आठवीं कक्षा तक बच्चे को फेल न करने की पॉलिसी पर केजरीवाल ने उठाए सवाल
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नई दिल्ली : राजधानी में नो डिटेंशन पॉलिसी यानी आठवीं कक्षा तक
बच्चे को फेल न करने की पॉलिसी खत्म करने के लिए दिल्ली सरकार विधानसभा
सत्र में प्रस्ताव लाएगी। मंगलवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने
संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि जिस समय यह पॉलिसी बनी शायद इसकी जरूरत
रही होगी, लेकिन अब यह पॉलिसी बच्चों के भविष्य के लिए बेहतर नहीं रह गई
है।
तमाम ऐसी रिपोर्ट सामने आईं हैं जिसमें कहा गया है कि पांचवीं कक्षा तक के बच्चे को अच्छी तरह से गणित के सवाल नहीं आते और न ही वह ठीक ढंग से वाक्यों का उच्चारण ही कर पाते हैं। जबकि नौवीं कक्षा में जाते ही उन पर पढ़ाई का इतना बोझ होता है कि वह फेल हो जाते हैं।
तमाम ऐसी रिपोर्ट सामने आईं हैं जिसमें कहा गया है कि पांचवीं कक्षा तक के बच्चे को अच्छी तरह से गणित के सवाल नहीं आते और न ही वह ठीक ढंग से वाक्यों का उच्चारण ही कर पाते हैं। जबकि नौवीं कक्षा में जाते ही उन पर पढ़ाई का इतना बोझ होता है कि वह फेल हो जाते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि
सरकार ने इसे बदलने का फैसला लिया है। विधानसभा सत्र में प्रस्ताव लाकर
इसे पास कर केंद्र को भेज दिया जाएगा। गौरतलब है कि मानव संसाधन विकास
मंत्रलय द्वारा गठित की गई गीता भुक्कल समिति की सिफारिशों को आधार बनाकर
इस कानून में बदलाव की तैयारी की गई थी। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री
स्मृति ईरानी ने एक महीने का समय निर्धारित करते हुए सभी राज्यों से इस
बाबत लिखित में सुझाव मांगा था। आरटीई लागू होने के तीन साल बाद 2013 की
रिपोर्ट के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि कक्षा
तीन में पढ़ने वाले 60 फीसद बच्चे पहली कक्षा की किताब नहीं पढ़ पाते हैं।
इसमें सरकारी स्कूलों की स्थिति और भी चिंताजनक है।
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