गौरव सिंगला, न्यू गुड़गांव निजी स्कूल के खिलाफ अभिभावकों ने अब ऑनलाइन मोर्चा खोल दिया है। अभिभावकों का कहना है कि सरकार और प्रशासन ने निजी स्कूलों को अभिभावकों को लूटने की अनुमति दे रखी हैं। हर साल फीस बढ़ोत्तरी का कोई औचित्य नहीं होता है। वार्षिक व विकास शुल्क समेत कई प्रकार के शुल्क अभिभावकों से लिए जा रहे हैं।
सरकारी स्कूलों की हालत अभिभावकों को निजी स्कूलों की तरफ रुख करने को विवश कर रही है। अभिभावक संघ के प्रधान हरीश आहुजा ने अभिभावकों के दुख-दर्द को शिक्षा विभाग भारत सरकार के नाम ऑनलाइन लड़ाई शुरू कर दी है। गौरतलब है कि साइबर सिटी के दर्जनों प्राइवेट स्कूलों की फीस मनमानी के खिलाफ अभिभावक पिछले एक साल से संघर्ष कर रहे हैं। गुड़गांव स्तर पर फीस एवं फंड रेगूलेटरी कमेटी द्वारा स्कूलों की ऑडिट करा अभिभावकों को कुछ राहत मिली तो उन्हे लगा अब स्कूलों की मनमानी पर शिकंजा कसेगा लेकिन कुछ माह बाद ही इसके आदेश पर हरियाणा के मुख्य सचिव ने रोक लगाकर अभिभावकों की आशाओं पर पानी फेर दिया और अब अभिभावकों का आरोप है कि स्कूलों ने फिर से वही मनमानी फीस मांगनी शुरू कर दी है। अभिभावक संघ द्वारा शुरू की गई इस ऑनलाइन पिटीशन पर मात्र 12 घटे में 1200 से अधिक अभिभावकों ने अपने हस्ताक्षर कर इन विचारों का समर्थन किया है और प्राइवेट स्कूलों की मनमानी, सरकार व प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ एकजुट होकर बड़ा अभियान छेड़ दिया है। दीपक थरेजा, अंकुर पांडा, डॉ सौरव कालरा, हेमन्त जैन, पवन दीवान आदि अभिभावकों का कहना है कि 25 हजार रुपये वार्षिक शुल्क व विकास समेत कई प्रकार के शुल्कों में हर वर्ष 5-10 हजार रुपये की बढ़ोत्तरी कर दी जाती है जिसके चलते अभिभावक आर्थिक बोझ के तले दबे जा रहे है। छोटी-छोटी कक्षाओं में भी एक बच्चें को पढ़ाने के लिए कुल 2.5 से 3 लाख रुपये का खर्चा है।
पिटीशन में अभिभावकों ने रखी अपनी मागे :
-तत्काल प्रभाव से प्राइवेट स्कूलों द्वारा वार्षिक, विकास और अन्य शुल्क समाप्त कर फार्म 6 के अनुसार ही चार्ज करने चाहिए।
-पिछले साल के फंड को अगले साल में भेज कर स्कूल के विकास कार्यों पर खर्च किया जाना चाहिए।
-फीस बढ़ोत्तरी हर तीन साल में एक बार से अधिक नहीं और 25 प्रतिशत से अधिक नहीं किया जाना चाहिए।
-सरकार प्रत्येक जिले में अभिभावकों की शिकायतों के समाधान के लिए एक स्थायी नियामक संस्था का गठन करना चाहिए।
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