जागरण संवाददाता, अंबाला शहर : हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 10वीं
और 12वीं की वार्षिक परीक्षाएं 10 सितंबर से शुरू होंगी। 10 सितंबर से
लेकर 30 सितंबर तक चलने वाली इन परीक्षाओं के सफल संचालन के लिए बोर्ड ने
अपनी पालिसी में बदला कर दिया है।
खंड स्तर से लेकर जिलास्तर पर आयोजित होने वाली इन परीक्षाओं के लिए बोर्ड ने विभिन्न परीक्षा केंद्र तय किए हैं। साथ-साथ यह भी तय कर दिया है कि जिन स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है उन्हीं के शिक्षक उसी परीक्ष केंद्र में ड्यूटी देंगे। यही नहीं स्कूल का मुखिया ही यह तय करेगा कि इन परीक्षाओं में परीक्षा अधीक्षक कौन बनेगा। यानि स्कूल के स्टाफ के साथ परीक्षा अधीक्षक भी स्कूल का होगा।
दरअसल, अब तक बोर्ड द्वारा संचालित परीक्षाओं में परीक्षा केंद्र में अध्यापक बोर्ड द्वारा ही भेजे जाते थे। साथ ही साथ परीक्षा अधीक्षक भी बोर्ड अपने अनुसार ही तय करता था। यानि जिस स्कूल को परीक्षा केंद्र बनाया गया है वहां पर पूरा स्टाफ बाहर का होता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। पूरा स्टाफ उसी स्कूल का होगा जिसको परीक्षा केंद्र बनाया गया है। जानकारों की मानें तो इससे बोर्ड की इन परीक्षाओं पर नकल का साया मंडराता रहेगा।
क्यों लेना पड़ा बोर्ड का ऐसा निर्णय
बताया जा रहा है कि नई ट्रांसफर नीति के चलते पूरे शिक्षा विभाग में उथल-पुथल मची हुई है। अभी तक सभी शिक्षकों की सही तरीके से ड्यूटी भी नहीं लग पाई है। अलबत्ता बोर्ड के पास अभी सही तरीके से शिक्षकों की सूची नहीं है। इसी कारण बोर्ड ने पत्र जारी करते हुए संबंधित परीक्षा केंद्र के स्टाफ की ही ड्यूटी परीक्षा में लगा दी है। परीक्षा में ड्यूटी कौन-कौन देगा यह स्कूल मुखिया पर निर्भर करेगा।
क्या हो सकता है नुकसान
जिन स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। उनका पूरा स्टाफ दूसरे स्कूलों के शिक्षकों के लिए सर्व विदित है। सभी जानते हैं कि फलां स्कूल में कौन ¨प्रसिपल है और कौन हेडमास्टर। साथ ही अध्यापकों की पूरी सूची भी आसानी से उपलब्ध हो जाती है। ऐसे में जिस स्कूल के बच्चों का परीक्षा केंद्र बना होगा उसका स्टाफ आपस में सें¨टग कर सकता है। खुद विद्यार्थी भी अपने स्तर पर ऐसा कर सकते हैं। ऐसे में नकल की अधिक संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता।
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दरअसल, अब तक बोर्ड द्वारा संचालित परीक्षाओं में परीक्षा केंद्र में अध्यापक बोर्ड द्वारा ही भेजे जाते थे। साथ ही साथ परीक्षा अधीक्षक भी बोर्ड अपने अनुसार ही तय करता था। यानि जिस स्कूल को परीक्षा केंद्र बनाया गया है वहां पर पूरा स्टाफ बाहर का होता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। पूरा स्टाफ उसी स्कूल का होगा जिसको परीक्षा केंद्र बनाया गया है। जानकारों की मानें तो इससे बोर्ड की इन परीक्षाओं पर नकल का साया मंडराता रहेगा।
क्यों लेना पड़ा बोर्ड का ऐसा निर्णय
बताया जा रहा है कि नई ट्रांसफर नीति के चलते पूरे शिक्षा विभाग में उथल-पुथल मची हुई है। अभी तक सभी शिक्षकों की सही तरीके से ड्यूटी भी नहीं लग पाई है। अलबत्ता बोर्ड के पास अभी सही तरीके से शिक्षकों की सूची नहीं है। इसी कारण बोर्ड ने पत्र जारी करते हुए संबंधित परीक्षा केंद्र के स्टाफ की ही ड्यूटी परीक्षा में लगा दी है। परीक्षा में ड्यूटी कौन-कौन देगा यह स्कूल मुखिया पर निर्भर करेगा।
क्या हो सकता है नुकसान
जिन स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। उनका पूरा स्टाफ दूसरे स्कूलों के शिक्षकों के लिए सर्व विदित है। सभी जानते हैं कि फलां स्कूल में कौन ¨प्रसिपल है और कौन हेडमास्टर। साथ ही अध्यापकों की पूरी सूची भी आसानी से उपलब्ध हो जाती है। ऐसे में जिस स्कूल के बच्चों का परीक्षा केंद्र बना होगा उसका स्टाफ आपस में सें¨टग कर सकता है। खुद विद्यार्थी भी अपने स्तर पर ऐसा कर सकते हैं। ऐसे में नकल की अधिक संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता।
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