चंडीगढ़(रश्मि) : साल 2016 में शिक्षा विभाग ने कई
प्रशंसनीय कार्य किए। वहीं कई मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए उन्हें
निपटाया। प्राइवेट स्कूलों पर नकेल कसने के लिए पॉलिसी बनाई, जिसका नतीजा
हुआ कि कई अभिभावक प्राइवेट स्कूलों की गलत नीतियों के खिलाफ खुलकर बोले और
विभाग ने भी उन पर कार्रवाई की।
इस वर्ष शिक्षक भर्ती घोटाले का मामला सबसे अधिक गर्माया रहा। जिसमें परीक्षा पास करने वाले शिक्षकों में कई शिक्षक ऐसे थे जिन्हें पंजाबी लिखनी तो दूर पढऩी तक नहीं आती थी, जबकि परीक्षा में पंजाबी भाषा से भी प्रश्न पूछे गए थे। इसकी जांच शुरू हुई तो सामने आया कि शहर के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले करीब 900 शिक्षकशक के घेरे में आए गए। कई शिक्षकों को हिरासत में लिया गया और पूछताछ हुई। अभी तक किसी शिक्षक पर आरोप साबित नहीं हुए है।
डैपुटेशन का मुद्दा गर्माया रहा :
सांसद किरण खेर ने भी डैपुटेशन पर आए शिक्षकों को वापस भेजने का बयान दिया था। शिक्षा विभाग भी वर्षों से डैपुटेशन पर चंडीगढ़ आए शिक्षकों की अवधि खत्म हो जाने के बाद भी उन्हें उनके पेरैंट स्टेट न भेजने के कारण काफी चर्चा में रहा है।
जी.एस.एस.एस. मोलीजागरां रहा सुर्खियों में :
गवर्नमैंट सीनियर सेकैंडरी स्कूल मोलीजागरां में बच्चे की पिटाई व मिड-डे मिल का मामला जोरों पर रहा। जिसके चलते स्कूल प्रिंसीपल मंजीत कौर का तबादला कर दिया गया। स्कूल में मिड-डे मिल कर्मी न रखने को लेकर भाजपा नेता अनिल दुबे व पिं्रसीपल में तू-तू-मैं-मैं हो गई थी, जिसके बाद मामला पुलिस तक भी पहुंचा था।
चार नए स्कूलों की मिली सौगात :
विभाग ने चार नए स्कूल खोले जो सैक्टर-48,49 व मनीमाजरा में खोले गए। इनके खुलने से करीब 30 हजार विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। इसके बाद अब सरकारी स्कूलों की संख्या 114 हो गई है।
कॉलेजों में भी रही हलचल :
पी.जी.जी.सी.जी.-42 की छात्राएं नहीं दे पाईं परीक्षा: इस वर्ष पी.जी.जी.सी.जी.-42 की 130 छात्राओं को रोल नंबर न मिलने का मामला भी गर्माया रहा। जिसका छात्राओं ने जमकर विरोध किया पर वे परीक्षा देने से वंचित रहीं।
कॉलेजों में ऑनलाइन जमा हुई फीस :
उच्चतर शिक्षा विभाग में भी कई अहम कार्य हुए, जिसमें सबसे पहले दाखिले के मौके पर छात्रों की फीस ऑनलाइन जमा हुई। फीस ऑनलाइन जमा होने से सबसे बड़ा लाभ यह मिला कि छात्रोंं को फीस जमा कराने के लिए न तो कॉलेज में लंबी-लंबी लाइनों में लगना पड़ा और न ही फीस जमा कराने में देरी हुई।
प्राइवेट स्कूलों को फटकार :
प्राइवेट स्कूल मनमर्जी से किताबों और वर्दियों के नाम पर अभिभावकों से पैसे लेते थे, जिसके खिलाफ अप्रैल, 2016 में अभिभावकों ने शिकायत की। उसके बाद पहले शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कई स्कूलों में रेड की और वहां पर पाई गई कमियों के बाद उन्हें सुधारने के लिए निर्देश दिए। विभाग के निर्देशों को प्राइवेट स्कूलों ने नहीं माना, जिसके बाद कई अभिभावकों और प्रशासन ने हाईकोर्ट की शरण ली।
चार स्कूलों को जोड़ा मिड-डे मिल किचन से :
सैक्टर-37 स्थित स्कूलों में पहले सिटको, अंबेडकर इंस्टीच्यूट ऑफ होटल मैनेजमैंट व अन्य संस्थानों से मिड-डे मिल आता था, लेकिन शिक्षा विभाग ने स्कूलों को किचन से ही जोडऩे का फैसला लिया।
इस वर्ष शिक्षक भर्ती घोटाले का मामला सबसे अधिक गर्माया रहा। जिसमें परीक्षा पास करने वाले शिक्षकों में कई शिक्षक ऐसे थे जिन्हें पंजाबी लिखनी तो दूर पढऩी तक नहीं आती थी, जबकि परीक्षा में पंजाबी भाषा से भी प्रश्न पूछे गए थे। इसकी जांच शुरू हुई तो सामने आया कि शहर के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले करीब 900 शिक्षकशक के घेरे में आए गए। कई शिक्षकों को हिरासत में लिया गया और पूछताछ हुई। अभी तक किसी शिक्षक पर आरोप साबित नहीं हुए है।
डैपुटेशन का मुद्दा गर्माया रहा :
सांसद किरण खेर ने भी डैपुटेशन पर आए शिक्षकों को वापस भेजने का बयान दिया था। शिक्षा विभाग भी वर्षों से डैपुटेशन पर चंडीगढ़ आए शिक्षकों की अवधि खत्म हो जाने के बाद भी उन्हें उनके पेरैंट स्टेट न भेजने के कारण काफी चर्चा में रहा है।
जी.एस.एस.एस. मोलीजागरां रहा सुर्खियों में :
गवर्नमैंट सीनियर सेकैंडरी स्कूल मोलीजागरां में बच्चे की पिटाई व मिड-डे मिल का मामला जोरों पर रहा। जिसके चलते स्कूल प्रिंसीपल मंजीत कौर का तबादला कर दिया गया। स्कूल में मिड-डे मिल कर्मी न रखने को लेकर भाजपा नेता अनिल दुबे व पिं्रसीपल में तू-तू-मैं-मैं हो गई थी, जिसके बाद मामला पुलिस तक भी पहुंचा था।
चार नए स्कूलों की मिली सौगात :
विभाग ने चार नए स्कूल खोले जो सैक्टर-48,49 व मनीमाजरा में खोले गए। इनके खुलने से करीब 30 हजार विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। इसके बाद अब सरकारी स्कूलों की संख्या 114 हो गई है।
कॉलेजों में भी रही हलचल :
पी.जी.जी.सी.जी.-42 की छात्राएं नहीं दे पाईं परीक्षा: इस वर्ष पी.जी.जी.सी.जी.-42 की 130 छात्राओं को रोल नंबर न मिलने का मामला भी गर्माया रहा। जिसका छात्राओं ने जमकर विरोध किया पर वे परीक्षा देने से वंचित रहीं।
कॉलेजों में ऑनलाइन जमा हुई फीस :
उच्चतर शिक्षा विभाग में भी कई अहम कार्य हुए, जिसमें सबसे पहले दाखिले के मौके पर छात्रों की फीस ऑनलाइन जमा हुई। फीस ऑनलाइन जमा होने से सबसे बड़ा लाभ यह मिला कि छात्रोंं को फीस जमा कराने के लिए न तो कॉलेज में लंबी-लंबी लाइनों में लगना पड़ा और न ही फीस जमा कराने में देरी हुई।
प्राइवेट स्कूलों को फटकार :
प्राइवेट स्कूल मनमर्जी से किताबों और वर्दियों के नाम पर अभिभावकों से पैसे लेते थे, जिसके खिलाफ अप्रैल, 2016 में अभिभावकों ने शिकायत की। उसके बाद पहले शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कई स्कूलों में रेड की और वहां पर पाई गई कमियों के बाद उन्हें सुधारने के लिए निर्देश दिए। विभाग के निर्देशों को प्राइवेट स्कूलों ने नहीं माना, जिसके बाद कई अभिभावकों और प्रशासन ने हाईकोर्ट की शरण ली।
चार स्कूलों को जोड़ा मिड-डे मिल किचन से :
सैक्टर-37 स्थित स्कूलों में पहले सिटको, अंबेडकर इंस्टीच्यूट ऑफ होटल मैनेजमैंट व अन्य संस्थानों से मिड-डे मिल आता था, लेकिन शिक्षा विभाग ने स्कूलों को किचन से ही जोडऩे का फैसला लिया।