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उच्चतर शिक्षा हुई अनुबंधित शिक्षकों के हवाले

 सुरेंद्र यादव, नारनौल : प्रदेश में उच्चतर शिक्षा की हालत दिन-प्रतिदिन गिरती जा रही है। हर महीने कॉलेज शिक्षकों के सेवानिवृत्त होते जाने और नई नियुक्तियां नहीं होने से हालात बदतर बने हुए हैं। जिला महेंद्रगढ़ में अधिकतर सरकारी कॉलेज हैं और इनमें स्थायी शिक्षकों की संख्या 20 प्रतिशत से भी कम है।
काम चलाने के लिए हर साल एक्सटेंशन लेक्चरर्स की भर्ती की जाती है, लेकिन बहुत कम वेतन पर काम कर रहे ये शिक्षक न तो ना‌र्म्स पर खरे उतर रहे हैं और न ही विद्यार्थियों पर इनका कोई दबाव होता है। अकेले नारनौल शहर के प्रमुख कॉलेजों में 8500 के करीब विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए मात्र 40 स्थायी शिक्षक हैं।
जिला महेंद्रगढ़ में 12 सरकारी महाविद्यालय हैं, जिनमें हजारों की संख्या में विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों से शिक्षा के स्तर में गिरावट आई है। इसका मुख्य कारण शिक्षकों की कमी है। हर वर्ष शिक्षकों के सेवानिवृत्त होते जाने और नई भर्ती नहीं किए जाने से हालात ¨चताजनक स्थिति तक पहुंच चुके हैं। कॉलेजों में स्वीकृत पदों की तुलना में मात्र 20 फीसदी ही स्थायी शिक्षक कार्यरत हैं। यह स्वीकृत पद काफी समय पहले के हैं, जबकि इसके बाद विद्यार्थियों की संख्या में काफी इजाफा हो चुका है। यदि विद्यार्थियों की वर्तमान संख्या के हिसाब से पद स्वीकृत किए जाएं तो इनमें काफी बढ़ोतरी होगी।
क्षेत्र के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित महाविद्यालयों में शुमार नारनौल के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में स्थिति बहुत खराब हो चुकी है। वैसे तो यहां आठ विषयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम चल रहे हैं, लेकिन इनमें से कई विषयों में तो विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए एक भी स्थायी शिक्षक नहीं है। रसायनशास्त्र, वनस्पतिशास्त्र और भू-गर्भविज्ञान जैसे साइंस के विषय पढ़ाने और प्रेक्टिकल वर्क करवाने के लिए कॉलेज में एक भी स्थायी शिक्षक नहीं है। रसायनशास्त्र का स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम पढ़ाने के लिए मात्र एक शिक्षक है, लेकिन उसकी ड्यूटी दो महाविद्यालयों में है।
जिला मुख्यालय स्थित राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के 18 विभागों में से सात विभागों में एक भी शिक्षक नहीं है। इसी तरह महिला महाविद्यालय के भी 18 विभागों में से आठ विभागों में कोई स्थायी शिक्षक नहीं हैं। इतना ही दोनों कॉलेज बिना स्थायी प्राचार्य के चल रहे हैं। इनमें कार्यवाहक ¨प्रसिपल को फैसले लेने में कई तरह की बंदिशों का सामना करना पड़ता है, जिसका सीधा असर कॉलेज संचालन पर पड़ता है। पीजी कॉलेज में पिछले शैक्षणिक सत्र में करीब 4800 विद्यार्थियों का दाखिला था, जबकि महिला महाविद्यालय में 3600 छात्राओं का। इस वर्ष इसमें और इजाफा होने की संभावना है। विद्यार्थियों के मुकाबले स्टाफ को देखें तो यह संख्या बहुत कम है। राजकीय पीजी कॉलेज में 111 स्वीकृत पदों के विपरीत 22 शिक्षक हैं, जिनमें से दो अगले कुछ महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इसी तरह महिला महाविद्यालय में 55 स्वीकृत पदों में से मात्र 18 ही भरे हैं। लड़कियों के लिए गृह विज्ञान और संगीत जैसे विषय पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक नहीं हैं।
कॉलेज में शिक्षकों की कमी है, लेकिन एक्सटेंशन लेक्चरर्स भर्ती करके इस कमी को दूर किया जाएगा। इसके लिए समाचार पत्रों में विज्ञापन दिया गया है। अभी दाखिले चल रहे हैं और कक्षाएं शुरू होने में एक-दो दिन का समय है। विद्यार्थियों की पढ़ाई किसी हालत में प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।
-नरेश यादव, कार्यवाहक प्राचार्य, पीजी कॉलेज नारनौल।
कॉलेज में छात्राओं की संख्या के हिसाब से स्वीकृत पद कम हैं। इनमें से अधिकतर रिक्त हैं, लेकिन एक्सटेंशन लेक्चरर्स रख लिए गए हैं। महाविद्यालय प्रशासन छात्राओं की पढ़ाई के लिए पूरी तरह गंभीर है। शिक्षकों के अभाव में उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।

-एमएस यादव, कार्यवाहक प्राचार्य, महिला कॉलेज, नारनौल।
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