संवाद सहयोगी, लाडवा : प्रदेश सरकार की ओर से जारी किए गए नियम 134ए के
तहत निजी स्कूल संचालक अपनी हठधर्मिता की सारी हदें पार करते हुए सरकारी
नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं। बच्चे व उनके अभिभावक दर-दर की ठोकरें खाने
पर विवश हैं।
गौरतलब है कि कक्षा दूसरी से कक्षा 12वीं तक के गरीब व
होशियार बच्चों को एक लिखित परीक्षा में कम से कम 55 प्रतिशत तक अंक
प्राप्त करने वाले बच्चों को शिक्षा विभाग द्वारा नियम 134ए के तहत अलग-अलग
स्कूल अलाट किए गए थे, जिसकी आज अंतिम तिथि थी, परंतु निजी स्कूल संचालकों
ने अपने-अपने स्कूलों में इस कैटेगरी के बच्चों को प्रवेश न देने के लिए
मानों कसम ही खा रखी हैं। यहां तक भी कह रखा है कि स्कूल के मुख्य गेट पर
इस नियम के तहत दाखिला लेने वाले बच्चों व उनके अभिभावकों के प्रवेश पर ही
प्रतिबंध लगा दिया। अभिभावकों ने बताया कि निजी स्कूल संचालक बच्चों के
दाखिले के नाम पर फीसों की लिस्ट थमा देते हैं जिसे गरीब अभिभाव पूरा करने
मे असमर्थ हैं। वहीं अभिभावकों ने कहा कि एक निजी स्कूल ने 71 प्रतिशत अंक
प्राप्त करने वाले छात्र को तो प्रवेश दे दिया है, परंतु 76 प्रतिशत अंक
प्राप्त करने वाले छात्र को दाखिला देने से इंकार कर दिया है। इसी मुद्दे
को लेकर शुक्रवार को खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय लाडवा में जिला मौलिक
शिक्षा अधिकारी सतनाम ¨सह भट्टी ने स्कूल के प्रतिनिधियों व अभिभावकों की
बैठक लेकर उनकी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया। बच्चों के
अभिभावकों ने निजी स्कूलों के खिलाफ जमकर भडांस निकाली। अधिकारी सतनाम ¨सह
भट्टी ने अभिभावकों की समस्याओं को सुनकर संबंधित स्कूल संचालकों को सख्त
दिशा निर्देश दिए। नियम के तहत दाखिला लेने वाले बच्चों से कोई भी ट्यूशन
फीस, दाखिला फीस, सालाना फंड नहीं लिए जाएंगे, परंतु वैन खर्च या कोई
तकनीकी शिक्षा की फीस अवश्य देनी होगी। उन्होंने अभिभावकों की मांग पर
दाखिला की अंतिम तिथि 28 अप्रैल तक बढ़ाने की भी घोषणा की।
इस अवसर पर शिक्षा विभाग से एसओ मौलिक शिक्षा विभाग के एकाउंट अधिकारी
एसएन शर्मा, शारदारानी, संतोष चौहान, अभिभावक विजय कौशिक, कर्मबीर बन,
राजेश कुमार सैनी, जावेद, कृष्ण कुमार बन, स¨लद्र कुमार छलौंदी उपस्थित थे।
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