जागरण संवाददाता, मेवात : आरोही स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए शिक्षा विभाग
एक बार फिर डेपुटेशन का सहारा ले रहा है। जानकारों का मानना है कि इस बार
भी वही गलती दोहराई जा रही है, जो पहले भी दोहराई जा चुकी है। यही कारण है
कि आरोही स्कूलों में शिक्षकों को कमी दूर नहीं हो पा रही है।
डेपुटेशन पर शिक्षक रखने की जो पॉलिसी बनाई गई है, वह पूराने ढर्रे पर ही है। बेहतर होता उसमें कुछ बदलाव कर डेपुटेशन की बात की जाती।
वर्ष 2008 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार के सहयोगी से प्रदेश के दस जिलों के सबसे पिछड़े खंडों में आरोही मॉडल स्कूल की अवधारणा को अमलीजामा पहनाया था। इनका मकसद शिक्षा में पिछड़े खंडों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाकर उन्हें बेहतर शिक्षा प्रदान करना था। इस मकसद से प्रदेश के कुल 36 खंडों में 36 स्कूल खोले गए। लेकिन शुरू से ही इन स्कूलों में शिक्षकों की कमी पूरी नहीं हो पाई है। शिक्षा विभाग के आंकड़े पर गौर करें तो इन स्कूलों में 239 शिक्षकों की कमी है। इसे दूर करने के लिए शिक्षा विभाग समय-समय पर प्रयास करता है, लेकिन ये प्रयास सफल नहीं हो पा रहे हैं। अब एक बार फिर शिक्षा विभाग शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए डेपुटेशन पर शिक्षक तैनात करने की तैयारी कर रहा है। जानकारों की माने तो यह इस बार भी सिरे चढ़ती नहीं दिख रही।
पॉलिसी में यह है खामी :
दरअसल, शिक्षा विभाग ने शिक्षकों से इन स्कूलों में नियुक्ति के लिए आनलाइन आवेदन मांगे हैं। इस आवेदन प्रक्रिया में शिक्षकों को अपनी पसंद के पांच स्कूल भरने हैं। यह पॉलिसी ही शिक्षकों को उलझा रही है। बताया जाता है कि पिछली बार भी पांच मनपसंद केंद्र भरने के विकल्प के कारण ही स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली रह गए थे। बताते हैं अधिकांश शिक्षक पांचों विकल्प भर देते हैं तो उन्हें कहां नियुक्त किया जाए यह स्पष्ट नहीं है। मेवात की बात करें तो मेवात में पांच खंड हैं। शिक्षक पांचों की खंड के स्कूल भर रहे हैं। अब मुसीबत यहां है कि इनमें से यह कैसे तय किया जाए कि किस शिक्षक को कौन से खंड में तैनाती देनी है। जानकारों का कहना है कि इससे बेहतर यह होता है कि प्रदेश में कहीं का भी एक विकल्प मांग लेते। कम से कम ऐसे में कुछ स्कूलों में तो शिक्षकों की कमी को पूरा किया जा सकता था।
..........
शिक्षा निदेशालय का अपना फैसला है। उसमें स्थानीय स्तर पर कुछ नहीं किया जा सकता है। हां, डेपुटेशन पॉलिसी में थोड़ा बदलाव जरूर किया जाना चाहिए। शायद उससे शिक्षकों की कमी को पूरा करने में कहीं मदद मिल जाए।
डा. दिनेश शास्त्री, डीईओ।
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डेपुटेशन पर शिक्षक रखने की जो पॉलिसी बनाई गई है, वह पूराने ढर्रे पर ही है। बेहतर होता उसमें कुछ बदलाव कर डेपुटेशन की बात की जाती।
वर्ष 2008 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार के सहयोगी से प्रदेश के दस जिलों के सबसे पिछड़े खंडों में आरोही मॉडल स्कूल की अवधारणा को अमलीजामा पहनाया था। इनका मकसद शिक्षा में पिछड़े खंडों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाकर उन्हें बेहतर शिक्षा प्रदान करना था। इस मकसद से प्रदेश के कुल 36 खंडों में 36 स्कूल खोले गए। लेकिन शुरू से ही इन स्कूलों में शिक्षकों की कमी पूरी नहीं हो पाई है। शिक्षा विभाग के आंकड़े पर गौर करें तो इन स्कूलों में 239 शिक्षकों की कमी है। इसे दूर करने के लिए शिक्षा विभाग समय-समय पर प्रयास करता है, लेकिन ये प्रयास सफल नहीं हो पा रहे हैं। अब एक बार फिर शिक्षा विभाग शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए डेपुटेशन पर शिक्षक तैनात करने की तैयारी कर रहा है। जानकारों की माने तो यह इस बार भी सिरे चढ़ती नहीं दिख रही।
पॉलिसी में यह है खामी :
दरअसल, शिक्षा विभाग ने शिक्षकों से इन स्कूलों में नियुक्ति के लिए आनलाइन आवेदन मांगे हैं। इस आवेदन प्रक्रिया में शिक्षकों को अपनी पसंद के पांच स्कूल भरने हैं। यह पॉलिसी ही शिक्षकों को उलझा रही है। बताया जाता है कि पिछली बार भी पांच मनपसंद केंद्र भरने के विकल्प के कारण ही स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली रह गए थे। बताते हैं अधिकांश शिक्षक पांचों विकल्प भर देते हैं तो उन्हें कहां नियुक्त किया जाए यह स्पष्ट नहीं है। मेवात की बात करें तो मेवात में पांच खंड हैं। शिक्षक पांचों की खंड के स्कूल भर रहे हैं। अब मुसीबत यहां है कि इनमें से यह कैसे तय किया जाए कि किस शिक्षक को कौन से खंड में तैनाती देनी है। जानकारों का कहना है कि इससे बेहतर यह होता है कि प्रदेश में कहीं का भी एक विकल्प मांग लेते। कम से कम ऐसे में कुछ स्कूलों में तो शिक्षकों की कमी को पूरा किया जा सकता था।
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शिक्षा निदेशालय का अपना फैसला है। उसमें स्थानीय स्तर पर कुछ नहीं किया जा सकता है। हां, डेपुटेशन पॉलिसी में थोड़ा बदलाव जरूर किया जाना चाहिए। शायद उससे शिक्षकों की कमी को पूरा करने में कहीं मदद मिल जाए।
डा. दिनेश शास्त्री, डीईओ।
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