड्रेस खरीदने पर पाबंदी लगा दी है। बच्चों की ड्रेस के लिए 400रुपये का बजट मिलता है। जिससे स्कूल मैनेजमेंट कमेटी द्वारा ड्रेस खरीदी जाती थी। इस बार बच्चों की ड्रेस खरीदने पर रोक लगा दी है।
पुस्तकों के लिए एक सप्ताह का समय दिया था। पत्र के माध्यम से एक सप्ताह में सभी स्कूलों में पुस्तकें पहुंचाने की सूचना दी गई है। देरी होने के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
-संध्या मलिक, खंड मौलिक शिक्षा अधिकारी।
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