; paras[X - 1].parentNode.insertBefore(ad1, paras[X]); } if (paras.length > X + 4) { var ad1 = document.createElement('div'); ad1.className = 'ad-auto-insert ad-first'; ad1.innerHTML = ` ; paras[X + 3].parentNode.insertBefore(ad2, paras[X + 4]); } if (isMobile && paras.length > X + 8) { var ad1 = document.createElement('div'); ad1.className = 'ad-auto-insert ad-first'; ad1.innerHTML = ` ; paras[X + 7].parentNode.insertBefore(ad3, paras[X + 8]); } });

Advertisement

सरकारी स्कूल के दस बच्चों पर तीन शिक्षक समेत पांच का स्टॉफ

नोलायजा सरकारी स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे  गांव के अधिकांश बच्चे सरकारी स्कूल के बजाय दो किलोमीटर दूर निजी स्कूल में जाना पसंद कर रहे हैं। प्रवेश उत्सव में भरसक प्रयास करने के बावजूद विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ोत्तरी नहीं हो रही है। गत वर्ष एक मात्र दाखिल हुआ था इस बार छठी, सातवीं और आठवीं कक्षा में विद्यार्थियों की संख्या दस के आंकड़े तक पहुंच गई है।

इन विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए स्कूल में पीटीआई समेत तीन शिक्षक, क्लर्क, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नियुक्त हैं। इन पर प्रतिमाह करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। मिड-डे-मील योजना के तहत खाना बनाया जाता है। कार्यरत वर्कर को हर माह करीब 2500 बतौर मानदेय मिल रहा है। मिडिल स्कूल के प्रांगण में ही प्राथमिक पाठशाला चलाई जा रही है।

इसमें दो जेबीटी शिक्षकों की भी नियुक्ति की गई है लेकिन पहली से पांचवीं कक्षा तक बच्चों की संख्या 26 से अधिक नहीं है। इसी गांव से करीब 160 बच्चे पढ़ने के लिए दो किलोमीटर दूर निजी स्कूलों में जाते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक छात्र संख्या घटने में विभागीय शिक्षक जिम्मेदार हैं। लेट लतीफी और लापरवाही से परेशान होकर बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला करवाना पड़ा है।

मुफ्त की सुविधाएं नजरअंदाज
नोलायजा से नांगल चौधरी करीब दो किलोमीटर दूर है। यहां बच्चों को पढ़ाने के लिए अभिभावकों को दाखिला शुल्क के अलावा वाहन चार्ज भी चुकाना पड़ रहा है। बच्चों की सुविधा को लेकर विभाग ने गांव में मिडिल स्कूल खोला है। इसमें निशुल्क शिक्षा, पुस्तक, वर्दी और वजीफे की व्यवस्था की गई है। विभिन्न विषयों के योग्य शिक्षक नियुक्त हैं जबकि निजी स्कूलों में अधिकांश टीचर पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं हैं। इसके बावजूद प्राइवेट संस्थाओं में छात्र संख्या निरंतर बढ़ रही है।

निजी स्कूलों में पढ़ाना शान समझते हैं अभिभावक
स्कूल के इंचार्ज जयवीर सिंह का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई में लापरवाही नहीं  होती है लेकिन अभिभावक निजी स्कूलों में दाखिला करवाना शान समझते हैं।  एक-दूसरे की देखादेखी बच्चे प्राइवेट स्कूलों में भेजते हैं। पिछले साल मात्र एक दाखिला था अबकी बार नौ बच्चे बढ़े हैं। 10 साल के दौरान बच्चे कभी भी ब्लाक टॉपर नहीं रहे हैं। वर्तमान सत्र में तीन-चार बच्चे इंटेलीजेंट हैं। अन्य की प्रोग्रेस संतोषजनक नहीं है।

आला अधिकारियों को अवगत करवाया
गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य बीरसिंह चौधरी को नोलायजा स्कूल का  डीडीओ चार्ज दिया गया है। उन्होंने बताया कि चालू सत्र के दौरान अध्यापकों को छात्र संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए थे किंतु उम्मीद के मुताबिक सकारात्मक परिणाम नहीं मिले। स्थिति से आला अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया।
Sponsored link : सरकारी नौकरी - Army /Bank /CPSU /Defence /Faculty /Non-teaching /Police /PSC /Special recruitment drive /SSC /Stenographer /Teaching Jobs /Trainee / UPSC

UPTET news

'; (function() { var dsq = document.createElement('script'); dsq.type = 'text/javascript'; dsq.async = true; dsq.src = '//' + disqus_shortname + '.disqus.com/embed.js'; (document.getElementsByTagName('head')[0] || document.getElementsByTagName('body')[0]).appendChild(dsq); })();