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शिक्षक तबादलों से डर रहे और छात्रों का भविष्य अंधकार में

सिटी रिपोर्टर| पंचकूला/ माेरनी प्रदेश सरकार शिक्षा विभाग पिछले दो सालों से खूब चर्चा में हैं। विभाग सरकार स्कूलों में सुविधाएं उपलब्ध करवाने की बजाए, नित नए प्रयोग कर मौजूदा शिक्षण व्यवस्था को भी पटरी से उतार रही हैं। जहां क्षेत्र के स्कूलों में आज तक पूर्ण संख्या में किताबे नहीं पहुंची हैं, वहीं सैकड़ों स्कूलों में बिल पैंडिंग होने के कारण बिजली के कनेक्शन कट चुके हैं।
यहीं नहीं स्कूलों में मिड डे मील के लिए अनाज भंडारण के पूर्ण इंतजाम नहीं हैं। अब स्कूलों में दूध अंडा परोसे जाने की भी तैयारी चल रही है। युद्ध स्तर पर स्कूलों से गिलासों अन्य बर्तनों की डिमांड मांगी जा रही है। इसके साथ ही किताबें सिलेबस को दरकिनार करके शिक्षा विभाग ने स्कूल खुलते ही जहां मई माह के पेपर बच्चों पर बिना तैयारी के थोप दिये, वहीं अब इसी माह जुलाई मास के पेपर भी होने जा रहे हैं। जिनका सिलेबस तो निश्चित हो गया है, लेकिन छात्रों की तैयारी कितनी है यह किसी ने नहीं सोचा। वहीं, शिक्षकों को कक्षा से दूर रखते हुए एक सप्ताह की एलईपी ट्रेनिंग में भी झोंक दिया गया है। अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जब जुलाई मास में आधा माह तो टेस्ट एलईपी में ही निकल गया तो बाकि बचे मास में अगर अवकाश भी हटा दिये जायें तो कितने दिन शेष बचते हैं।

क्या किसी ने इस ओर भी ध्यान दिया

अधिकारीबड़े चाव से बताते हैं पचास हजार अध्यापकों की बदली होगी, कर दो। किसी का ध्यान इस ओर भी है कि इतनी गर्मी में सरकारी स्कूलों में बिजली पानी की व्यवस्था है या नहीं, किताबें पहुंची या नहीं किसी ने स्कूल में जाकर पूछा क्या आपको पढ़ाने में कोई दिक्कत तो नहीं रही, बच्चों को कोई दिक्कत तो नहीं। बस लगे हुए हैं, बदली करके छोड़ेंगे, बदली करके छोड़ेंगे चाहे किसी को स्कूल में आए छह महीने हुए हों चाहे दस साल, सब असुरक्षित हैं।
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