पानीपत : न्यू ट्रांसफर पॉलिसी का विकल्प खुल गया है। जोन में विकल्प कम होने से
गुरुजी को मनचाही पोस्टिंग नहीं मिलेगी। वेबसाइट पर जिस जोन के स्टेशन
(विद्यालय) में वेकेंसी दिख रही है, उसी में विकल्प भरेंगे। एक जोन में
अध्यापक के पास विकल्प सीमित है। रिक्तियां पोर्टल पर दिखाई नहीं दे रहीं।
तबादले के लिए ऑप्शन देने की अंतिम तिथि सोमवार है।
सरकार ने न्यू ट्रांसफर पॉलिसी लागू की है। पांच वर्ष से अधिक समय तक एक स्कूल में जमे शिक्षकों का तबादला अब हो जाएगा। सात जोन में वर्तमान में पदस्थ स्कूल का जोन छोड़कर उन्हें विकल्प भरना है। पॉलिसी लागू करने के बाद शिक्षा निदेशालय ने पहले रेशनेलाइजेशन किया। जिन स्कूलों में जहां पोस्ट बनी, वहां पर अब ट्रांसफर के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे। बीते शुक्रवार को ऑनलाइन आवेदन की रफ्तार थोड़ी कम रही। एक स्कूल में पांच वर्ष की नौकरी पूरी कर चुके शिक्षक बीते शनिवार से ऑनलाइन आवेदन करने लगे हैं। इस आवेदन में उनके समक्ष कई समस्याएं आ रही है।
ये है समस्या
तबादले की प्रतीक्षा में बैठे शिक्षकों ने बताया कि किसी एक जोन में जितनी वेकेंसी हैं, उतनी नहीं खुल रही हैं। उदाहरण के तौर पर वेकेंसी 25 है तो खुल पांच-छह ही रही हैं। विभागीय वेबसाइट पर एक सूची उपलब्ध है, जिसमें सभी रिक्तियां दिखाई गई हैं। अध्यापक के एमआइएस पोर्टल पर इन रिक्तियों में से सीमित ही उपलब्ध हैं। वेकेंसी पूरी नहीं खुलेगी तो शिक्षक पसंद का विकल्प कैसे चुनेंगे। सूटेबल स्टेशन से महरूम हो जाएंगे।
स्टेशन में 78 अंकों का रोल
न्यू ट्रांसफर पॉलिसी में अंकों का अहम रोल होगा। 78 अंक में से अध्यापक जितने अधिक अंक हासिल करेंगे, विकल्प में से नजदीक का स्टेशन लेने में उतनी ही आसानी होगी। सभी स्टेशन का ऑप्शन उपलब्ध न होने से कम अंक हासिल करने वाले गुरुजी भी स्टेशन लेने में बाजी मार सकते हैं।
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सरकार ने न्यू ट्रांसफर पॉलिसी लागू की है। पांच वर्ष से अधिक समय तक एक स्कूल में जमे शिक्षकों का तबादला अब हो जाएगा। सात जोन में वर्तमान में पदस्थ स्कूल का जोन छोड़कर उन्हें विकल्प भरना है। पॉलिसी लागू करने के बाद शिक्षा निदेशालय ने पहले रेशनेलाइजेशन किया। जिन स्कूलों में जहां पोस्ट बनी, वहां पर अब ट्रांसफर के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे। बीते शुक्रवार को ऑनलाइन आवेदन की रफ्तार थोड़ी कम रही। एक स्कूल में पांच वर्ष की नौकरी पूरी कर चुके शिक्षक बीते शनिवार से ऑनलाइन आवेदन करने लगे हैं। इस आवेदन में उनके समक्ष कई समस्याएं आ रही है।
ये है समस्या
तबादले की प्रतीक्षा में बैठे शिक्षकों ने बताया कि किसी एक जोन में जितनी वेकेंसी हैं, उतनी नहीं खुल रही हैं। उदाहरण के तौर पर वेकेंसी 25 है तो खुल पांच-छह ही रही हैं। विभागीय वेबसाइट पर एक सूची उपलब्ध है, जिसमें सभी रिक्तियां दिखाई गई हैं। अध्यापक के एमआइएस पोर्टल पर इन रिक्तियों में से सीमित ही उपलब्ध हैं। वेकेंसी पूरी नहीं खुलेगी तो शिक्षक पसंद का विकल्प कैसे चुनेंगे। सूटेबल स्टेशन से महरूम हो जाएंगे।
स्टेशन में 78 अंकों का रोल
न्यू ट्रांसफर पॉलिसी में अंकों का अहम रोल होगा। 78 अंक में से अध्यापक जितने अधिक अंक हासिल करेंगे, विकल्प में से नजदीक का स्टेशन लेने में उतनी ही आसानी होगी। सभी स्टेशन का ऑप्शन उपलब्ध न होने से कम अंक हासिल करने वाले गुरुजी भी स्टेशन लेने में बाजी मार सकते हैं।
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