5178 अध्यापक यूनियन की ओर से अपनी मांगों को लेकर शहर में मशाल मार्च
निकाला गया। इस दौरान अध्यापकों ने हाथों में मशाल, मोमबत्तियां व बैनर
लेकर नारेबाजी की।
मशाल मार्च में अध्यापकों के साथ-साथ उनके परिजनों ने भी
हिस्सा लिया। इस मौके पर जिला प्रधान करमजीत सिंह ने कहा कि 5178 अध्यापक
ईटीटी का टेस्ट पास करने व पूरी योग्यता के बाद नवंबर 2014 में तीन वर्ष के
ठेके की शर्त और उसके बाद पूरे वेतन की शर्त पर भर्ती हुए थे। उनका तीन
वर्ष का समय नवंबर 2017 में पूरा हो चुका है। 9 महीन अधिक बीत जाने के बाद
भी सरकार उन्हें रेगुलर नहीं कर रही है। अब पंजाब सरकार द्वारा इन
अध्यापकों को दिया जाने वाला 6 हजार रुपए का वेतन भी बंद कर दिया गया है।
जिस कारण अध्यापकों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। अध्यापकों के
पास राखी का त्योहार मनाने के लिए भी पैसे नहीं है, बहुत सारे अध्यापकों
पर लाखों रुपए का कर्ज चढ़ चुका है। इन हालातों में 5178 अध्यापकों ने
आत्महत्या करने की बजाए संघर्ष का रास्ता अपनाया है। उन्होंने ऐलान किया कि
जब तक सरकार उन्हें पूरे वेतन पर रेगुलर नहीं करेगी तब तक वह संघर्ष जारी
रखेंगे। उन्होंने मांग की कि 5178 अध्यापकों को पूरे पे स्केल पर तुरंत
रेगुलर किया जाए। इस मौके पर हरजिंदर फग्गूवाला, जगदीप अमरगढ़. शिवाली
लहरा, कुलजीत सिंह, सुमनप्रीत, विकास, कश्मीर सिंह आदि उपस्थित थे।