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3000 से ज्यादा दिव्यांग स्टूडैंट्स की थैरेपी के लिए नहीं है थैरेपिस्ट, रुका दिव्यांगों का विकास

चंडीगढ़(रश्मि) : चंडीगढ़ के 112 स्कूलों में एक भी कोच-कम-फिजियो थैरेपिस्ट नहीं है जो डिस्एबल्ड बच्चों को प्रैक्टिस या एक्सरसाइज करवाए। गौरतलब है कि इन सभी स्कूलों में पढऩे वाले डिस्एबलड छात्रों की संख्या 3000 से अधिक है।
इतना ही नहीं, प्रशासन द्वारा दिव्यांगों के लिए शहर के पांच स्कूलों में लाखों खर्च कर एक्सरसाइज मशीनें खरीद कर रखी थी जो 8 माह से धूल ही फांक रही है जिसके चलते न तो छात्र ही इन मशीनों का लाभ उठा पा रहे हैं और न ही एक्सरसाइज कर पा रहे हैं जो कि इनके विकास के लिए रामबाण है। छात्रों की मानें तो वे कई बार इस विषय में लिखकर प्रिंसिपल को भी दे चुके हैं।

वेतन में देरी के चलते नौकरी छोड़ गए थैरेपिस्ट :
पहले शहर के 5 स्कूलों में कोच-कम-फिजियो थैरेपिस्ट रखे गए थे लेकिन उन्हें जब शिक्षा विभाग द्वारा वेतन बढ़ाना तो दूर की बात तनख्वाह देने में भी देरी होती देखी तो 5 में से 4 कोच-कम-फिजियो थैरेपिस्ट्स ने नौकरी  ही छोड़ दी जबकि उनमें से एक सब कुछ ठीक होने की आस में लगातार दो साल तक तनख्वाह न मिलने के बाद भी अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे। लेकिन 31 मार्च, 2016 में जी.एम.एस.एस.एस. सैक्टर-37बी के डिस्एबल छात्रों को कोचिंग व ट्रेनिंग देने वाले कोच-कम-फिजियो थैरेपिस्ट प्रदीप कुमार को शिक्षा विभाग द्वारा रिलीव कर दिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार कोच को रिलीव करने का कारण स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री से फंड न आना बताया जा रहा है। जिसका हर्जाना स्कूलों में पढऩे वाले डिस्एबल्ड छात्रों को उठाना पड़ रहा है।

प्रधानमंत्री को भेजा जा चुका है पत्र :
शिक्षा विभाग द्वारा रिलीव किए जा चुके कोच-कम-फिजियो थैरेपिस्ट प्रदीप ने बताया वे यू.टी. कैडर एजुकेशनल इम्पलाइज यूनियन के साथ मिलकर प्रधानमंत्री से लेकर स्मृति ईरानी को पत्र भी लिख चुके हैं, इसके साथ-साथ पूर्व एडवाइजर विजय देव, एडवाइजर परिमल राय से भी इस बारे में जाकर मिल चुके हैं लेकिन अभी तक इसका कोई हल नहीं निकाला गया है। यूनियन के प्रधान स्वर्ण सिंह कंबोज ने बताया कि वह इस मुद्दे को लेकर अप्रैल माह में ही डी.पी.आई. रूबिंदरजीत सिंह बराड़ से भी मिलकर पत्र दिया था। जिसे डी.पी.आई. द्वारा डिप्टी डायरैक्टर एडल्ट एजुकेशन -2 सुमन शर्मा को मार्क कर दिया था। जब इस बारे में यूनियन द्वारा सुमन शर्मा से बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता जताई गई तो उन्होंने बताया कि स्कूलों में तैनात स्पोर्ट्स शिक्षक ही इन बच्चों को अब कोङ्क्षचग व एक्सरसाइज करवाएंगे। जबकि वहीं स्पोर्ट्स के शिक्षकों का कहना है कि डिस्एबल बच्चों को कोङ्क्षचग देना या एक्सरसाइज कराना उनके लिए पोसिबल ही नहीं है। कोई फिजियो थैरेपिस्ट ही उन्हें करवाने में संभव है।

नैशनल गेम्स में भाग लेने से रहे महरूम :
अभी हाल ही में ग्रीड द्वारा डिस्एबल्स के लिए चंडीगढ़ नैशनल गेम्स आयोजित की गई थी, जिसमें कोच न होने के कारण मेजबानी कर रहे चंडीगढ़ का एक भी स्टूडैंट हिस्सा नहीं ले पाया था। कोच-कम-फिजियो थैरेपिस्ट की पोस्ट सें रिलीव किए गए प्रदीप ने बताया कि बहुत से डिस्एबल बच्चे ऐसे हैं जो खेलकूद में बेहतर परफॉर्म कर सकते है जिन्हें कोचिंग की जरूरत है जो नहीं मिल पा रही, सही मार्गदर्शन के अभाव में स्टूडैंट नैशनल गेम्स में हिस्सा लेने से भी वंचित रह गए। प्रदीप का कहना है कि उनका मकसद खुद को उक्त पद पर नियुक्त करवाना नहीं है, बल्कि वह चाहते है कि बच्चों को थैरेपी व कोचिंग मिले चाहे देने वाला कोई भी हो।


इन पांच स्कूलों में मशीनें फांक रहीं धूल :
गवर्नमैंट मॉडल सीनियर सैकेंडरी स्कूल-37बी
गवर्नमैंट मॉडल सीनियर सैकेंडरी स्कूल-19
गवर्नमैंट मॉडल सीनियर सैकेंडरी स्कूल-रायपुर खुर्द
गवर्नमैंट सीनियर सैकेंडरी स्कूल, मलोया
ब्लाइंड इंस्टीच्यूट सैक्टर-26

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