डीयू की तर्ज पर हरियाणा में भी छात्र का रहेगा एक ही रोल नंबर
गुड़गांव : दिल्ली यूनिवर्सिटी की तर्ज पर अब हरियाणा के सभी कॉलेजों में एडमिशन लेने वाले छात्रों का कोर्स पूरा होने तक एक ही रोल नंबर रहेगा। इसके लिए उच्चतर शिक्षा विभाग तैयारी कर रहा है। छात्रों को कोर्स के दौरान हर साल दोबारा डॉक्यूमेंट्स जमा कराने की भी जरूरत नहीं होगी।
प्रदेश के कॉलेजों में एडमिशन लेने वाले छात्र को रोल नंबर दिया जाता है। वर्तमान में यह रोल नंबर प्रत्येक वर्ष बदल दिया जाता है। इससे न केवल छात्रों को परेशानी होती है बल्कि कॉलेज प्रबंधन को भी परेशान होना पड़ता है। अनेक बार ऐसा हुआ है कि कोर्स की प्रत्येक वर्ष की फीस का मिलान करने में परेशानी हो जाती है। इसके कारण उन बच्चों का भी रोल नंबर एग्जाम से पहले रुक जाता है जिनकी फीस भरी होने के बावजूद अपडेट होने में कोई गलती हो जाती है। इसको देखते हुए उच्चतर शिक्षा विभाग ने यह निर्णय लिया है कि अब पूरे कोर्स में छात्र का एक ही रोल नंबर होगा। इससे उन्हें कॉलेज की ओर से दी जाने वाली बुक्स, फीस व अन्य सुविधाओं की जानकारी भी इसी रोल नंबर से अटैच की जाएगी। इससे छात्र के प्रत्येक वर्ष डॉक्यूमेंट्स भी दोबारा लेने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्हें डायरेक्टर फी स्लिप देकर पूरी जानकारी अपडेट करनी होगी। इससे कॉलेजों में कागजी कार्रवाई भी कम हो जाएगी, साथ ही सभी को इससे सुविधा मिल जाएगी।
उच्चतर शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर अरुण जोशी का कहना है कि इसके लिए विभाग प्लानिंग कर रहा है। इस शैक्षणिक सत्र में तो ऐसा संभव नहीं हो पाएगा, लेकिन अगले शैक्षणिक सत्र में इसे पूरी तैयारी कर लागू कर दिया जाएगा।
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प्रदेश के कॉलेजों में एडमिशन लेने वाले छात्र को रोल नंबर दिया जाता है। वर्तमान में यह रोल नंबर प्रत्येक वर्ष बदल दिया जाता है। इससे न केवल छात्रों को परेशानी होती है बल्कि कॉलेज प्रबंधन को भी परेशान होना पड़ता है। अनेक बार ऐसा हुआ है कि कोर्स की प्रत्येक वर्ष की फीस का मिलान करने में परेशानी हो जाती है। इसके कारण उन बच्चों का भी रोल नंबर एग्जाम से पहले रुक जाता है जिनकी फीस भरी होने के बावजूद अपडेट होने में कोई गलती हो जाती है। इसको देखते हुए उच्चतर शिक्षा विभाग ने यह निर्णय लिया है कि अब पूरे कोर्स में छात्र का एक ही रोल नंबर होगा। इससे उन्हें कॉलेज की ओर से दी जाने वाली बुक्स, फीस व अन्य सुविधाओं की जानकारी भी इसी रोल नंबर से अटैच की जाएगी। इससे छात्र के प्रत्येक वर्ष डॉक्यूमेंट्स भी दोबारा लेने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्हें डायरेक्टर फी स्लिप देकर पूरी जानकारी अपडेट करनी होगी। इससे कॉलेजों में कागजी कार्रवाई भी कम हो जाएगी, साथ ही सभी को इससे सुविधा मिल जाएगी।
उच्चतर शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर अरुण जोशी का कहना है कि इसके लिए विभाग प्लानिंग कर रहा है। इस शैक्षणिक सत्र में तो ऐसा संभव नहीं हो पाएगा, लेकिन अगले शैक्षणिक सत्र में इसे पूरी तैयारी कर लागू कर दिया जाएगा।
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