शहर के आनंदपुर की रहने वाली एक बुजुर्ग महिला पिंकी देवी ने मुख्यमंत्री
कैप्टन अमरिंद्र सिंह को शिकायत पत्र भेजकर शिक्षा विभाग पर जांच लटकाने के
आरोप लगाए हैं। बताते चलें कि कम मेरिट वाले शिक्षकों को ज्वाइन करवाने के
मामले में राज्य सरकार ने विभाग को जांच के आदेश दिए थे।
आनंदपुर निवासी
पिंकी देवी के बेटे वरुण ने 1 फरवरी 2010 को सरकारी विज्ञापन के अनुसार 167
नेत्रहीन/आंशिक नेत्रहीन टीचर भर्ती के लिए अप्लाई किया था। 16 सितंबर
2011 को आरटीआई कमिशन की रिपोर्ट में उक्त भर्ती किए उम्मीदवारों के अंक
वरुण द्वारा प्राप्त अंकों 65.6 से कम थे। उनका आरोप था कि एक जुलाई 2011
से सूबे में भर्ती में टीईटी पास होने की शर्त लागू की गई थी, लेकिन शिक्षा
विभाग के अधिकारियों ने 1 मार्च 2010 से 30 जून 2011 के बीच अपने चहेतों
को शिक्षक भर्ती कर लिया। नेत्रहीन/आंशिक नेत्रहीन की भर्ती में सिलेक्ट
कैंडिडेट सामान्य हैं और नेत्रहीन नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी
ओर से शिकायत के बावजूद सरकार और शिक्षा विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की।
शिकायतकर्ता ने बताया कि 3 मार्च 2014 को नेत्रहीन/आंशिक नेत्रहीन
ईटीटी उपलब्ध न होने के कारण इन पोस्टों को सामान्य में तबदील करने का
पब्लिक नोटिस जारी कर दिया गया। 12 अक्टूबर 2016 को राष्ट्रपति को लिखे
पत्र के जवाब में सरकार ने वरुण को काउंसिलिंग के लिए कमेटी के सामने पेश
होने के लिए मौका देने के बावजूद हाजिर न होने की बताकर अपना पल्ला झाड़
लिया। उनका कहना था कि उन्हें कमेटी के सामने पेश होने के लिए कोई पत्र
नहीं मिला। इसकी शिकायत उन्होंने मानव अधिकार आयोग से की थी। इसके बाद
पंजाब सरकार की ओर से 23 मार्च 2018 को डायरेक्टर शिक्षा विभाग को सारे
मामले की पड़ताल कर 15 दिन में रिपोर्ट मांगी थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि
डेढ़ महीने गुजरने के बाद भी रिपोर्ट तैयार नहीं की गई है। उन्हाेंने सीएम
से कार्रवाई की मांग की है।