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डाटा ऑनलाइन नहीं होने पर रूक सकता नवंबर का वेतन

जागरण संवाददाता, जींद : काफी संख्या में शिक्षकों का एचआरएमएस में डाटा ऑनलाइन नहीं होने के कारण नवंबर का वेतन रूक सकता है। डाटा ऑनलाइन करने की अंतिम तारीख 30 नवंबर है। ज्यादातर सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर व इंटरनेट की व्यवस्था नहीं होने के कारण अध्यापकों को बाहर दुकानों पर 500 से एक हजार रुपये देकर डाटा ऑनलाइन करवाना पड़ रहा है।

शिक्षा विभाग ने दो महीने पहले शिक्षकों को हयुमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (एचआरएमएस) पर डाटा फीड करने के आदेश दिए थे। लेकिन अभी भी करीब 10 फीसदी शिक्षकों का डाटा फीड नहीं हुआ है। वहीं शिक्षकों का आरोप है कि डीडीओ एचआरएमएस पर डाटा फीड करवाने के नाम पर शिक्षकों से 400 से 500 रुपये ले रहे हैं। शिक्षकों पर दबाव बनाया जा रहा है कि अगर डाटा दर्ज नहीं हुआ तो वेतन नहीं निकल पाएगा। विभाग ने डाटा ऑनलाइन नहीं होने के चलते शिक्षकों का सितंबर का वेतन रोक दिया था, लेकिन बाद में त्योहारी सीजन होने के चलते दिवाली पर सभी का वेतन जारी कर दिया गया था।
ये आ रही हैं परेशानी
-काफी स्कूलों में कंप्यूटर व इंटरनेट की व्यवस्था नहीं है।
-गांवों में दिन के समय बिजली नहीं रहती है, जिससे ग्रामीण स्कूलों में इंटरनेट व कंप्यूटर नहीं चल पाते।
-एचआरएमएस में डाटा ऑनलाइन करने की जिम्मेदारी डीडीओ की है, लेकिन ज्यादातर को इंटरनेट व कंप्यूटर का ज्ञान नहीं है।
-जिले में 49 सिम (स्कूल सूचना प्रबंधक) लगाए हैं, जिन पर कई स्कूलों का कार्यभार है।
खुद की दुकान चला रहे सिम
एचआरएमएस में डाटा ऑनलाइन करने की प्रक्रिया में काफी समय लगता है, जिसकी जानकारी कुछ ही लोगों को है। स्कूलों में जो सिम लगे हुए हैं, उनमें से कुछ अपनी खुद की कंप्यूटर की दुकान खोले हुए हैं। वे स्कूलों में डाटा ऑनलाइन करने की बजाय स्कूल समय के बाद अपनी दुकान पर इस काम की एवज में पैसे लेते हैं। वहीं कई डीडीओ के परिचित की कंप्यूटर की दुकान है, जिन पर स्कूल से संबंधित सारा ऑनलाइन काम होता है।
इतनों का डाटा हुआ ऑनलाइन
--कक्षा प्रथम से आठ तक जिले में लगभग 3689 का स्टाफ है, जिसमें टी¨चग स्टाफ व नॉन टी¨चग स्टाफ शामिल है। इनमें से 3298 का डाटा एचआरएमएस में ऑनलाइन हुआ है। वहीं 391 का डाटा ऑनलाइन होना बाकी है।
--कक्षा नौ से 12 तक लगभग 2028 का स्टाफ है, जिसमें टी¨चग व नॉन टी¨चग स्टाफ शामिल है। इनमें से 1818 का डाटा एचआरएमएस में ऑनलाइन हुआ है, जबकि 210 का डाटा ऑनलाइन होना बाकी है।
ये भरनी हैं जानकारी
--फाइनेंसियल अपग्रेडेशन, जिसमें सारे पेय कमीशन व सालाना वेतन वृद्धि की जानकारी देनी है।
--परिवार की डिटेल, जिसमें बच्चे किस कक्षा में पढ़ रहे हैं, उनके आधार नंबर व जन्म प्रमाण पत्र, शादी संबंधी पूरी जानकारी, सामान्य श्रेणी से गोत्र एवं जाति की पूरी जानकारी ली जाएगी। जबकि पिछड़ा एवं अनुसूचित जाति वर्ग से इस प्रकार का कोई डाटा नहीं लिया जा रहा।
--जितने भी प्रमोशन हुए हैं, उसकी पूरी जानकारी। किस समय प्रमोशन हुई और कहां-कहां हुई।
--किस विद्यालय में किस समय जॉइन किया, इसमें पूर्व दोपहर व दोपहर बाद का भी जिक्र करना होगा।
--ली गई छुट्टियों की पूरी जानकारी, महिलाओं के लिए सीसीएल एवं बच्चे के जन्म पर ली गई छुट्टी की पूर्ण जानकारी उपलब्ध करवानी है।
--एलटीसी (लीव ट्रेवल अलाउंस) की पूर्ण जानकारी, कब-कब कितनी ली गई, उसकी पूरी जानकारी देनी होगी।
--सेवा में आने से पूर्व की शिक्षा एवं कार्य ग्रहण करने के बाद ली गई शिक्षा की पूर्ण जानकारी समयबद्ध तरीके से भरनी।
--आश्रितों की जानकारी, जिसमें परिवार में यदि कोई बीमार है, उसकी बीमारी का जिक्र करते हुए पूरी जानकारी भरनी है।
--ऋण संबंधी एवं प्रॉपर्टी की पूर्ण जानकारी भी एचआरएमएस में उपलब्ध करानी है।
--परिवार के सभी सदस्यों के ब्लड ग्रुप की जानकारी।
--भाषा संबंधी जानकारी, कर्मचारी कौन-कौन सी भाषा जानता है और धर्म कौन सा है, इसकी जानकारी।
पूरी सर्विस को स्कैन करके एवं अब तक एसीआर व एपीआर को स्कैन करके डाटा इसमें सेव करना है।
वर्जन
एचआरएमएस में डाटा ऑनलाइन करने का काम डीडीओ का है, लेकिन इसके बावजूद इस कार्य को शिक्षकों से पैसे लेकर बाहर करवाया जा रहा है। इससे विभाग की गोपनीयता व डाटा लीक होने के कारण आगे चलकर इसके गंभीर परिणाम होंगे।
राजेश खर्ब, प्रदेश कोषाध्यक्ष, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ।
वर्जन
एचआरएमएस में डाटा ऑनलाइन करने में जींद जिला काफी जिलों से आगे है। ज्यादातर स्कूलों में डाटा ऑनलाइन किया जा चुका है, कुछ का बचता है, जो जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। डीडीओ द्वारा पैसे लिए जाने संबंधी किसी शिक्षक की शिकायत उनके पास नहीं आई है। अगर ऐसी कोई दिक्कत है, तो जांच की जाएगी।

सत्यवती नांदल, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, जींद।

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