सूबे के सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में शिक्षा विभाग की तरफ से लगाए गए
बायोमैट्रिक सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं। हैरानी ये है कि सिस्टम से कोई
भी टीचर घर बैठे ही हाजिरी लगा सकता है। बस, उसके पास एनड्राॅयड फोन, फिंगर
स्कैनर और स्कूल का यूजर नेम और पासवर्ड होना चाहिए। चर्चा ये भी है कि ये
सिस्टम फेल हो गया है।
टीचर्स की लेटलतीफी और फरलो को कंट्रोल करने के लिए मार्च 2018 में
पूरे पंजाब के सैकड़ों स्कूलों में बायोमैट्रिक मशीनंे भेजी गईं। शिक्षा
विभाग ने ‘ई-पंजाब हाजिरी’ नाम से मोबाइल एप बनाया। उसमें टीचर्स का आधार
डाटा अपलोड कर दिया गया और हर एक स्कूल को एक यूजर नेम और पासवर्ड दे दिया
गया। यह एप स्कूल मुखी के साथ-साथ तीन चार सीनियर टीचर्स के मोबाइल में
इंस्टाल कर दिया गया। स्कूल पहंुचने पर इस एप में यूजर नेम और पासवर्ड भरकर
स्कूल में जितने भी टीचर हैं उनकी हाजिरी लगाई जाती है। गवर्नमेंट टीचर
यूनियन होशियारपुर के अध्यक्ष प्रिंसिपल अमनदीप शर्मा ने कहा, सरकार ने
टीचर्स की कार्यप्रणाली पर शक किया है। इससे पहले भी सभी टीचर टाइम पर
स्कूल आ रहे हैं। लेट वही होता है जिसे रास्ते में कोई दिक्कत हो। शर्मा ने
कहा, सरकार ने टीचर्स पर ही ऐसा सिस्टम क्यों लागू किया जबकि पंजाब के
तमाम विभागों में ऐसा सिस्टम नहीं है। चंडीगढ़ के तमाम दफ्तरों में भी ये
सिस्टम नहीं है। अगर यही पैसा स्कूलों की बेहतरी पर लगाया जाता तो काफी
फायदा होता।
सवाल
‘ई पजाब हाजिरी’ एप के साथ कई टीचर्स के मोबाइल पर थम स्कैनर भी, यूजर नेम व पासवर्ड भी है मालूम
लेटलतीफी रोकने के लिए सरकारी स्कूलों में मार्च में इंस्टाल की थी मशीनें
हफ्ते बाद ही तोड़ निकाल लिया | एक टीचर ने नाम गुप्त रखने की शर्त
पर बताया, सिस्टम के लागू होने के हफ्ते बाद ही तोड़ भी निकाल लिया गया और
कई टीचर्स ने बाजार में एक हजार रुपए में मिलने वाले थम स्कैंनर खरीद लिए।
‘ई-पंजाब हाजिरी’ एप डाउनलोड कर लिया। साथ ही यूजर नेम और पासवर्ड यूज कर
कहीं से भी हाजिरी लगानी शुरू कर दी। बता दें, यूजर नेम और पासवर्ड स्कूल
मुखी के पास होता है। उसके जाने के बाद इसे अगले टीचर को देना होता है।
जिसकी वजह से ये यूजर नेम हर टीचर को पता चल जाता है। कोई भी टीचर स्कूल
मुखी के साथ मिलकर कहीं भी अपनी हाजिरी लगा सकता है। इसके चलते ये सिस्टम
फेल है।
सरवर भी डाउन रहता है
टीचर के मुताबिक सुबह 7.30 से 8 बजे तक हजारों टीचर्स के हाजिरी
लगाने से ये एप अकसर डाउन रहता है। कई टीचर्स की हाजिरी भी रह जाती है। ऐप
का डाटा महीने के आखिर में स्कूल पहुंचेगा तो हाजिरी को लेकर सारा मामला ही
गड़बड़ा जाएगा और वेतन भी कट सकता है।