संवाद सहयोगी, कलायत: सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार अतिथि अध्यापकों
को एक बार फिर से स्कूलों में ज्वाइन करवा दिया गया है। स्कूलों में
नियुक्ति मिलने से जहां अतिथि अध्यापकों को रोजगार मिल गया है वहीं राजकीय
स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चों व अभिभावकों के चेहरे खिल उठे हैं।
अब बच्चों को न केवल शिक्षा प्रदान करने के लिए स्कूलों में शिक्षक मिल गए बल्कि विषयगत शिक्षकों की चल रही कमी पर भी किसी हद तक अंकुश लग गया।
कलायत खंड में जिन दर्जनों अतिथि अध्यापकों को सेवानिवृत कर दिया गया था, उनमें से लगभग सभी अध्यापक फिर से उन्हीं स्कूलों में पहुंच गए जिस स्कूल से उन्हें इस शैक्षणिक सत्र के शुरू होने के साथ ही स्कूल से बाहर का रास्ता इकरारनामे के अनुसार दिखा दिया गया था।
खंड कलायत में ज्वाइन करवाए गए अतिथि अध्यापकों के बारे जब खंड शिक्षा अधिकारी महेश चंद से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार शिक्षा विभाग द्वारा जो निर्देश जारी किए गए थे उनकी अनुपालन करते ही अतिथि अध्यापकों को फिर से स्कूलों में तैनात किया गया है।
उन्होंने बताया कि दिसम्बर माह में सरकार द्वारा जारी निर्देशानुसार जिन अतिथि अध्यापकों को स्कूल में तैनात किया गया था उनसे बाकायदा लिखित में लिया गया था कि उनकी सेवाएं राजकीय स्कूलों में 31 मार्च 2016 तक रहेगी। जिस प्रकार से शिक्षा विभाग द्वारा अतिथि अध्यापकों से लिखित में लिया गया था उसी अनुसार तय समय अवधि पूरी होने पर अतिथि अध्यापकों को कार्य से मुक्त कर दिया था।
57 शिक्षक हुए थे सेवामुक्त:
अप्रैल माह में खंड कलायत से 57 अतिथि अध्यापकों को कार्य मुक्त किए जाने के साथ ही लगभग सभी स्कूलों शिक्षकों की कमी इस कद्र सामने आई कि राजकीय स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों की पढ़ाई पर न केवल विपरीत असर पड़ने लगा बल्कि शिक्षकों की कमी पूरा करने के लिए बच्चों व अभिभावकों द्वारा भी सरकार व शिक्षा विभाग से आग्रह किया जाने लगा। कई स्थानों से ग्रामीणों ने इस बार में लिखित तौर पर विभागीय अधिकारियों को पत्र भी सौंपे। ज्यों-ज्यों समय बीत रहा था शिक्षकों की कमी बच्चों के साथ अभिभावकों को भी कचोट रही थी। आज जैसे ही अतिथि अध्यापक स्कूलों में पहुंचे तो न केवल शिक्षकों बल्कि बच्चों के चेहरों पर भी खुशी साफ झलक रही थी।
वर्क लोड के अनुसार ही
कराया जा रहा ज्वाइन:
खंड शिक्षा अधिकारी महेश चंद ने बताया कि कलायत खंड से जिन 57 अतिथि अध्यापकों को कार्य भार से मुक्त किया गया था अब विभागीय निर्देशानुसार ही उन्हें ज्वाइन करवाया जा रहा है। इस कार्य में जहां पारदíशता बरती जा रही है वहीं विभागीय नियमों की पालना भी की जा रही है। लगभग 5 अतिथि अध्यापक ऐसे है जिन्हें खंड कलायत के स्कूलों में तैनात नहीं किया जा सकता जिनके बारे में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को सूचित किया जा चुका है। जिन अतिथि अध्यापकों को यहां तैनात नहीं किया जा सकता उन्हें जिला मुख्यालय द्वारा उस स्थान पर तैनात किया जाएगा जहां अध्यापकों की जरूरत होगी।
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अब बच्चों को न केवल शिक्षा प्रदान करने के लिए स्कूलों में शिक्षक मिल गए बल्कि विषयगत शिक्षकों की चल रही कमी पर भी किसी हद तक अंकुश लग गया।
कलायत खंड में जिन दर्जनों अतिथि अध्यापकों को सेवानिवृत कर दिया गया था, उनमें से लगभग सभी अध्यापक फिर से उन्हीं स्कूलों में पहुंच गए जिस स्कूल से उन्हें इस शैक्षणिक सत्र के शुरू होने के साथ ही स्कूल से बाहर का रास्ता इकरारनामे के अनुसार दिखा दिया गया था।
खंड कलायत में ज्वाइन करवाए गए अतिथि अध्यापकों के बारे जब खंड शिक्षा अधिकारी महेश चंद से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार शिक्षा विभाग द्वारा जो निर्देश जारी किए गए थे उनकी अनुपालन करते ही अतिथि अध्यापकों को फिर से स्कूलों में तैनात किया गया है।
उन्होंने बताया कि दिसम्बर माह में सरकार द्वारा जारी निर्देशानुसार जिन अतिथि अध्यापकों को स्कूल में तैनात किया गया था उनसे बाकायदा लिखित में लिया गया था कि उनकी सेवाएं राजकीय स्कूलों में 31 मार्च 2016 तक रहेगी। जिस प्रकार से शिक्षा विभाग द्वारा अतिथि अध्यापकों से लिखित में लिया गया था उसी अनुसार तय समय अवधि पूरी होने पर अतिथि अध्यापकों को कार्य से मुक्त कर दिया था।
57 शिक्षक हुए थे सेवामुक्त:
अप्रैल माह में खंड कलायत से 57 अतिथि अध्यापकों को कार्य मुक्त किए जाने के साथ ही लगभग सभी स्कूलों शिक्षकों की कमी इस कद्र सामने आई कि राजकीय स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों की पढ़ाई पर न केवल विपरीत असर पड़ने लगा बल्कि शिक्षकों की कमी पूरा करने के लिए बच्चों व अभिभावकों द्वारा भी सरकार व शिक्षा विभाग से आग्रह किया जाने लगा। कई स्थानों से ग्रामीणों ने इस बार में लिखित तौर पर विभागीय अधिकारियों को पत्र भी सौंपे। ज्यों-ज्यों समय बीत रहा था शिक्षकों की कमी बच्चों के साथ अभिभावकों को भी कचोट रही थी। आज जैसे ही अतिथि अध्यापक स्कूलों में पहुंचे तो न केवल शिक्षकों बल्कि बच्चों के चेहरों पर भी खुशी साफ झलक रही थी।
वर्क लोड के अनुसार ही
कराया जा रहा ज्वाइन:
खंड शिक्षा अधिकारी महेश चंद ने बताया कि कलायत खंड से जिन 57 अतिथि अध्यापकों को कार्य भार से मुक्त किया गया था अब विभागीय निर्देशानुसार ही उन्हें ज्वाइन करवाया जा रहा है। इस कार्य में जहां पारदíशता बरती जा रही है वहीं विभागीय नियमों की पालना भी की जा रही है। लगभग 5 अतिथि अध्यापक ऐसे है जिन्हें खंड कलायत के स्कूलों में तैनात नहीं किया जा सकता जिनके बारे में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को सूचित किया जा चुका है। जिन अतिथि अध्यापकों को यहां तैनात नहीं किया जा सकता उन्हें जिला मुख्यालय द्वारा उस स्थान पर तैनात किया जाएगा जहां अध्यापकों की जरूरत होगी।
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