हरियाणा शिक्षा विभाग की ओर से आगामी 29 मई को 3336 पदों के लिए आयोजित की जाने वाली भर्ती परीक्षा पर पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने कंप्यूटर शिक्षकों की नियमित भर्ती न किए जाने पर भी हरियाणा सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। इस मामले की अगली सुनवाई 5 जुलाई को होगी।
मंगलवार को जस्टिस दीपक सिब्बल की अदालत में सुनवाई के दौरान कंप्यूटर शिक्षकों के वकील नरेंदर हुड्डा ने कांट्रैक्ट कंप्यूटर शिक्षकों का पक्ष रखते हुए कहा कि शिक्षा विभाग कांट्रैक्ट कंप्यूटर शिक्षकों को हटाकर आगामी 29 मई को होने जा रही भरती परीक्षा के जरिए कांट्रैक्ट शिक्षकों को ही भर्ती करने जा रहा है।
सरकार की ओर से कोर्ट में मौजूद एडवोकेट हरीश राठी ने शिक्षा विभाग की भरती प्रक्रिया को सही ठहराने का प्रयास करते हुए बताया कि पूर्व में भरती किए गए कंप्यूटर शिक्षकों को जिस शैक्षिक योग्यता, चयन मापदंड और प्रक्रिया के तहत रखा गया था, उससे बिल्कुल अलग तरीके से नई भरती की जाएगी, लेकिन वे नियमित भरती नहीं किए जाने के लिए अदालत के समक्ष कोई ठोस कारण नहीं रख सके। इस पर अदालत ने सरकार को जमकर फटकार लगाई। एडवोकेट नरेंदर हुड्डा ने कोर्ट को बताया कि मौजूदा कांट्रैक्ट कंप्यूटर शिक्षकों की भर्ती बहुत पारदर्शी तरीके से शिक्षा विभाग द्वारा की गई थी, लेकिन अब सरकार ने पहले से काम कर रहे कंप्यूटर शिक्षकों को हटाने का मन बना लिया है।
इसके लिए सरकार ने फिर से 3336 पदों पर केवल अनुबंध के आधार पर भर्ती निकाली है। जबकि याचिकाकर्ता कंप्यूटर शिक्षक पहले से अनुबंध के आधार पर कार्य कर रहे हैं। सरकारी पक्ष द्वारा बहस में बताया गया कि पहले इन पदों पर व्यय का 75 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा व 25 फीसदी राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता था, लेकिन नए विज्ञापन के तहत होने वाली भर्ती के पदों का 100 फीसदी व्यय राज्य सरकार द्वारा ही वहन किया जाएगा। यह पूरी तरह से अलग प्रक्रिया है और कंप्यूटर टीचर्स व लैब असिस्टेंट की भर्ती पारदर्शी तरीके से निर्धारित योग्यता के तहत की जा रही है।
बेंच ने बहस सुनने के बाद सरकार को आदेश दिया कि वो शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के माध्यम से एक एफिडेविट देकर ये जानकारी दे कि ये भर्ती स्कीम किस प्रकार अलग है, चयन का तरीका क्या होगा, पहले योग्यता क्या थी और अब क्या है। हाईकोर्ट ने यह भी बताने को कहा कि ये अस्थायी बंदोबस्त आखिर कब तक चलेगा और इन पदों को रेगुलर भर्ती से क्यों नहीं भरा जाता। हाईकोर्ट ने 29 मई की परीक्षा पर रोक लगाते हुए कहा कि परीक्षा सम्पन्न होने से नए उम्मीदवारों के अधिकार भी उत्पन्न होंगे इसलिए परीक्षा पर रोक रहेगी।
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मंगलवार को जस्टिस दीपक सिब्बल की अदालत में सुनवाई के दौरान कंप्यूटर शिक्षकों के वकील नरेंदर हुड्डा ने कांट्रैक्ट कंप्यूटर शिक्षकों का पक्ष रखते हुए कहा कि शिक्षा विभाग कांट्रैक्ट कंप्यूटर शिक्षकों को हटाकर आगामी 29 मई को होने जा रही भरती परीक्षा के जरिए कांट्रैक्ट शिक्षकों को ही भर्ती करने जा रहा है।
सरकार की ओर से कोर्ट में मौजूद एडवोकेट हरीश राठी ने शिक्षा विभाग की भरती प्रक्रिया को सही ठहराने का प्रयास करते हुए बताया कि पूर्व में भरती किए गए कंप्यूटर शिक्षकों को जिस शैक्षिक योग्यता, चयन मापदंड और प्रक्रिया के तहत रखा गया था, उससे बिल्कुल अलग तरीके से नई भरती की जाएगी, लेकिन वे नियमित भरती नहीं किए जाने के लिए अदालत के समक्ष कोई ठोस कारण नहीं रख सके। इस पर अदालत ने सरकार को जमकर फटकार लगाई। एडवोकेट नरेंदर हुड्डा ने कोर्ट को बताया कि मौजूदा कांट्रैक्ट कंप्यूटर शिक्षकों की भर्ती बहुत पारदर्शी तरीके से शिक्षा विभाग द्वारा की गई थी, लेकिन अब सरकार ने पहले से काम कर रहे कंप्यूटर शिक्षकों को हटाने का मन बना लिया है।
इसके लिए सरकार ने फिर से 3336 पदों पर केवल अनुबंध के आधार पर भर्ती निकाली है। जबकि याचिकाकर्ता कंप्यूटर शिक्षक पहले से अनुबंध के आधार पर कार्य कर रहे हैं। सरकारी पक्ष द्वारा बहस में बताया गया कि पहले इन पदों पर व्यय का 75 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा व 25 फीसदी राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता था, लेकिन नए विज्ञापन के तहत होने वाली भर्ती के पदों का 100 फीसदी व्यय राज्य सरकार द्वारा ही वहन किया जाएगा। यह पूरी तरह से अलग प्रक्रिया है और कंप्यूटर टीचर्स व लैब असिस्टेंट की भर्ती पारदर्शी तरीके से निर्धारित योग्यता के तहत की जा रही है।
बेंच ने बहस सुनने के बाद सरकार को आदेश दिया कि वो शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के माध्यम से एक एफिडेविट देकर ये जानकारी दे कि ये भर्ती स्कीम किस प्रकार अलग है, चयन का तरीका क्या होगा, पहले योग्यता क्या थी और अब क्या है। हाईकोर्ट ने यह भी बताने को कहा कि ये अस्थायी बंदोबस्त आखिर कब तक चलेगा और इन पदों को रेगुलर भर्ती से क्यों नहीं भरा जाता। हाईकोर्ट ने 29 मई की परीक्षा पर रोक लगाते हुए कहा कि परीक्षा सम्पन्न होने से नए उम्मीदवारों के अधिकार भी उत्पन्न होंगे इसलिए परीक्षा पर रोक रहेगी।
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