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नई रेगुलर नीति पर फूटा अध्यापकों का गुस्सा, सांझा अध्यापक मोर्चा ने घेरा जिलाधीश कार्यालय

श्री मुक्तसर साहिब(तनेजा): सांझा अध्यापक मोर्चा पंजाब के आह्वान पर आज पंजाब सरकार द्वारा अध्यापकों के मसलों तथा कच्चे अध्यापकों को रेगुलर करने के लिए अपनाई जा रही अध्यापक विरोधी नीति खिलाफ अपने गुस्से का इजहार करते हुए शहर में रोष रैली की व जिलाधीश कार्यालय तक रोष मार्च किया।


एकत्रित अध्यापकों को संबोधित करते हुए मोर्चो के नेताओं कुलविन्दर सिंह मलोट, लखवीर सिंह हरीके, गुरनैब सिंह तथा सुदर्शन जग्गा ने कहा कि पंजाब के इतिहास में यह पहली बार है कि पंजाब की कैप्टन सरकार अपने नादरशाही फैसलों से शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों व अध्यापकों का भविष्य तबाह करने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में शैक्षिक सुधारों के नाम पर अध्यापक वर्ग को बिना कारण तंग परेशान करने, निजीकरण की नीतियाों को लागू करने तथा अध्यापकों को अलग-अलग वर्गों में बांट कर शैक्षिक माहौल को निरंतर खराब किया जा रहा है। रोष रैली को संबोधित करते हुए हरजीत सिंह, दलजिन्दर सिंह, अमर सिंह, मनोहर लाल शर्मा, बूटा सिंह वाकिफ व सुभाष चन्द्र ने कहा कि पंजाब के अध्यापक सरकार के ऐसे अध्यापक तथा विद्यार्थी विरोधी फैसलों को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।

उन्होंने कहा कि 10300 रुपए के साथ तीन वर्ष के परख काल समय की शर्त के खिलाफ मोर्चे की तरफ से जल्दी ही राज्य स्तरीय तीव्र संघर्ष किया जाएगा। वक्ताओं ने शिक्षा विभाग में कार्य करते कम्प्यूटर अध्यापकों, 5178 के अध्यापकों, एस.एस.ए/रमसा कर्मचारियों, कार्यालय कर्मचायिों तथा माडल स्कूलों में कार्य करते अध्यापकों सहित प्रत्येक वर्गों के कर्मचारियों को बिना शर्त पूरा वेतन स्केल पर रेगुलर करने की मांग करते हुए कहा कि नई तबादला नीति, रैशनेलाईजेशन की नीति रद्द करने, अध्यापकों से गैर शैक्षानिक कार्य लेने बंद करने, डी.ए. की किश्तों के बकाया का तुरंत नकद भुगतान करना, 15 प्रतिशत अंतरिम राहत तुरंत जारी करने, प्राईमरी स्कूलों के अध्यापकों की पिछले दो माह से रूके वेतन तुरंत जारी करने, स्कूलों में शैक्षानिक माहौल बनाना, शिक्षा विभाग में नादरशाही फरमानों पर पाबंदियां लगाए जाने की मांग की गई। नेताओं ने शहर में रोष मार्च करते जिलाधीश कार्यालय के समक्ष जोरदार नारेबाज़ी की तथा प्रशासनिक आधिकारियों को मांग पत्र सौंपा। वक्ताओं ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि सरकार अध्यापक विरोधी नीतियों से बाज न आई तो अध्यापक राज्य स्तरीय संघर्ष शुरू कर गांव स्तर तक ले कर जायेगें।

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