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9455 जेबीटी टीचर्स की नियुक्ति का इंतजार और बढ़ा

भर्ती संबंधी हार्ड डिस्क की जांच को सीएफएसएल ने मांगा और समय
हाईकोर्ट ने 6 अक्टूबर तक दिया समय, अगली सुनवाई 7 को
चंडीगढ़ : प्रदेश में पिछले साल से नियुक्ति पत्र की बाट जोह रहे 9455 जेबीटी टीचरों का इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ है। इस मामले में पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट से चंडीगढ़ सीएफएसएल ने जेबीटी टीचरों की भर्ती संबंधी हार्ड डिस्क और कंप्यूटर की जांच के लिए कुछ और समय की मांग की। जस्टिस दीपक सिब्बल ने दो सप्ताह का समय देते हुए मामले पर अगली सुनवाई 7 अक्टूबर तय कर दी।
हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार से 9455 जेबीटी टीचरों की भर्ती से संबंधी कंप्यूटर हार्ड डिस्क और कंप्यूटर की जांच का जिम्मा चंडीगढ़ सीएफएसएल लैब को सौंपा था। हाईकोर्ट यह जानना चाहता है कि इन कंप्यूटरों में कब-कब डाटा फीड किया गया और उसमें कितनी बार संशोधन किया गया। हाईकोर्ट ने जांच का यह फैसला राज्य सरकार द्वारा इस मामले में वास्तविक रिकार्ड पेश कर पाने में असमर्थ रहने पर लिया है। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रोग्रामर सविता और राज्य कर्मचारी चयन आयोग को भी इस जांच में सीएफएसएल को सहयोग करने के निर्देश जारी किए थे। हाईकोर्ट के आदेश पर कर्मचारी चयन आयोग के सचिव महावीर कौशिक और पूर्व अध्यापक चयन आयोग की प्रोग्रामर सविता ने हलफनामा दायर कर दावा किया था कि परीक्षार्थियों को अंक देने में कोई धांधली नहीं हुई है। हाईकोर्ट ने दोनों हलफनामों पर असहमति जताते हुए भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कंप्यूटर हार्ड डिस्क और कंप्यूटर की जांच चंडीगढ़ सीएफएसएल को सौंपते हुए जेबीटी टीचरों को नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा दी थी।
यह है मामला
एमए पास एक अभ्यर्थी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि हरियाणा सरकार के नियमों के अनुसार चयन प्रक्रिया के दौरान उसे शैक्षणिक योग्यता के अतिरिक्त दो अंक मिलने चाहिए थे, लेकिन जेबीटी भर्ती के समय उन्हें शैक्षिक योग्यता में तो यह लाभ दिया गया, लेकिन इंटरव्यू के दौरान कुल अंकों में से उनके दो अंक काट लिए गए, जिसके चलते वह चयन से वंचित रह गया। इस मामले पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के आदेश पर राज्य कर्मचारी चयन आयोग के सचिव महावीर कौशिक ने हलफनामा दायर कर कहा कि भर्ती परिणाम की पीडीएफ फाइल को अंतिम रूप देने से पहले आयोग द्वारा उसकी जांच की गई थी, लेकिन परिणाम को वेबसाइट पर लोड किए जाने के बाद यह गलती सामने आई कि एमए पास के लिए जो अतिरिक्त 2 अंक इंटरव्यू में दिए जाने थे, वह गलती से अकादमी अंकों में जोड़ दिए गए हैं। महावीर कौशिक ने दावा किया कि इस गलती के बावजूद अभ्यर्थी के कुल अंक कम नहीं हुए थे।
इसी तरह प्रोग्रामर सविता ने भी अपने हलफनामे में कहा कि भर्ती परिणाम अपलोड करते एमए पास अभ्यर्थियों के अंकों में अतिरिक्त 2 अंक नहीं जोड़े गए, लेकिन यह 2 अंक कुल अंकों में जोड़ दिए गए थे। जब फाइनल रिजल्ट तैयार किया गया, तब भी फार्मूला गलती के कारण एमए पास अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में अतिरिक्त 2 अंक नहीं जोड़े गए, लेकिन बाद में गलती को सुधार लिया गया था, जिससे कुल अंकों में कोई कटौती नहीं हुई।                           


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