पंचकूला के सरकारी स्कूलों में अब फर्जी दाखिले नहीं होंगे और न ही स्टूडेंट्स को मिलने वाले अनुदान में धांधली होगी। ऐसे मामलों पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए शिक्षा विभाग ने स्टूडेंट्स और शिक्षकों का डाटा ऑनलाइन करने का फैसला किया है। शिक्षा विभाग स्टूडेंट्स और शिक्षकों से जुड़ा हर डाटा ‘एमआईएस’ पोर्टल पर आनलाइन करेगा।
स सुविधा से बच्चों के दाखिले से लेकर विभिन्न स्कीम के तहत मिलने वाले अनुदान में पारदर्शिता भी आएगी। इसके अलावा सरकारी स्कूलों में प्रवेश करने वाले बच्चों का आनलाइन रिकॉर्ड प्रतिदिन अपडेट होगा। पहली से बारहवीं तक के एडमिशन को भी आनलाइन किया जाएगा। वहीं यदि कोई स्टूडेंट्स बीच में पढ़ाई छोड़ता है तो स्कूल को इसकी सूचना मासिक रिपोर्ट में देनी होगी। ऐसे में स्टूडेंट्स की ऑनलाइन जानकारी उपलब्ध होने से पहचान हो सकेगी, जिनका नाम दो-दो स्कूलों में चल रहा है।
स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट भी ऑनलाइन: अब स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट (एसएलसी) भी छात्रों को ऑनलाइन मिलेगा। इसके लिए नए सिरे से एसआरएन जारी होगा। जिन छात्रों का पंजीकरण नंबर (एसआरएन) जारी नहीं किया गया है। उन्हें नए दोबारा एमआईएस में रिकार्ड दर्ज करना होगा। छात्र और अभिभावक एमआईएस पोर्टल पर उपलब्ध आनलाइन सुविधा का उपयोग कर सकते हैं।
सैकड़ों फर्जी एडमिशन के बाद विभाग ने लिया संज्ञान: वर्ष 2014-15 के सेशन में जांच के दौरान सैकड़ों फर्जी एडमिशन पाए थे। जिसकी रिपोर्ट शिक्षा विभाग को भेजी गई थी। शिक्षा विभाग ने इन्हीं फर्जी दाखिलों पर संज्ञान लेते हुए यह फैसला किया है।
स्कूलों में जिन स्टूडेंटों के फर्जी एडमिशन होते हैं वह या तो प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे होते हैं या फिर एक ही छात्र का दो स्कूलों में दाखिला दिखाया जाता है। ऐसे स्टूडेंट्स के नाम पर मिड डे मिल, ड्रेस और स्टेशनरी आदि का खर्च विभाग भेजता है, लेकिन इस खर्च को स्कूल प्रशासन इधर-उधर कर देता है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फर्जी एडमिशन की शिकायतें काफी मिलीं थीं।
सावित्री सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी, पंचकूला ने बताया कि अब स्टूडेंट्स गवर्नमेंट स्कूलों में ऑनलाइन दाखिला करवा सकते हैं। इसके अलावा स्कूलों में होने वाले फर्जी एडमिशन से लेकर स्टूडेंट्स को मिलने वाले अनुदान में पारदर्शिता आएगी। अब स्कूल शिक्षकों का ऑनलाइन डाटा भी पोर्टल पर मिलेगा। इस पर काम अभी चल रहा है।
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स सुविधा से बच्चों के दाखिले से लेकर विभिन्न स्कीम के तहत मिलने वाले अनुदान में पारदर्शिता भी आएगी। इसके अलावा सरकारी स्कूलों में प्रवेश करने वाले बच्चों का आनलाइन रिकॉर्ड प्रतिदिन अपडेट होगा। पहली से बारहवीं तक के एडमिशन को भी आनलाइन किया जाएगा। वहीं यदि कोई स्टूडेंट्स बीच में पढ़ाई छोड़ता है तो स्कूल को इसकी सूचना मासिक रिपोर्ट में देनी होगी। ऐसे में स्टूडेंट्स की ऑनलाइन जानकारी उपलब्ध होने से पहचान हो सकेगी, जिनका नाम दो-दो स्कूलों में चल रहा है।
स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट भी ऑनलाइन: अब स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट (एसएलसी) भी छात्रों को ऑनलाइन मिलेगा। इसके लिए नए सिरे से एसआरएन जारी होगा। जिन छात्रों का पंजीकरण नंबर (एसआरएन) जारी नहीं किया गया है। उन्हें नए दोबारा एमआईएस में रिकार्ड दर्ज करना होगा। छात्र और अभिभावक एमआईएस पोर्टल पर उपलब्ध आनलाइन सुविधा का उपयोग कर सकते हैं।
सैकड़ों फर्जी एडमिशन के बाद विभाग ने लिया संज्ञान: वर्ष 2014-15 के सेशन में जांच के दौरान सैकड़ों फर्जी एडमिशन पाए थे। जिसकी रिपोर्ट शिक्षा विभाग को भेजी गई थी। शिक्षा विभाग ने इन्हीं फर्जी दाखिलों पर संज्ञान लेते हुए यह फैसला किया है।
स्कूलों में जिन स्टूडेंटों के फर्जी एडमिशन होते हैं वह या तो प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे होते हैं या फिर एक ही छात्र का दो स्कूलों में दाखिला दिखाया जाता है। ऐसे स्टूडेंट्स के नाम पर मिड डे मिल, ड्रेस और स्टेशनरी आदि का खर्च विभाग भेजता है, लेकिन इस खर्च को स्कूल प्रशासन इधर-उधर कर देता है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फर्जी एडमिशन की शिकायतें काफी मिलीं थीं।
सावित्री सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी, पंचकूला ने बताया कि अब स्टूडेंट्स गवर्नमेंट स्कूलों में ऑनलाइन दाखिला करवा सकते हैं। इसके अलावा स्कूलों में होने वाले फर्जी एडमिशन से लेकर स्टूडेंट्स को मिलने वाले अनुदान में पारदर्शिता आएगी। अब स्कूल शिक्षकों का ऑनलाइन डाटा भी पोर्टल पर मिलेगा। इस पर काम अभी चल रहा है।
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