ये है धारा 134
आर्थिकरूप से कमजोर विद्यार्थियों को 134 के तहत प्राइवेट स्कूलों में दाखिला लेने को कक्षा 8 तक के 1163 विद्यार्थी प्रथम पड़ाव पार कर चुके हैं। अब दूसरे पड़ाव में इनकी काउंसलिंग कराई जाएगी।
इसके सबसे कम सातवीं कक्षा में दाखिले के लिए परीक्षा देने वाले छात्र रहे। इसमें कुल 300 परीक्षार्थियों ने परीक्षा में भाग लिया जबकि पास मात्र 74 छात्र ही हो सके। मौलिक शिक्षा विभाग ने तो समय पर आंकड़े जारी कर दिए लेकिन शिक्षाधिकारी कार्रवाई उत्तीर्ण हुए परीक्षार्थियों की सूची में गोपनीयता ही बनाए रहा।
हैरानी की बात है कि जहां पूरे प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर उत्तीर्ण होने वाले परीक्षार्थियों का डाटा कंपाइल कर लिया है, वहीं हिसार के जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय ताे अलग ही सुरअलापते दिख रहे हैं। जिला शिक्षाधिकारी बलजीत सहरावत की मानें तो धारा 134 की परीक्षा ब्लॉक स्तर पर होती है, और इसकी जानकारी भी ब्लॉक पर ही रहती है। जिला स्तरीय अधिकारियों का इस परीक्षा से कोई ताल्लुक नहीं होता। 134 के तहत कार्य करने वाले सामाजिक संगठनों ने भी डीईओ के इस रवैये पर आक्रोश व्यक्त किया।
कक्षा आवेदन परीक्षा देने वाले अनुपस्थित उत्तीर्ण
2391 366 25 330
3 313 289 24 248
4 320 285 35 139
5 325 298 27 130
6 373 340 33 155
7 323 300 23 74
8 291 273 18 87
कक्षा9 से 12 तक
9266 229 37
10 180 160 20
12 54 41 13
शिक्षा का अधिकार कानून के तहत प्राइवेट स्कूल में आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की परीक्षा लेकर 10 प्रतिशत कोटे के साथ दाखिला कराया जाता है। इसमें इस वर्ष से दो लाख रुपये से कम आय रखने वाले अभिभावकों के बच्चों ने परीक्षा के लिए आवेदन किया था। परीक्षा देने से पूर्व प्राइवेट स्कूलों को अपने यहां खाली सीटों को भी दिखाना था। सीट दिखाने पर शिक्षा विभाग ने प्राइवेट स्कूलों को नाेटिस भी जारी किए।
गड़बड़ी मिली तो शिकायत करेंगे
स्वास्थ्यशिक्षा सहयोग संगठन के जिला प्रधान पुनीत कुमार ने बताया कि धारा 134 के तहत शिक्षा विभाग ने गंभीरता नहीं दिखाई। आंकड़ों को गोपनीय बना लिया गया। वहीं जब संगठन के सदस्यों ने कई बच्चों से बात की तो बच्चों ने बताया कि स्कूल में जो पढ़ा उस प्रकार के प्रश्न तो परीक्षा में आए ही नहीं। गड़बड़ी मिली तो शिकायत भी उच्चाधिकारियों से की जाएगी।
मार्किंग में सख्ती बरती गई
^134की मार्किंग में काफी सख्ती बरती गई। कक्षा 2 से 8 तक बच्चों ने अच्छा परफार्म किया है। हमने शिक्षकों से ठीक से कॉपियों के निरीक्षण के निर्देश दिए थे ताकि किसी के साथ गलती हो।'' संतोषहुड्डा, जिला मौलिक शिक्षाधिकारी
आर्थिकरूप से कमजोर विद्यार्थियों को 134 के तहत प्राइवेट स्कूलों में दाखिला लेने को कक्षा 8 तक के 1163 विद्यार्थी प्रथम पड़ाव पार कर चुके हैं। अब दूसरे पड़ाव में इनकी काउंसलिंग कराई जाएगी।
इसके सबसे कम सातवीं कक्षा में दाखिले के लिए परीक्षा देने वाले छात्र रहे। इसमें कुल 300 परीक्षार्थियों ने परीक्षा में भाग लिया जबकि पास मात्र 74 छात्र ही हो सके। मौलिक शिक्षा विभाग ने तो समय पर आंकड़े जारी कर दिए लेकिन शिक्षाधिकारी कार्रवाई उत्तीर्ण हुए परीक्षार्थियों की सूची में गोपनीयता ही बनाए रहा।
हैरानी की बात है कि जहां पूरे प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर उत्तीर्ण होने वाले परीक्षार्थियों का डाटा कंपाइल कर लिया है, वहीं हिसार के जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय ताे अलग ही सुरअलापते दिख रहे हैं। जिला शिक्षाधिकारी बलजीत सहरावत की मानें तो धारा 134 की परीक्षा ब्लॉक स्तर पर होती है, और इसकी जानकारी भी ब्लॉक पर ही रहती है। जिला स्तरीय अधिकारियों का इस परीक्षा से कोई ताल्लुक नहीं होता। 134 के तहत कार्य करने वाले सामाजिक संगठनों ने भी डीईओ के इस रवैये पर आक्रोश व्यक्त किया।
कक्षा आवेदन परीक्षा देने वाले अनुपस्थित उत्तीर्ण
2391 366 25 330
3 313 289 24 248
4 320 285 35 139
5 325 298 27 130
6 373 340 33 155
7 323 300 23 74
8 291 273 18 87
कक्षा9 से 12 तक
9266 229 37
10 180 160 20
12 54 41 13
शिक्षा का अधिकार कानून के तहत प्राइवेट स्कूल में आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की परीक्षा लेकर 10 प्रतिशत कोटे के साथ दाखिला कराया जाता है। इसमें इस वर्ष से दो लाख रुपये से कम आय रखने वाले अभिभावकों के बच्चों ने परीक्षा के लिए आवेदन किया था। परीक्षा देने से पूर्व प्राइवेट स्कूलों को अपने यहां खाली सीटों को भी दिखाना था। सीट दिखाने पर शिक्षा विभाग ने प्राइवेट स्कूलों को नाेटिस भी जारी किए।
गड़बड़ी मिली तो शिकायत करेंगे
स्वास्थ्यशिक्षा सहयोग संगठन के जिला प्रधान पुनीत कुमार ने बताया कि धारा 134 के तहत शिक्षा विभाग ने गंभीरता नहीं दिखाई। आंकड़ों को गोपनीय बना लिया गया। वहीं जब संगठन के सदस्यों ने कई बच्चों से बात की तो बच्चों ने बताया कि स्कूल में जो पढ़ा उस प्रकार के प्रश्न तो परीक्षा में आए ही नहीं। गड़बड़ी मिली तो शिकायत भी उच्चाधिकारियों से की जाएगी।
मार्किंग में सख्ती बरती गई
^134की मार्किंग में काफी सख्ती बरती गई। कक्षा 2 से 8 तक बच्चों ने अच्छा परफार्म किया है। हमने शिक्षकों से ठीक से कॉपियों के निरीक्षण के निर्देश दिए थे ताकि किसी के साथ गलती हो।'' संतोषहुड्डा, जिला मौलिक शिक्षाधिकारी