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कहीं लटक न जाए कृषि महाविद्यालय पर ताला

जागरण संवाददाता, रेवाड़ी: एक साल पहले आरंभ हुए बावल के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में कृषि महाविद्यालय की कक्षाएं फिर बंद होने की कगार पर हैं। लोगों का कहना है कि नए सत्र से प्रवेश परीक्षा बावल कॉलेज के नाम से करने और कक्षाएं कौल में लगाने के निर्णय से विद्यार्थियों विशेषकर दक्षिण हरियाणा के युवाओं को अपने घर से दूर रहना पड़ेगा।

बंद करने का किया जा रहा षड्यंत्र:
पिछले एक वर्ष में भाजपा सरकार ने बावल में कृषि कालेज स्थापित करने के लिए चौधरी चरण¨सह कृषि विश्वविद्यालय हिसार द्वारा मांगे गए 76 करोड़ रुपये के बजट में से एक पैसा भी विश्वविद्यालय को नही दिया गया। जब बावल कृषि विश्वविद्यालय के लिए सरकार ने 76 करोड़ रुपये की राशि समय पर देनी ही नही थी तो इस शिक्षा सत्र में बावल में कृषि कॉलेज खोलने की मुख्यमंत्री की घोषणा का औचित्य क्या है। कृषि कॉलेज बावल की कक्षाएं कृषि कालेज कौल-कैथल में लगाना अव्यावहारिक है। बावल शुष्क खेती अनुसंधान केन्द्र में पहले भी कृषि कालेज था उस पुराने भवन का उपयोग कृषि कक्षाएं लगाने के लिए क्यों नही किया। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय व कृषि कालेज कौल से डेपुटेशन पर शिक्षक भेजकर बावल में ही कक्षाएं प्रारंभ करने को प्राथमिकता देना चाहिए। क्या पूर्व की भांति बावल कृषि कॉलेज प्रारंभ करने से पहले ही बहानेबाजी से उसे बंद करने का षडयंत्र तो नही रचा जा रहा है।
- वेदप्रकाश विद्रोही, अध्यक्ष, स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत।
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कुछ समय कक्षाएं चलाने के लिए नई सुविधाओं की कमी का हवाला देकर बंद करना उचित नहीं है। इस क्षेत्रीय केंद्र में बीएससी एग्रीकल्चर की कक्षाओं के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। कोई नए बजट और नए भवन की आवश्यकता नहीं है। वर्तमान सुविधाओं के तहत इस केंद्र में कृषि महाविद्यालय के अलावा यहां होम साइंस, कृषि इंजीनिय¨रग कॉलेज, वेटरनरी कॉलेज की भी कक्षाएं शुरू की जा सकती हैं। 1972 से लेकर आज तक यह केंद्र क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बनकर रह गया है जबकि इसके साथ के अन्य सभी क्षेत्रीय केंद्र पूर्ण विश्वविद्यालय बन चुके हैं। सरकार की ओर से यहां शैक्षणिक गतिविधियां बढ़ाने के बजाय बंद करना क्षेत्र के साथ भेदभाव करने की नीति प्रमाणित करती है। कौल में कक्षाएं चलाना इस क्षेत्र के युवाओं के लिए किसी भी सूरत में उचित नहीं है।

-बाबू जगजीत ¨सह, अध्यक्ष, दक्षिण हरियाणा विकास लोकमंच
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