; paras[X - 1].parentNode.insertBefore(ad1, paras[X]); } if (paras.length > X + 4) { var ad1 = document.createElement('div'); ad1.className = 'ad-auto-insert ad-first'; ad1.innerHTML = ` ; paras[X + 3].parentNode.insertBefore(ad2, paras[X + 4]); } if (isMobile && paras.length > X + 8) { var ad1 = document.createElement('div'); ad1.className = 'ad-auto-insert ad-first'; ad1.innerHTML = ` ; paras[X + 7].parentNode.insertBefore(ad3, paras[X + 8]); } });

Important Posts

Advertisement

नारी शिक्षा : नहीं मानी हार, पेड़ की छांव में लगाई क्लास

जागरण संवाददाता, सिरसा : कभी मिला था पाठशाला के नाम पर एक कमरा। बच्चों की संख्या 8 थी, लेकिन यहां नियुक्त की गई अध्यापिका प्रकाश कौर उन जुनूनी महिलाओं में हैं जिसने हालात को बदलकर रख दिया। सिद्ध किया कि विपरीत हालात में नारी शक्ति काम कर सकती है।
कन्या प्राथमिक पाठशाला चत्तरगढ़पट्टी में 2009 में प्राथमिक स्कूल बना दिया गया। चत्तरगढ़पट्टी से करीबन एक किलोमीटर की दूरी पर बने स्कूल में कुछ ही बच्चे पढ़ने आते थे और यहां एक शिक्षक को डेपुटेशन दी जाती थी। इसी डेपुटेशन के साथ 2011 में पुलिस लाइन से प्रकाश कौर को बतौर हेड टीचर स्कूल में भेज दिया गया। हालात देखें तो उन्हें यहां काम करना मुश्किल लगा।
पानी टंकी को बनाया ब्लैक बोर्ड
प्रकाश कौर बताती हैं कि दो साल पहले तक यहां पेड़ के नीचे ही कक्षा लगती थी। स्कूल के नाम पर पंचायत ने एक कमरा दे रखा था। इसी में दफ्तर, इसी में कक्षा और यही मिड डे मील की रसोई थी। ऐसे में क्लास बाहर लगाना मजबूरी रही। स्कूल की टंकी पर ही ब्लैक बोर्ड बनाया गया। स्कूल समय में बच्चे पढ़ाए और इसके बाद आसपास के घरों में बच्चों के सर्वे के लिए खुद ही निकली।
अब पढ़ते हैं यहां 116 बच्चे
इस स्कूल में हालात बदलते गए। पढ़ाई का स्तर देखते हुए अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने लगे और अब बच्चों की संख्या 116 पर पहुंच गई। अब उनकी जिद है कि यहां बच्चे 300 होंगे और इसे मिडिल स्कूल बनाकर दम लेंगे। स्कूल में चार कमरे बने हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल में दो महिला गेस्ट टीचर हैं। स्कूल की तीनों शिक्षक मिलकर घरों में सर्वे करती है। उनका सर्वे जनवरी में शुरू हो जाता है ताकि स्कूल में बच्चे बढ़े। इसका रिजल्ट भी वे अच्छा मानती हैं।
गरीबी की वजह से छूट गई थी पढ़ाई, पापा ने दिया हौसला
प्रकाश कौर ने बताया कि वह एक निर्धन परिवार से संबंध रखती है। उसके परिवारजन आठवीं कक्षा में फीस नहीं दे पाए और उसकी पढ़ाई छूट गई। लेकिन पिता ने हौसला दिया, कहा पढ़ाई नहीं छोड़नी फीस का प्रबंध हरहाल में होगा। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1986 में उनकी शादी हो गई। इसके बाद भी पढ़ाई जारी रही और लोक प्रशासन में एमएम की डिग्री भी हासिल की।
रूढि़वादी विचारधारा आई आड़े

प्रकाश कौर ने बताया कि समाज में पहले आज जैसी जागरूकता नहीं थी। उन्हें एक बार संसद कार्यक्रम के तहत लोक सभा अध्यक्ष चुना गया। उनकी टीम को बाद में दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष से मिलने का न्योता मिला, लेकिन परिजन इसके लिए राजी नहीं थे। लड़की कहां-कहां घूमेंगी जैसे प्रश्न हर जगह खड़े किए गए। लेकिन पिता ने इन सब प्रश्नों को दरकिनार कर दिया और उसे आगे बढ़ने के लिए हर बार प्रोत्साहन मिला। इसके अलावा इस दौरान स्कूल शिक्षक रही सुशीला बैन जो बाद में ओढां में भी ¨प्रसिपल रही ने उसे खूब हौसला दिया। उसी हौसले के दम पर आज वह कामयाब हुई है।

सरकारी नौकरी - Army /Bank /CPSU /Defence /Faculty /Non-teaching /Police /PSC /Special recruitment drive /SSC /Stenographer /Teaching Jobs /Trainee / UPSC

UPTET news