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चौटाला परिवार को हरियाणा में नौकरियां देने की वजह से नहीं हुई थी सजाः हुड्डा

चंडीगढ़.जेबीटी टीचर भर्ती घोटाले में हुई सजा को लेकर चौटाला परिवार जहां अब तक कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर हमलावर रहा है। वहीं, अब लंबे समय बाद इस मामले में हुड्डा बैकफुट पर नजर आ रहे हैं। हुड्डा का कहना है कि पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला को हरियाणा में नौकरियां देने की वजह से सजा नहीं हुई, बल्कि भ्रष्टाचार, आपराधिक षडयंत्र और दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल करके धोखाधड़ी करने के मामले में सजा हुई है।
अगर, नौकरियां देने की वजह से ही सजा हुई होती तो फिर हमारी (हुड्डा) चार पीढ़ियां भी बाहर नहीं आ सकतीं। क्योंकि हमने तो उनसे कहीं ज्यादा नौकरियां दी हैं।

हुड्डा ने वीरवार को चंडीगढ़ में अपने निवास पर मीडिया से बातचीत में कहा कि पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला का यह आरोप भी गलत है कि उन्हें हमने या हमारी सरकार ने सजा कराई थी। हुड्डा ने कहा कि चौटाला परिवार से उनके बहुत पुराने संबंध हैं। उन दोनों के पिता एक साथ जेल में भी रहे हैं। इस नाते ओमप्रकाश चौटाला मेरे बड़े भाई हैं। इस उम्र में आकर कम से कम उन्हें यह झूठ नहीं बोलना चाहिए।

मामले से जुड़े तथ्य रखते हुए हुड्डा ने कहा कि संजीव कुमार ने अपने आपको व्हिसल ब्लोअर बताते हुए 5 जून, 2003 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने 25 नवंबर, 2003 को सीबीआई को जांच करने का आदेश दिया था। सीबीआई ने इस पर 12 दिसंबर, 2003 को प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज की थी। इसके बाद 24 मई, 2004 को सीबीआई ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-13 सपठित 13 (1) डी के तहत एफआईआर दर्ज कर ली थी। इस समय तक चौटाला ही हरियाणा के मुख्यमंत्री थे। बाद में इस केस को दिल्ली ट्रांसफर करने की याचिका भी उन्हीं के कार्यकाल में लगी थी।

हुड्डा की इस सफाई के राजनीतिक मायनेः

जेबीटी टीचर भर्ती घोटाले में कई साल बाद अचानक हुड्डा के इस तरह सफाई दिए जाने के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। हालांकि उनका कहना है कि पूर्व सीएम चौटाला ने अभी उनका नाम लिया है, इसलिए वे अब सफाई दे रहे हैं। कोर्ट का फैसला होने से पहले तक चौटाला परिवार ने उन पर इस तरह का कोई निशाना नहीं साधा था। लेकिन, राजनीतिक क्षेत्रों में माना जा रहा है कि हुड्डा इस सफाई के बहाने राज्य के जाट वोट बैंक में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते हैं।
उन्हें कहीं न कहीं यह भी उम्मीद है कि इनेलो पिछले 13 साल से सत्ता के बाहर है। इस वजह से अगर उनके वोटर और कार्यकर्ता का मन बदले भी तो वह उनके खेमे में आ जाए। कांग्रेस में असमंजस की स्थिति को देखते हुए हुड्डा अब अपने लिए कोई भी राजनीतिक दरवाजा बंद नहीं करना चाहते।

नौकरियों में इस सरकार का भी है घोटालाः

हुड्डा ने कहा कि नौकरियों को लेकर मौजूदा भाजपा सरकार में भी घोटाला हुआ है। सीएम मनोहर लाल ने विधानसभा में ऑन द फ्लोर बयान दिया था कि उनकी सरकार प्रदेश में १० लाख नौकरियां देगी। इसके बाद शीतकालीन सत्र में सीएम ने 17000 नौकरियां देने का दावा किया। इनमें ९००० से ज्यादा जेबीटी टीचर तो कांग्रेस राज के समय ही चयनित हो गए थे। बाकी करीब ८००० नौकरियां बचीं। अगर, इन्हें तीन साल में बांटें तो हर साल लगभग 2500 नौकरियां दी हैं। जबकि हर साल २५ हजार से ज्यादा कर्मचारी रिटायर हुए हैं। इसकी हकीकत क्या है, सरकार को इस बारे में व्हाइट पेपर जारी करना चाहिए।

सरकार ने ही कराए तीनों बार झगड़ेः

हुड्डा ने आरोप लगाया कि हरियाणा में 3 साल के दौरान कानून-व्यवस्था की तीन बड़ी घटनाएं हुई हैं। तीनों ही बार मौजूदा सरकार ने ही झगड़े कराए, क्योंकि मनोहर लाल के नेतृत्व वाली सरकार प्रदेश के लोगों को बांटना चाहती है। जाट आरक्षण मामले में प्रकाश सिंह कमेटी ने सीएम ऑफिस तक अंगुलियां उठाई है।
पंचकूला की हिंसा को लेकर धन्यवाद करना चाहिए हाईकोर्ट का, जिसने संज्ञान लिया। सरकार हाईकोर्ट में भी लगातार झूठ बोलती रही और बयान बदलती रही। बाहर मंत्री डेरा समर्थकों के समर्थन में बयानबाजी करते रहे। इसी तरह डाडम माइंस भ्रष्टाचार मामले को लेकर सीएम ऑफिस तक पर टिप्पणी कर चुकी है।

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