जागरण संवाददाता, अंबाला : आनलाइन
ट्रांसफर के खेल में अंबाला शिक्षा विभाग फेल हो गया। हालात यह हैं कि अब
स्कूलों में कोई पढ़ाने वाला शिक्षक नहीं बचा। वहीं जहां विद्याíथयों की
संख्या नहीं हैं वहां शिक्षकों की भरमार है। ऐसे में जिले के लगातार गिर
रहे परीक्षा परिणाम को सुधारने की कवायद में जुटे शिक्षा विभाग व प्रदेश
सरकार को करारा झटका लगा है।
दरअसल अंबाला के साहा ब्लाक में दर्जनों ऐसे स्कूल हैं जहां 100 या इससे अधिक विद्याíथयों की संख्या पर केवल एक ही छात्र है। वहीं 35-35 विद्याíथयों की संख्या वाले स्कूलों में सात-सात शिक्षक बैठे हैं जहां तीन-चार से काम चलाया जा सकता है। ऐसे में आनलाइन ट्रांसफर सिस्टम स्कूल व शिक्षा विभाग के गले की फांस बन गया है।
दरअसल साहा ब्लाक के लंगर शनि गवर्नमेंट मिडल स्कूल में इस समय 35 विद्यार्थी हैं। यहां छठी से आठवीं कक्षा की पढ़ाई होती है। इन 35 विद्याíथयों को पढ़ाने के लिए सात शिक्षक स्कूल में नियुक्त हैं। खास बात यह है कि स्कूल में संस्कृत का एक भी विद्यार्थी नहीं है और संस्कृत अध्यापक लंबे समय से कार्यरत हैं। क्योंकि मिडल स्कूलों में संस्कृत की प्रथम पोस्ट है। वहीं एसएस के दो अध्यापक हैं। दूसरी तरफ केसरी के प्राथमिक स्कूल की बात करें तो यहां पर 150 विद्याíथयों पर एक ही टीचर है। हैड टीचर बल¨वद्र कौर ही सभी विद्याíथयों को बारी-बारी पढ़ाती हैं। ऐसे में स्कूल में शिक्षा कैसी होती होगी, यह सोचा भी नहीं जा सकता। इसी तरह तेपला की प्राथमिक पाठशाला में 70 विद्याíथयों पर भी सात शिक्षक है।
जागरण सवाल?
जिले के 10वीं और 12वीं कक्षा के परिणाम की बात करें तो इस बार जिले में 10वीं कक्षा का परिणाम 35 प्रतिशत के आंकड़े को भी नहीं छू पाया। परिणाम में हम सभी 22 जिलों में 17वें नंबर पर रहे। इसी तरह 12वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम भी अपेक्षाकृत खराब रहा और 60 प्रतिशत के पास आंकड़े को हमारे होनहार नहीं छू पाए। ऐसे में शिक्षकों की अव्यवस्था ने पूरे सिस्टम को अब और भी बिगाड़ दिया है।
वर्जन..
जहां से भी इस तरह की शिकायतें मिल रही हैं वहां पर सुधार किया जा रहा है। खंड शिक्षा अधिकारी इस मामले में उचित कार्रवाई करते हुए शिक्षकों की उचित व्यवस्था कर सकती हैं। आनलाइन ट्रांसफर सरकार के आदेशों पर ही हुई हैं। ऐसे में जहां इस तरह की दिक्कतें आ रही हैं वहां हम सुधार करने में लगे हैं।
धर्मबीर कादियान, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
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दरअसल अंबाला के साहा ब्लाक में दर्जनों ऐसे स्कूल हैं जहां 100 या इससे अधिक विद्याíथयों की संख्या पर केवल एक ही छात्र है। वहीं 35-35 विद्याíथयों की संख्या वाले स्कूलों में सात-सात शिक्षक बैठे हैं जहां तीन-चार से काम चलाया जा सकता है। ऐसे में आनलाइन ट्रांसफर सिस्टम स्कूल व शिक्षा विभाग के गले की फांस बन गया है।
दरअसल साहा ब्लाक के लंगर शनि गवर्नमेंट मिडल स्कूल में इस समय 35 विद्यार्थी हैं। यहां छठी से आठवीं कक्षा की पढ़ाई होती है। इन 35 विद्याíथयों को पढ़ाने के लिए सात शिक्षक स्कूल में नियुक्त हैं। खास बात यह है कि स्कूल में संस्कृत का एक भी विद्यार्थी नहीं है और संस्कृत अध्यापक लंबे समय से कार्यरत हैं। क्योंकि मिडल स्कूलों में संस्कृत की प्रथम पोस्ट है। वहीं एसएस के दो अध्यापक हैं। दूसरी तरफ केसरी के प्राथमिक स्कूल की बात करें तो यहां पर 150 विद्याíथयों पर एक ही टीचर है। हैड टीचर बल¨वद्र कौर ही सभी विद्याíथयों को बारी-बारी पढ़ाती हैं। ऐसे में स्कूल में शिक्षा कैसी होती होगी, यह सोचा भी नहीं जा सकता। इसी तरह तेपला की प्राथमिक पाठशाला में 70 विद्याíथयों पर भी सात शिक्षक है।
जागरण सवाल?
जिले के 10वीं और 12वीं कक्षा के परिणाम की बात करें तो इस बार जिले में 10वीं कक्षा का परिणाम 35 प्रतिशत के आंकड़े को भी नहीं छू पाया। परिणाम में हम सभी 22 जिलों में 17वें नंबर पर रहे। इसी तरह 12वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम भी अपेक्षाकृत खराब रहा और 60 प्रतिशत के पास आंकड़े को हमारे होनहार नहीं छू पाए। ऐसे में शिक्षकों की अव्यवस्था ने पूरे सिस्टम को अब और भी बिगाड़ दिया है।
वर्जन..
जहां से भी इस तरह की शिकायतें मिल रही हैं वहां पर सुधार किया जा रहा है। खंड शिक्षा अधिकारी इस मामले में उचित कार्रवाई करते हुए शिक्षकों की उचित व्यवस्था कर सकती हैं। आनलाइन ट्रांसफर सरकार के आदेशों पर ही हुई हैं। ऐसे में जहां इस तरह की दिक्कतें आ रही हैं वहां हम सुधार करने में लगे हैं।
धर्मबीर कादियान, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।